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असमः गैस के कुएं में लगी भीषण आग पर अब तक काबू नहीं, सरकार ने बुलाई सेना
Tue, 16 Jun 2020 01:25 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 16 Jun 2020 01:25 AM IST
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असम के गैस कुआं में आग
- फोटो : पीटीआई
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असम के तिनसुकिया जिले स्थित ऑयल इंडिया की बागजान गैस कुएं में लगी भीषण आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है। गैस की अधिक मात्रा में होने के कारण यह अब भी तेजी से फैलते जा रही है। इस भीषण आग को बुझाने के लिए सोमवार को सेना की मदद लेनी पड़ी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि सेना की मदद से आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा।
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ऑयल इंडिया लिमिटेड के बयान के अनुसार कुएं में लगी आग पर काबू पाने के लिए अभियान की आपात स्थिति के मद्देनजर तिनसुकिया के उपायुक्त भास्कर पेगु ने कुएं से सटे एक जल क्षेत्र पर 150 मीटर लंबा पुल बनाने के लिए सेना की मदद लेने का अनुरोध किया है। प्रशासन के अनुरोध को स्वीकार करते हुए सेना मिसामरी और तेजू से बागजान आपदा क्षेत्र में सामान और कर्मियों को ला रही है।
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बता दें कि असम के तिनसुकिया जिले में ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा संचालित बागजान क्षेत्र में एक कुएं से 27 मई 2020 को प्राकृतिक गैस का अनियंत्रित रूप से रिसाव होने लगा। इसके कारण विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना तगड़ा था कि कुएं में आठ जून को आग लग गई। इसमें अग्निशमन दल के दो कर्मियों की मौत हो गयी और एक घायल हो गया।
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वहीं इससे पहले घटना का जायजा लेने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शनिवार को असम पहुंचे थे। रविवार को उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऑयल इंडिया की बागजान गैस कुआं अग्निकांड के प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भी भरोसा दिलाया कि सरकार सभी प्रभावितों को मुआवजा देगी।' उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। इससे पहले गुवाहाटी पहुंचने के बाद प्रधान ने सोनोवाल की उपस्थिति में वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, पर्यावरण व वन राज्यमंत्री एनके डोले व भाजपा सांसद तपन कुमार गोगोई के साथ समीक्षा बैठक भी की।
सोमवार को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आईआईटी-गुवाहाटी और सीएसआईआर-नॉर्थ ईस्ट इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनईआईएसटी) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि वे इस आपातकालीन स्थिति से निकलने के उपायों पर अध्ययन करें।