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Border Dispute: असम-मेघायल के सीएम ने की मुलाकात, मुकरोह हिंसा की जांच सीबीआई से करवाने पर सहमति
Sat, 30 Sep 2023 03:48 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Sat, 30 Sep 2023 03:48 PM IST
सार
अंतरराज्यीय सीमा विवादों को दूर करने के लिए असम और मेघायल के मुख्यमंत्रियों ने बैठक की। साथ ही मुकरोह हिंसा की जांच सीबीआई से करवाने की बात कही है।
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असम-मेघायल के सीएम करेंगे मुलाकात (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
शनिवार को अंतरराज्यीय सीमा विवादों को दूर करने के लिए असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने बैठक की। इस दौरान बैठक में दोनों मुख्यमंत्रियों ने मुकरोह हिंसा की जांच सीबीआई को सौंपने की बात की है। इस घटना में तकरीबन 6 लोग मारे गए थे।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके मेघालय समकक्ष कॉनराड संगमा ने अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत के बाद एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग की। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, दोनों राज्यों ने मुकरोह हिंसा की जांच कर रहे अपने संबंधित न्यायिक आयोगों को बंद करने का फैसला किया है। इसके बजाय, दोनों राज्य सरकारें अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच करने का आग्रह करेंगी।
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उन्होंने कहा कि एजेंसी से अनुरोध किया जाएगा कि मामला गुवाहाटी या शिलांग में नहीं बल्कि किसी तटस्थ स्थान जैसे दिल्ली, कोलकाता या किसी अन्य स्थान पर दर्ज किया जाए। मेघालय के सीएम संगमा ने कहा कि संबंधित न्यायिक आयोगों को बंद करने का निर्णय लिया गया है क्योंकि कोई भी पक्ष ज्यादा प्रगति नहीं कर पाया है क्योंकि किसी भी राज्य के गवाह उस राज्य के आयोग के समक्ष गवाही देने के लिए दूसरे पक्ष में नहीं गए हैं।हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं। इसलिए, हमने इसे एक स्वतंत्र एजेंसी यानी सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।
पिछले साल 22 नवंबर को असम-मेघालय अंतरराज्यीय सीमा के एक विवादित खंड पर मुकरोह में गोलीबारी की घटना में पांच मेघालय निवासियों और असम के एक वन रक्षक सहित छह लोग मारे गए थे।
1972 में मेघालय से अलग होकर बना था असम राज्य
मेघालय को 1972 में असम से अलग कर एक अलग राज्य बनाया गया था। इसने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दी थी, जिसके कारण दोनों राज्यों के बीच 884.9 किमी लंबी सीमा के 12 क्षेत्रों में विवाद पैदा हो गया था। मई, 2021 में मुख्यमंत्री का पदभार संभालने पर सरमा ने घोषणा की थी कि उनकी प्राथमिकता असम के पड़ोसी राज्यों के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को हल करना है।
समस्याओं को हल करने के लिए समितियों का हुआ था गठन
चरणबद्ध तरीके से समस्या का हल करने के लिए अगस्त 2021 में तीन क्षेत्रीय समितियां स्थापित की गई। समितियों ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थी, जिन्हें दोनों मुख्यमंत्रियों ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया था। जिसके बाद कुल 12 क्षेत्रों में से छह में विवादों को हल करने के लिए 29 मार्च, 2022 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार, पहले चरण में 36.79 वर्ग किमी विवादित क्षेत्र को निपटान के लिए लिया गया था, जिसमें असम को 18.51 वर्ग किमी और मेघालय को 18.28 वर्ग किमी पर पूर्ण नियंत्रण मिला था।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके मेघालय समकक्ष कॉनराड संगमा ने अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत के बाद एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग की। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, दोनों राज्यों ने मुकरोह हिंसा की जांच कर रहे अपने संबंधित न्यायिक आयोगों को बंद करने का फैसला किया है। इसके बजाय, दोनों राज्य सरकारें अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच करने का आग्रह करेंगी।
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#WATCH | After the CM-level meeting to discuss border disputes between two states in six remaining areas, Meghalaya Chief Minister Conrad Sangma says, "...We are happy to inform the people of both Assam and Meghalaya that after a very long drawn exercise, we are now on the verge… pic.twitter.com/tf0K9Ivy1h
— ANI (@ANI) September 30, 2023
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उन्होंने कहा कि एजेंसी से अनुरोध किया जाएगा कि मामला गुवाहाटी या शिलांग में नहीं बल्कि किसी तटस्थ स्थान जैसे दिल्ली, कोलकाता या किसी अन्य स्थान पर दर्ज किया जाए। मेघालय के सीएम संगमा ने कहा कि संबंधित न्यायिक आयोगों को बंद करने का निर्णय लिया गया है क्योंकि कोई भी पक्ष ज्यादा प्रगति नहीं कर पाया है क्योंकि किसी भी राज्य के गवाह उस राज्य के आयोग के समक्ष गवाही देने के लिए दूसरे पक्ष में नहीं गए हैं।हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं। इसलिए, हमने इसे एक स्वतंत्र एजेंसी यानी सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।
#WATCH | After the CM-level meeting to discuss border disputes between two states in six remaining areas, Assam CM Himanta Biswa Sarma says, "Today the meeting was held to further resolve the Assam-Meghalaya border dispute. The discussion is very cordial and we have been able to… pic.twitter.com/RCChxmFDAe
— ANI (@ANI) September 30, 2023
पिछले साल 22 नवंबर को असम-मेघालय अंतरराज्यीय सीमा के एक विवादित खंड पर मुकरोह में गोलीबारी की घटना में पांच मेघालय निवासियों और असम के एक वन रक्षक सहित छह लोग मारे गए थे।
1972 में मेघालय से अलग होकर बना था असम राज्य
मेघालय को 1972 में असम से अलग कर एक अलग राज्य बनाया गया था। इसने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दी थी, जिसके कारण दोनों राज्यों के बीच 884.9 किमी लंबी सीमा के 12 क्षेत्रों में विवाद पैदा हो गया था। मई, 2021 में मुख्यमंत्री का पदभार संभालने पर सरमा ने घोषणा की थी कि उनकी प्राथमिकता असम के पड़ोसी राज्यों के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को हल करना है।
समस्याओं को हल करने के लिए समितियों का हुआ था गठन
चरणबद्ध तरीके से समस्या का हल करने के लिए अगस्त 2021 में तीन क्षेत्रीय समितियां स्थापित की गई। समितियों ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थी, जिन्हें दोनों मुख्यमंत्रियों ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया था। जिसके बाद कुल 12 क्षेत्रों में से छह में विवादों को हल करने के लिए 29 मार्च, 2022 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार, पहले चरण में 36.79 वर्ग किमी विवादित क्षेत्र को निपटान के लिए लिया गया था, जिसमें असम को 18.51 वर्ग किमी और मेघालय को 18.28 वर्ग किमी पर पूर्ण नियंत्रण मिला था।