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Assam Flood: बाढ़ में फंसे 571 लोगों को सेना ने बचाया, ऑपरेशन जल राहत कैसे बन रहा है जीवन की उम्मीद?
Tue, 21 Jul 2026 11:27 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:27 PM IST
सार
असम में लगातार हो रही बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन जल राहत’ के तहत अब तक 571 लोगों को सुरक्षित निकाला है। सेना राहत और बचाव अभियान लगातार चला रही है। आखिर किन जिलों में सबसे ज्यादा असर पड़ा है और सेना किस तरह लोगों की जान बचाने में जुटी है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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असम बाढ़
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
असम में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने हालात गंभीर कर दिए हैं। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से ऊपरी असम के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ के कारण लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बीच भारतीय सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज करते हुए ऑपरेशन जल राहत के तहत अब तक 571 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। सेना का यह अभियान 19 जुलाई से लगातार चौबीसों घंटे चल रहा है और प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद की जा रही है।
भारतीय सेना की स्पीयर कोर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असम सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। सेना का कहना है कि राहत अभियान का उद्देश्य बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, उन्हें जरूरी सहायता देना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है। सेना की टीमें मोटरबोट और विशेष उपकरणों की मदद से तेज बहाव वाले पानी में फंसे लोगों तक पहुंच रही हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों को बचाव अभियान में प्राथमिकता दी जा रही है।
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हालांकि कुछ इलाकों में जलस्तर कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन कई गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। ऐसे में सेना, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर लगातार राहत कार्य कर रहे हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का अभियान जारी है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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भारतीय सेना की स्पीयर कोर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असम सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। सेना का कहना है कि राहत अभियान का उद्देश्य बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, उन्हें जरूरी सहायता देना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है। सेना की टीमें मोटरबोट और विशेष उपकरणों की मदद से तेज बहाव वाले पानी में फंसे लोगों तक पहुंच रही हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों को बचाव अभियान में प्राथमिकता दी जा रही है।
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किन जिलों में सबसे ज्यादा राहत अभियान चल रहा है?
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में सेना की तीन विशेष राहत टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों में कुल 45 सैन्यकर्मी शामिल हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। ऐसे इलाकों में सेना नावों और अन्य संसाधनों की मदद से लोगों तक पहुंच रही है। राहत टीमें प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करा रही हैं।सेना लोगों की किस तरह मदद कर रही है?
बचाव अभियान के साथ-साथ सेना चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री भी उपलब्ध करा रही है। जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक सामान पहुंचाया जा रहा है। राहत टीमों को विशेष इंजीनियरिंग उपकरण और आपात चिकित्सा सामग्री से लैस किया गया है, ताकि कठिन परिस्थितियों में भी लोगों की मदद की जा सके। सेना का पूरा प्रयास है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचे।
सेना ने अपनी भूमिका को लेकर क्या कहा?
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिकों की सहायता करना भी सेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कुछ इलाकों में धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन राहत और बचाव अभियान अभी जारी रहेगा। सेना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित समुदायों को हर संभव सहायता मिले और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति मदद से वंचित न रहे।हालांकि कुछ इलाकों में जलस्तर कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन कई गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। ऐसे में सेना, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर लगातार राहत कार्य कर रहे हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का अभियान जारी है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।