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Swadeshi: डॉ. अश्विनी महाजन बोले- ग्लोबलाइजेशन का झूठा नैरेटिव ध्वस्त, स्वदेशी ही बनेगा मजबूती का आधार

Mon, 22 Sep 2025 06:34 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 22 Sep 2025 06:34 PM IST
सार

पीएम मोदी ने एक बार फिर पूरे देश से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की है। स्वदेशी का इस दौर में महत्त्व और इसकी आवश्यकता के विविध पक्षों को समझने के लिए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन ने इसके महत्व पर चर्चा की है। 

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Ashwini Mahajan says false narrative of globalization destroyed, only Swadeshi will become basis of strength
स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर पूरे देश से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि स्वदेशी अपनाने से ही देश आर्थिक तौर पर सशक्त बनेगा। इस अवसर पर हमारे संवाददाता ने स्वदेशी का इस दौर में महत्त्व और इसकी आवश्यकता के विविध पक्षों को समझने के लिए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन से बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश---

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प्रश्न- डॉ. अश्विनी महाजन जी, आप लोग स्वदेशी जागरण मंच के माध्यम से हमेशा स्वदेशी अपनाने की अपील करते रहे हैं। आज जब प्रधानमंत्री ने पूरे देश से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की है, आप इसे किस तरह से देख रहे हैं?    
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उत्तर- ग्लोबलाइजेशन एक झूठा नैरेटिव था जिसे अमेरिकी-यूरोपीय देशों ने अपने लाभ के लिए गढ़ा था। वे अपनी वस्तुओं को बेचने के लिए हमारे बाजारों में बेरोकटोक प्रवेश चाहते थे। इसी साजिश के तहत ग्लोबलाइजेशन का सपना दिखाकर लोगों को इससे जोड़ने की कोशिश की गई। तीसरी दुनिया के देशों को यह बताया गया कि ग्लोबलाइजेशन से पूरी दुनिया में खुला व्यापार बढ़ेगा, इससे पूरी दुनिया में व्यापार प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लोगों को सस्ती कीमत पर जरूरी वस्तुएं मिलेंगी। इससे एक देश में पैदा होने वाली सस्ती वस्तु तक हर देश के उपभोक्ता की पहुंच बन सकेगी। सपना यह भी दिखाया गया कि सस्ती वस्तुएं मिलने से गरीब उपभोक्ताओं को भी सस्ती कीमत पर आवश्यक वस्तुएं मिलेंगी। इससे गरीबी कम करने में मदद मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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प्रश्न- ग्लोबलाइजेशन का नुकसान हमें किस तरह झेलना पड़ा?
उत्तर- व्यवहार में यही देखा गया कि ग्लोबलाइजेशन के नाम पर सस्ती और घटिया क्वालिटी की चीजों को हमारे बाजारों में डंप कर दिया गया। अमेरिकी-यूरोपीय देशों ने अपने किसानों-कामगरों का संरक्षण किया, उन्हें भारी सब्सिडी दी, जबकि हमें अपने किसानों को सब्सिडी देने पर रोक लगाई। इससे उनके उत्पाद सस्ते हुए, हमारे उत्पाद महंगे हो गए और वे बाजारों में बिकने बंद हो गए। लेकिन जब एक बार हमारे उत्पादकों के पैर उखड़ गए तो चीन-अमेरिका ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाकर भारी मुनाफा कमाया। चीन के उत्पादों के कारण हमारे कामगरों के काम खत्म हो गये। इस ग्लोबलाइजेशन का नुकसान हमारे किसानों, श्रमिकों और आम लोगों को हुआ। 

