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Maharashtra: 'अजंता की गुफाओं के चित्रों के संरक्षण के लिए पर्यटकों की संख्या सीमित करें' ASI अधिकारी की सलाह
Thu, 25 Aug 2022 01:42 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 25 Aug 2022 01:42 PM IST
सार
एएसआई अधिकारी ने कहा कि गुफा के भीतर केवल 40 पर्यटकों को 10 मिनट के लिये भेज सकते हैं और अंधेरे के कारण इतने कम समय में आगंतुक चित्रों को ठीक प्रकार से देख भी नहीं पाते।
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अजंता की गुफा
- फोटो : Social Media
विस्तार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने महाराष्ट्र की विश्व प्रसिद्ध अजंता गुफाओं में पर्यटकों की संख्या सीमित करने की जरूरत को रेखांकित किया है ताकि वहां के चित्रों को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सके। इस लोकप्रिय यूनेस्को विश्व विरासत स्थल में चट्टानों को काटकर 30 बौद्ध कंदराएं बनाई गई हैं और यह औरंगाबाद जिला मुख्यालय से लगभग सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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पर्यटकों की संख्या सीमित करने के पीछे यह वजह
एएसआई के औरंगाबाद परिक्षेत्र के अधीक्षक डॉ. मिलन कुमार चौले ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से गुफाओं में आर्द्रता का स्तर बढ़ता है जिसका वहां चित्र पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते व अन्य कारणों से समय के साथ कई चित्र खराब हो गए हैं। चौले ने कहा कि इसलिए लंबे समय तक इन चित्रों को सहेजने के वास्ते पर्यटकों की संख्या घटाने और कम संख्या में लोगों को गुफाओं के भीतर जाने की अनुमति देने की जरूरत है न्होंने कहा कि वे एक बार में गुफा के भीतर केवल 40 पर्यटकों को 10 मिनट के लिये भेज सकते हैं और अंधेरे के कारण इतने कम समय में आगंतुक चित्रों को ठीक प्रकार से देख भी नहीं पाते। गुफाओं के बाहर राज्य सरकार द्वारा एक व्याख्या (इंटरप्रेटेशन) केंद्र स्थापित किया गया है।
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इस गुफा में क्या है खास
इस लोकप्रिय यूनेस्को विश्व विरासत स्थल में चट्टानों को काटकर 30 बौद्ध कंदराएं बनाई गई हैं और यह औरंगाबाद जिला मुख्यालय से लगभग सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन गुफाओं में गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित चित्र बनाए गए हैं जिसे देखने हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं।
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