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जगन्नाथ मंदिर: ASI ने शुरू किया रत्न भंडार का दूसरा तकनीकी सर्वे, श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे मुख्य द्वार
Sat, 21 Sep 2024 03:59 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 21 Sep 2024 03:59 PM IST
सार
Jagannath Temple: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को दोपहर पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का दूसरा तकनीकी सर्वेक्षण शुरू किया। यह सर्वेक्षण 21 से 23 सितंबर तक चलेगा। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
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जगन्नाथ मंदिर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को दोपहर पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का दूसरा तकनीकी सर्वेक्षण शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, यह सर्वेक्षण 21 से 23 सितंबर तक चलेगा।
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जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस तीन दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान श्रद्धालुओं को दोपहर एक बजे से छह बजे तक देवताओं के दर्शन करने से रोक दिया है। सर्वेक्षण के दौरान मंदिर के मुख्य द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने इसके लिए श्रद्धालुओं से सहयोग मांगा है।
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रत्न भंडार इन्वेंट्री समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए मंदिर में प्रवेश किया। उन्होने कहा, एएसआई इस सर्वेक्षण के दौरान यह पता लगाएगा कि क्या रत्ना भंडार के अंदर कोई चैंबर या सुरंग है। इसके लिए वे उन्नत रडार लाए हैं।
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पहले चरण का सर्वेक्षण 18 सितंबर को शुरू किया गया था, जब एएसआई की 17 सदस्यीय टीम ने अपने अतिरिक्त निदेशक जनरल जान्हवी शर्मा के नेतृत्व में रत्न भंडार का प्रारंभिक निरीक्षण और लेजर स्कैनिंग की। इस दौरान अरविंद पाधी और जस्टिस रथ भी मौजूद थे। इस टीम में विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) हैदराबाद के विशेषज्ञ भी शामिल थे।
एसजीटीए ने 18 सितंबर को एएसआई को पत्र लिखा था और 24 सितंबर तक तकनीकी सर्वेक्षण पूरा करने का अनुरोध किया था, ताकि दुर्गा पूजा और महीने के अन्य विशेष अनुष्ठानों के लिए तैयारी की जा सके। दुर्गा पूजा के अनुष्ठान 24 सितंबर से मंदिर में शुरू होंगे। एसजीटीए ने एएसआई से सर्वेक्षण रिपोर्ट तय समय सीमा के भीतर पेश करने का भी अनुरोध किया है।
मंदिर प्रशासन ने रत्न भंडार के बाहरी और भीतरी चैंबरों से सभी मूल्यवान सामान और आभूषण हटा दिए हैं और उन्हें मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी कमरे में सुरक्षित रखा गया है। एक अधिकारी ने बताया कि सभी गतिविधियां राज्य सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार की जा रही हैं।