नारी शक्ति वंदन: 'बिल में ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं की बात नहीं, यह बांटने वाला विधेयक', ओवैसी का सरकार पर आरोप
ओवैसी ने यह भी कहा कि अब तक के चुनावी इतिहास में 690 महिला सांसद चुनी गईं। लेकिन अगर आंकड़ें देखें तो इनमें महज 25 महिलाएं मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखती थी। यह मुस्लिम महिलाओं के साथ दोहरा बर्ताव है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में नारी शक्ति वंदन नाम से महिला आरक्षण बिल पेश कर दिया। 2024 चुनाव से पहले मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक माने जा रहे इस बिल को लेकर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। कांग्रेस ने जहां महिलाओं के लिए लाए गए इस बिल का श्रेय नलेने की कोशिश की। वहीं, बुधवार को लोकसभा में इस पर बहस के दौरान एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन औवैसी ने भी इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बिल में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में मैं इस बिल के समर्थन में नहीं हूं।
उन्होंने आगे कहा कि ये बिल देश को बांटने वाला है। मोदी सरकार केवल सवर्ण महिलाओं को ही आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम महिलाओं की आबादी सात फीसद है बावजूद इसके लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 0.7 प्रतिशत ही है। ओवैसी ने यह भी कहा कि अब तक के चुनावी इतिहास में 690 महिला सांसद चुनी गईं। लेकिन अगर आंकड़ें देखें तो इनमें महज 25 महिलाएं मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखती थी। यह मुस्लिम महिलाओं के साथ दोहरा बर्ताव है।
बड़े लोगों को सदन में लाने के लिए लाया गया बिल
ओवैसी ने लोकसभा में बोलते हुए यह भी कहा कि यह बिल बड़े लोगों को एंट्री देने के लिए लाया गया है। यह मुस्लिमों को राजनैतिक तौर पर हाशिए पर लाने की कोशिश है। इस दौरान औवैसी ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जब अपना जिक्र करते हैं तो कहते हैं कि मैं तो ओबीसी से आता हूं, लेकिन सवाल यह है कि आपने उनके लिए किया क्या है। महिला आरक्षण के लिए लाए गए बिल के नाम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आप वंदन की बात करते हैं, लेकिन यहां वंदन तो बिलकिस बानों के साथ दरिंदगी करने वाले का किया जाता है।
बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने अब तक इस बिल का विरोध किया है। उनके अलावा, कई अन्य दलों के नेताओं ने बिल में ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण को शामिल किए जाने की वकालत करते हुए बिल का समर्थन किया है।
इंडिया के नेताओं ने भी जोर-शोर से उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण की बात की तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि,महिला आरक्षण लैंगिक न्याय और सामाजिक न्याय का संतुलन होना चाहिए। उन्होंने पीडीए फॉर्मूले का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी (PDA) की महिलाओं के आरक्षण का निश्चित प्रतिशत भी स्पष्ट होना चाहिए। आरजेडी की ओर से महिला आरक्षण पर राबड़ी देवी ने मोर्चा संभाला। राबड़ी ने आरक्षण के भीतर आरक्षण को अनिवार्य बताते हुए कहा कि अन्य वर्गों की तीसरी और चौथी पीढ़ी की बजाय वंचित वर्गों की महिलाओं की अभी पहली पीढ़ी ही शिक्षित हो रही है। उन्होंने महिला आरक्षण में वंचित, उपेक्षित, खेतिहर और मेहनतकश वर्गों की महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग की और ये याद भी दिलाया कि महिलाओं की भी जाति है। जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने महिला आरक्षण बिल पेश होने से पहले इसके समर्थन का ऐलान तो किया था लेकिन ये भी जोड़ा था कि महिला आरक्षण में दलित और कमजोर वर्ग की महिलाओं को भी कोटा मिले।