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असम: अदालत ने आतंकवादी समूह के 8 सदस्यों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा, एसटीएफ ने किया था भंडाफोड़
Sat, 21 Dec 2024 05:08 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 21 Dec 2024 05:08 AM IST
सार
गुवाहाटी अदालत ने अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के आठ सदस्यों को 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और दस्तावेजों से पता चला कि इनका संपर्क सीमा पार स्थित बांग्लादेश और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से था।
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गुवाहाटी अदालत ने एबीटी के आठों आतंकियों को 10 दिन के पुलिस हिरासत में भेजा
- फोटो : ANI
विस्तार
असम पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने गुरुवार को अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया। शुक्रवार को गुवाहाटी की अदालत ने इन्हें 10 दिनों के पुलिस हिरासत में भेज दिया।
बता दें कि गिरफ्तार आतंकियों के पास से कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुए थे, जिसमें संदिग्ध ऐप्स वाले मोबाइल फोन, प्रचार सामग्री, बांग्लादेशी-निर्धारित पहचान दस्तावेज, और महत्वपूर्ण साक्ष्य वाले पेन ड्राइव शामिल हैं।
एसटीएफ प्रमुख ने दी जानकारी
एसटीएफ प्रमुख पार्थ सारथी महंत ने बताया कि आरोपियों के पास से चार पेन ड्राइव और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। इनमें से एक आरोपी बांग्लादेशी नागरिक है, जिसका नाम मोहम्मद साद रदी उर्फ शब शेख है। वह बांग्लादेश के राजशाही का निवासी है और नवंबर 2024 में भारत में घुसकर आतंकवाद फैलाने के लिए काम कर रहा था।
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इसके साथ ही महंत ने कहा कि साद रदी ने एबीटी के स्लीपर-सेल कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए असम, पश्चिम बंगाल और केरल का दौरा किया था। एसटीएफ ने पुलिस के सहयोग से उसे केरल से गिरफ्तार किया। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और असम से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एसटीएफ ने दर्ज की प्राथमिकी
एसटीएफ ने इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की और जिहादी गतिविधियों के खिलाफ ऑपरेशन - प्रघात शुरू किया था। गिरफ्तारी के दौरान, आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और दस्तावेजों से पता चला कि इनका संपर्क सीमा पार स्थित बांग्लादेश और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से था।
एसटीएफ प्रमुख ने किया भंडाफोड़
इसके साथ ही एसटीएफ प्रमुख ने कहा कि यह गिरोह असम और पश्चिम बंगाल में स्लीपर सेल बनाने के लिए काम कर रहा था। उनका उद्देश्य भारत में हिंसा और अराजकता फैलाना था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने साद रदी की मदद से ऐसे लोगों की पहचान की थी जो कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और उन्हें भर्ती कर रहे थे।
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बता दें कि गिरफ्तार आतंकियों के पास से कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुए थे, जिसमें संदिग्ध ऐप्स वाले मोबाइल फोन, प्रचार सामग्री, बांग्लादेशी-निर्धारित पहचान दस्तावेज, और महत्वपूर्ण साक्ष्य वाले पेन ड्राइव शामिल हैं।
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एसटीएफ प्रमुख ने दी जानकारी
एसटीएफ प्रमुख पार्थ सारथी महंत ने बताया कि आरोपियों के पास से चार पेन ड्राइव और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। इनमें से एक आरोपी बांग्लादेशी नागरिक है, जिसका नाम मोहम्मद साद रदी उर्फ शब शेख है। वह बांग्लादेश के राजशाही का निवासी है और नवंबर 2024 में भारत में घुसकर आतंकवाद फैलाने के लिए काम कर रहा था।
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#WATCH | Guwahati, Assam: IG STF, Partha Sarathi Mahanta says, "All 8 arrested accused were produced before the court yesterday and they have been remanded in 10 days police custody. We seized 4 pendrives and other incriminating documents which we are analysing. More importantly,… https://t.co/yl1LsKSFo9 pic.twitter.com/9B9ZxKruSc
— ANI (@ANI) December 20, 2024
इसके साथ ही महंत ने कहा कि साद रदी ने एबीटी के स्लीपर-सेल कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए असम, पश्चिम बंगाल और केरल का दौरा किया था। एसटीएफ ने पुलिस के सहयोग से उसे केरल से गिरफ्तार किया। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और असम से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
एसटीएफ ने दर्ज की प्राथमिकी
एसटीएफ ने इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की और जिहादी गतिविधियों के खिलाफ ऑपरेशन - प्रघात शुरू किया था। गिरफ्तारी के दौरान, आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और दस्तावेजों से पता चला कि इनका संपर्क सीमा पार स्थित बांग्लादेश और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से था।
एसटीएफ प्रमुख ने किया भंडाफोड़
इसके साथ ही एसटीएफ प्रमुख ने कहा कि यह गिरोह असम और पश्चिम बंगाल में स्लीपर सेल बनाने के लिए काम कर रहा था। उनका उद्देश्य भारत में हिंसा और अराजकता फैलाना था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने साद रदी की मदद से ऐसे लोगों की पहचान की थी जो कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और उन्हें भर्ती कर रहे थे।