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असम गैस विस्फोट से आर्द्रभूमि और वन्य जीवों के सामने उत्पन्न हुआ खतरा: सर्वेक्षण रिपोर्ट
Fri, 12 Jun 2020 09:20 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 12 Jun 2020 09:20 AM IST
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आग बुझाने में जुटे एनडीआरएफ के कर्मचारी
- फोटो : PTI
असम के तिनसुकिया जिले में गैस के कुएं में विस्फोट से लोहित नदी और आस-पास के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील मगुरी-मोटापुंग आर्द्रभूमि प्रदूषित हो गई है। वहीं, विस्फोट से निकले विषैले प्रदूषकों से मछलियों, कीटों के साथ-साथ इस क्षेत्र में गंगा की डॉल्फिन के मारे जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।
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इसमें स्थानीय लोगों के साक्षात्कारों के हवाले से कहा गया है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के पास इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई शमन योजना नहीं है। डब्ल्यूआईआई ने सुझाव दिया है कि जैव विविधता से भरपूर इस पूरे ओआईएल क्षेत्र में घटना के व्यापक प्रभाव को लेकर एक संपूर्ण मूल्यांकन किया जाए। गैस के कुएं में आग मंगलवार को लगी। बताया गया है कि 27 मई से ही गैस का रिसाव हो रहा था।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 11 मई को डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क के तहत सात स्थानों पर हाइड्रोकार्बन के ड्रिलिंग और परीक्षण के लिए ओआईएल को पर्यावरणीय मंजूरी दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि धुएं और तेल की कोटिंग ने वनस्पतियों और जीवों को प्रभावित किया है।
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मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दूषित पदार्थों और तेल को आसपास के क्षेत्रों में प्रवाहित किया जाना जारी है और इस बहाव को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें कहा गया है कि इन विषाक्त पदार्थों को मिट्टी और तलछट में लंबे समय तक बने रहने के लिए जाना जाता है, जो न केवल वर्तमान जीवन स्थितियों को प्रभावित करेगा, बल्कि लंबे समय तक जारी रहने के कारण, लंबी अवधि के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक कमर कुरैशी ने कहा है कि इस क्षेत्र के तराई के जंगल अद्वितीय हैं और उन्होंने पाया है कि अन्य कुएं भी लीक कर रहे हैं जिनका दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमने किसी और अन्वेषण परियोजनाओं को लागू करने से पहले आपदा न्यूनीकरण संभावनाओं का गहन मूल्यांकन करने की सिफारिश की है।
पर्यावरण मंत्रालय की अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव) सौमित्र दासगुप्ता ने कहा कि विस्फोट से आर्द्रभूमि प्रभावित है और इसलिए जलीय प्रजातियां भी प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यान दुर्घटना स्थल से थोड़ा दूर है। हम असम के वन विभाग से विस्तृत डब्ल्यूआईआई अध्ययन और प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में हमने उन्हें लिखा भी है।