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असम: चार दिन बाद खुले कामाख्या मंदिर के कपाट, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Wed, 26 Jun 2024 01:19 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा झा Updated Wed, 26 Jun 2024 01:19 PM IST
सार

असम का सुप्रसिद्ध कामाख्या मंदिर पिछले चार दिनो से बंद था। बुधवार को सुबह श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर के कपाट खोले गए। यह मंदिर अंबुबाची मेले के अवसर पर चार दिनों के लिए बंद किया गया था। 

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Assam: Kamakhya temple doors opened after four days, crowd of devotees gathered for darshan
कामाख्या मंदिर - फोटो : एएनआई

विस्तार


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सुप्रसिद्ध कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से कुछ किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि देवी कामाख्या मासिक धर्म से गुजरती हैं, इसलिए मंदिर के कपाट प्रतीकात्मक रूप से चार दिन के लिए बंद किए जाते हैं। मंदिर के खुलने से जुड़ी रस्में बुधवार रात को हुईं। हालांकि, कामाख्या देवालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंदिर के कपाट गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

26 जून को शुद्धिकरण के बाद मंदिर दर्शन के लिए खोला दिया गया। माना जाता है कि इन दिनों माता सती रजस्वला रहती हैं इसलिए इन 3 दिनों के लिए पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती।  वार्षिक अंबुबाची मेला 22 जून को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुआ।  कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के एक अधिकारी ने बताया कि मेले की शुरुआत से अब तक 25 लाख से अधिक लोग इसमें शामिल हो चुके हैं। मेले में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में तांत्रिक आते हैं। कामाख्या मंदिर को तांत्रिक शक्तिवाद का केंद्र माना जाता है।
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यहां पर साधु भी आध्यात्मिक गतिविधियों का अभ्यास करने आते हैं7 तांत्रिकों के लिए अंबुबाची का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि के दौरान दैनिक पूजा पाठ बंद होते हैं. साथ ही सभी कृषि कार्य भी वर्धित माने जाते हैं। विधवाएं, ब्राह्मण और ब्रह्मचारी इन दिनों पूरे हुए भोजन का सेवन नहीं करते हैं। तीन दिनों के बाद घर के सामान, बर्तन और कपड़े को शुद्ध किया जाता है। साथ ही घर को भी पवित्र किया जाता है।
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चार दिनों की अवधि के दौरान मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला राज्य के पर्यटन कैलेंडर का एक प्रमुख आयोजन है। प्रशासन ने कामाख्या रेलवे स्टेशन पर 5,000 लोगों के लिए और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पांडु बंदरगाह पर 12,000-15,000 लोगों के लिए शिविर की सुविधा बनाई थी। अधिकारियों ने बताया कि मेले की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस कर्मियों, स्वयंसेवकों, निजी सुरक्षा गार्डों और अन्य लोगों को भी लगाया गया है। अंबुबाची उत्सव के दौरान, यह भी माना जाता है कि धरती माता मासिक धर्म से गुजरती हैं।
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