लेकिन आज ग्लोबलाइजेशन का नैरेटिव बुरी तरह ध्वस्त हो गया है। चीन ने जिस तरह रेयर अर्थ मेटल को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है, उससे ग्लोबलाइजेशन का सिद्धांत पूरी तरह ध्वस्त हो गया है कि आवश्यक वस्तुएं हर देश के हर उपभोक्ता के लिए समान रूप से उलब्ध रहेंगी। अमेरिका खुद अपने यहां रोजगार बढ़ाने के लिए स्वदेशी अपनाने की अपील कर रहा है। वह टैरिफ लगाकर और बाहरी श्रमिकों पर बड़े टैक्स लगाकर अपने नागरिकों का संरक्षण कर रहा है। यही काम यूरोपीय देश भी कर रहे हैं। इसलिए अब ग्लोबलाइजेशन का एजेंडा पूरी तरह खत्म हो गया है।         

प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि स्वदेशी अपनाने से ही हमारी आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी? आज की चुनौतियों को देखते हुए स्वदेशी का महत्त्व कितना अधिक बढ़ गया है?   
उत्तर- निश्चित रूप से अमेरिका ने जिस तरह टैरिफ लगाकर और हमारे कामगरों पर टैक्स लगाकर हमारे लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी की हैं, इसका जवाब स्वदेशी के रास्ते से ही निकल सकता है। स्वदेशी अपनाने से हमारे लोगों के हाथों में काम आएगा, उन्हें रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक तरक्की होगी। हमारे देश का पूरा बाजार आज भी सबसे ज्यादा आंतरिक बाजार पर निर्भर करता है। स्वदेशी अपनाने से इस बाजार में और तेज बढ़ोतरी होगी और देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ जाएगी। 

प्रश्न- क्या हम हर क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सकते हैं? कई ऐसे क्षेत्र हैं जिसके मामले में हम दूसरे देशों के सहयोग पर निर्भर हैं। ऐसे में क्या स्वदेशी का नारा हमारे लिए नुकसानदायक नहीं होगा?
उत्तर- आप उपभोग की हर वस्तुओं को मोटे तौर पर तीन भागों में बांट लीजिए। पहले सेक्टर में ऐसी वस्तुओं को रखिए जिनके मामले में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। कृषि और खाद्य उत्पादन के क्षेत्र में लगभग यही स्थिति है। ऐसे में इन वस्तुओं को विदेशों से मंगवाने का कोई अर्थ नहीं है। दूसरा सेक्टर आप कुछ ऐसी वस्तुओं का कह सकते हैं जहां तकनीकी निवेश बहुत अधिक है। इसमें रक्षा क्षेत्र, सौर ऊर्जा क्षेत्र या अंतरिक्ष का क्षेत्र शामिल है। 

हमारा मानना है कि कुछ निवेश और तकनीकी समझौतों के द्वारा कुछ समय में हम इन सेक्टर की वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर सकते हैं। सेटेलाइट लांचिंग के क्षेत्र में अब हम एक बड़ा बाजार बन चुके हैं। इसी तरह आने वाले सेक्टर में सही नीति पर काम करने से शेष सेक्टर में भी हम मजबूत खिलाड़ी बन सकते हैं। हमारे पास ऐसी युवा प्रतिभा है जिसके भरोसे हम अपना बाजार विकसित कर सकते हैं। 

बीच के मिश्रित सेक्टर में हम अपनी गुणवत्ता के आधार पर विदेशी वस्तुओं से टक्कर लेंगे। केंद्र सरकार एमएसएमई सेक्टर को पीएलआई स्कीम के जरिए पूंजी और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराकर ऐसी वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की ही कोशिश कर रही है।          


प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के संदर्भ में स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए क्या नई योजनाएं लाने पर विचार कर रहा है? 
उत्तर- स्वदेशी तो हमारी आत्मा है। हम 12 जून से ही 'स्वदेशी सूरक्षा स्वावलंबन अभियान' चला रहे हैं। इसके अंतर्गत लोगों को स्वदेशी अपनाने और स्वदेशी उत्पादन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पीएम की अपील के संदर्भ में अब हम बाजारों से लेकर गांवों तक, पढ़े-लिखे तबकों से लेकर आम ग्रामीण लोगों तक के बीच विचार गोष्ठी आयोजित कर लोगों को स्वदेशी अपनाने की अपील करेंगे।           

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