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Miya Museum: UAPA के तहत मिया परिषद के अध्यक्ष और महासचिव सहित 5 गिरफ्तार, आतंकी संगठनों से जुड़े होने का शक

Thu, 27 Oct 2022 12:49 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, गुवाहाटी।
पीटीआई, गुवाहाटी। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 27 Oct 2022 12:49 AM IST
सार

असम के गोलपाड़ा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित एक घर में स्थापित विवादास्पद 'मिया संग्रहालय' को जनता के लिए खोले जाने के दो दिन बाद मंगलवार को सील कर दिया गया था। संग्रहालय को सील किए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है।

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Assam Miya Parishad president and general secretary among 5 arrested under UAPA
असम के गोपालपाड़ा में स्थापित विवादास्पद 'मिया संग्रहालय' के अंदर प्रदर्शित सामान। - फोटो : PTI

विस्तार

असम के गोलपाड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बनाए गए मकान में 'मिया संग्रहालय' खोलने का विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच, असम मिया परिषद के अध्यक्ष और महासचिव समेत पांच लोगों को सख्त गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी संगठनों के साथ कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

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असम के गोलपाड़ा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित एक घर में स्थापित विवादास्पद 'मिया संग्रहालय' को जनता के लिए खोले जाने के दो दिन बाद मंगलवार को सील किए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने कहा कि मिया परिषद के अध्यक्ष एम मोहर अली को गोलपाड़ा जिले के दपकाभिता में संग्रहालय से उस समय पकड़ा गया, जब वह धरने पर बैठे थे, जबकि इसके महासचिव अब्दुल बातेन शेख को मंगलवार रात धुबरी जिले के आलमगंज स्थित उसके आवास से हिरासत में लिया गया था।

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उन्होंने बताया कि रविवार को संग्रहालय का उद्घाटन करने वाले अहोम रॉयल सोसाइटी के सदस्य तनु धादुमिया को डिब्रूगढ़ के कावामारी गांव में उनके आवास से हिरासत में लिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन तीनों को ‘अलकायदा इन इंडियन सबकांटिनेंट’ (एक्यूआईएस) और ‘अंसारुल बांग्ला टीम’ (एबीटी) संगठनों के साथ उनके कथित संबंध की जांच और पूछताछ के लिए यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत घोगरापार थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में नलबाड़ी ले जाया गया। नलबाड़ी जिले के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हाल ही में गिरफ्तार किए गए कुछ कट्टरपंथियों से पूछताछ के दौरान 'मिया संग्रहालय' की स्थापना और मोहर अली, बातेन शेख और धदुमिया की संलिप्तता का खुलासा हुआ था।
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पुलिस ने कहा कि दो अन्य व्यक्तियों-सादिक अली और जेकीबुल अली को पिछले सप्ताह बारपेटा के हाउली और नलबाड़ी के घोगरापार से कट्टरपंथी संगठनों के साथ उनके कथित संबंधों के चलते पकड़ा गया था। पुलिस ने कहा कि दोनों को नलबाड़ी पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किया था, लेकिन 'मिया संग्रहालय' की स्थापना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

बुधवार को सभी पांचों लोगों को अदालत में पेश किया गया जिनमें से अली, शेख और धादुमिया को दो दिन की, जबकि दो अन्य को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता ने गुवाहाटी में पीटीआई को बताया कि धादुमिया को पार्टी से निकाला जा चुका है क्योंकि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असफल रहा था।

सरकारी अधिकारियों की एक टीम ने मंगलवार को दपकाभिता में ‘मिया संग्रहालय’ को सील कर दिया था और नोटिस लगाया था कि यह उपायुक्त के आदेश पर किया गया है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय में कुछ कृषि और मत्स्य उपकरण, तौलियां और ‘लुंगी’ प्रदर्शित की गई थीं। हिरासत में लिए जाने से पहले मोहर अली अपने दो नाबालिग बेटों के साथ अपने घर के बाहर धरने पर बैठा था और संग्रहालय को तुरंत दोबारा खोलने की मांग कर रहा था।

अली ने कहा कि हम उन वस्तुओं को प्रदर्शित कर रहे हैं जिससे समुदाय अपनी पहचान जोड़ता है ताकि अन्य समुदाय के लोग महसूस कर सकें कि ‘‘मिया’’ उनसे अलग नहीं हैं। असम में ‘मिया’ शब्द बांग्ला भाषी प्रवासियों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी जड़ें बांग्लादेश से जुड़ती हैं।

रविवार को मिया संग्रहालय के उद्घाटन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने इस संग्रहालय को तत्काल बंद करने की मांग की थी और पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य अब्दुर रहीम जिब्रान ने पीएमएवाई के तहत आवंटित घर में संग्रहालय की स्थापना के खिलाफ लखीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा था कि ‘मिया’ समुदाय के कुछ सदस्यों की ऐसी गतिविधियां ‘असमियों की पहचान’ के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं।

सरमा ने एक कार्यक्रम के इतर कहा कि कैसे वे (‘मिया’ समुदाय) दावा कर सकते हैं कि हल उनकी पहचान है? इसे पूरे राज्य में सदियों से सभी किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। ‘लुंगी’ एकमात्र ऐसी वस्तु है जिस पर वे अपना दावा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने संग्रहालय स्थापित किया है उन्हें विशेषज्ञ समिति को जवाब देना होगा कि उनके दावे का आधार क्या है।

कांग्रेस के लोकसभा सांसद अब्दुल खालेक ने कहा कि पहले तो ‘मिया’ नाम का कोई समुदाय नहीं है बल्कि यह एक सम्मानजनक संबोधन है। खालेक ने कह कि लोगों को अपने घर में सांस्कृतिक संग्रहालय या पुस्तकालय खोलने का अधिकार है, लेकिन मैं नहीं मानता कि सामुदायिक संग्रहालय स्थापित करने की कोई  जरूरत है।

बारपेटा के सांसद खालेक ने कहा कि हालांकि, संग्रहालय स्थापित करने के लिए किसी को गिरफ्तार करना और उस व्यक्ति पर आतंकी कानूनों के तहत मामला दर्ज करना अन्याय है। खालेक ने कहा कि समुदाय को भी हल जैसी वस्तुओं पर दावेदारी करने को लेकर सचेत रहना चाहिए क्योंकि पूरे उपमहाद्वीप के सभी किसान इनका इस्तेमाल करते हैं।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि पार्टी ‘मिया संग्रहालय’ खोलने के खिलाफ है, लेकिन इसकी स्थापना के कारणों पर गौर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोग वर्षों से अपमानित महसूस कर रहे हैं और यह उनकी हताशा से उपजी प्रतिक्रिया है।


प्रख्यात अधिवक्ता नेकिबुर जमान ने कहा कि संग्रहालय की स्थापना असमिया समाज में विभाजन पैदा करने के लिए समुदाय के एक वर्ग द्वारा की गई एक साजिश है। जमन ने कहा कि हम हाल के वर्षों में ‘मिया’ संग्रहालय, स्कूल, कविता और यहां तक कि धुबरी और बारपेटा को मिलाकर स्वायत्त परिषद बनाने की मांग जैसी चीजों के बारे में सुन रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कुछ ताकतों के निहित स्वार्थ की वजह से है, जो असमी संस्कृति और पहचान को खतरे में डालना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि ‘मिया संग्रहालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव सबसे पहले कांग्रेस विधायक शरमन अली अहमद ने वर्ष 2020 में दिया था, जिसे मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया था।

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