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मंत्रियों के विभाग तय करने के लिए राहुल गांधी के द्वार पहुंचे गहलोत और पायलट

Thu, 27 Dec 2018 02:25 AM IST
गौरव द्विवेदी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 27 Dec 2018 02:25 AM IST
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Ashok Gehlot and Sachin Pilot met Rahul Gandhi to decide departments of ministers
अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सचिन पायलट (फाइल फोटो)

राजस्थान में मुख्यमंत्री का चयन और मंत्रिमंडल गठन को लेकर खत्म हुई रस्साकशी के बाद अब मंत्रियों को कौन सा विभाग मिले, इसे लेकर दोनों खेमों में खींचतान शुरु हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने-अपने समर्थक मंत्रियों को अहम विभाग दिलाने के लिए उनकी सूची तैयार कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास पहुंचे हैं। बुधवार शाम को गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर पार्टी के इलेक्शन वॉर रुम में हुई बैठक में कांग्रेस पार्टी के कई दूसरे बड़े नेता भी मौजूद थे। राहुल गांधी ने काफी देर तक गहलौत और पायलट के साथ मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चा की है।

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कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि राजस्थान में मंत्रिमंडल के गठन के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर माथापच्ची चल रही है। गहलaत और पायलट अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थक मंत्रियों को गृह, वित्त, कृषि, बिजली, आबकारी एवं कराधान और सिंचाई जैसे अहम विभाग दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि गृह विभाग उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के पास रहेगा। गहलोत चाहते हैं कि इस विभाग में उनका एक राज्य मंत्री भी हो। मंत्रियों के बंटवारे को लेकर राजस्थान में गहलोत और पायलट के बीच कई बैठकें हुई हैं, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ सकी।

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2019 के लोकसभा चुनाव के मुताबिक किया गया मंत्रिमंडल विस्तार

चूंकि मंत्रिमंडल विस्तार 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है, इसलिए अब विभाग भी उसी हिसाब से अलॉट किए जाएंगे। यही वजह रही कि इन दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है। राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं। पार्टी का प्रयास है कि कृषि, वित्त, बिजली और शिक्षा-स्वास्थ्य को लेकर दोनों खेमों में कोई गतिरोध पैदा न हो। 

इन विभागों के मंत्रियों को जल्द से जल्द अपनी प्रतिभा दिखानी होगी, क्योंकि लोकसभा चुनाव अगर अप्रैल मई में होते हैं तो दो माह पहले आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे सरकार की नई विकास योजनाओं पर थोड़ा विराम लग सकता है। गहलोत सरकार का प्रयास रहेगा कि लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले कम से कम जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि चुनाव पूर्व किया गया एक-एक वादा पूरा किया जाएगा।

राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मामले पर भी विचार किया गया है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष हैं। अब यह जिम्मेदारी किसी दूसरे नेता को दी जाएगी। लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी इस पद पर किसी फुलटाइम नेता को लाना चाहती है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में सभी मंत्रियों को विभाग सौंप दिए जाएंगे।

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