यदि बंद होते हैं बूचड़खाने तो यूपी को होगा सलाना 11 हजार करोड़ का नुकसान
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जानकारों के मुताबिक, यूपी में बूचड़खानों को बंद किया जाता है तो 11 हजार 350 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का नुकसान होगा। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह सिर्फ अवैध बूचड़खानों पर ही कार्रवाई होगी।
इकॉनोमिक्स टाइम्स से बातचीत में राज्य में मौजूद दर्जन भर से से ज्यादा पंजीकृत बूचड़खानों के मालिकों ने बताया कि सरकार की इस निर्णय से राज्य में मीट एक्सपोर्ट का बिजनेस ठप पड़ जाएगा। साथ ही, मीट कारोबार से जुड़े तमाम लोगों की जिंदगी बूरी तरह प्रभावित होगी और करोड़ो रुपए के निवेश खराब होगा।
चुनावी घोषणा पत्र में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की बात कही थी
एक वैध बूचड़खाने अल फहीम मीटेक्स के मालिक मोहम्मद इमरान याकूब ने बताया कि 'बीजेपी ने यूपी चुनाव को पहले विकास अधारित बनाया लेकिन अंत में सभी बूचड़खानों को बंद करने की बात कह ध्रुवीकरण पर उतर आई। हमें लगा था कि यह सिर्फ एक चुनावी जूमला है।' लेकिन सरकार सभी बूचड़खानों को बंद कैसे कर सकती है? हम मीट का कारोबार करते हैं न कि बीफ का।
चुनावी घोषणा पत्र में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की बात कही थी। घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि जिस दिन बीजेपी यूपी की सत्ता में आएगी उसी रात से बूचड़खानों को बंद करवा दिया जाएगा।' भाजपा का दावा है कि राज्य में पशुओं की संख्यां में भारी गिरावट आई है। केंद्र के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की तरफ से यूपी के 40 वैध बूचड़खानों को लाइसेंस दिया गया है।
एक और बूचड़खाने के मालिक ने पहचान न बताने की शर्त पर इकॉनोमिक्स टाइम्स को बताया कि 'सरकार के पास इन दावों का कोई सबूत नहीं है कि पशुओं की संख्यां में गिरावट आई है।' 2007 की पशु गणना के मुकाबले 2012 में भैंसों की संख्यां में 28 प्रतिशत और गायों की संख्या में 10 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। बीफ एक्सपोर्ट देश में सबसे ज्यादा यूपी से ही होता है। ऐसे में सरकार अगर अपने वादों पर आगे बढ़ती है तो कारोबार का क्या होगा।'