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BJP: प्रियंका को सिंहासन सौंपने का ड्रामा कर रहे राहुल गांधी! भाजपा ने लगाया परिवारवाद का आरोप

Tue, 18 Jun 2024 01:53 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 18 Jun 2024 01:53 PM IST
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सार
राधिका खेड़ा ने राहुल गांधी के वायनाड सीट छोड़ने और प्रियंका के इस सीट से लड़ने की घोषणा पर टिप्पणी करते हुए अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस ने आज तक केवल परिवारवाद की राजनीति को प्रश्रय दिया है।
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As Rahul Gandhi leaves Wayanad for Priyanka Gandhi BJP attacks Congress news and updates
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कांग्रेस अब तक प्रियंका गांधी को सीधे चुनावी राजनीति में उतारने से बचती रही थी। परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए ही पार्टी ने अब तक यह तरीका अपनाया था। लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने वायनाड से राहुल गांधी के इस्तीफा देने और इसी सीट पर उपचुनाव में प्रियंका गांधी को उतारने की घोषणा की, भाजपा हमलावर हो गई। पार्टी ने इसे परिवार का 'उत्कृष्ट' उदाहरण बताया है। भाजपा नेता राधिका खेड़ा ने राहुल गांधी के द्वारा वायनाड की लोकसभा सीट प्रियंका गांधी के लिए छोड़ने को 'सिंहासन सौंपने' का ड्रामा करार दिया है। 


राधिका खेड़ा ने इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस ने आज तक केवल परिवारवाद की राजनीति को प्रश्रय दिया है। जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा-राजीव और सोनिया गांधी तक यह परंपरा जारी रही है। राहुल गांधी के द्वारा वायनाड की लोकसभा सीट प्रियंका गांधी के लिए छोड़ना बिल्कुल उसी तरह है, जैसे कि प्राचीन काल में कोई राजा अपना सिंहासन अपने उत्तराधिकारी को सौंपता था। खेड़ा ने कहा कि देश में अब लोकतंत्र आ गया है, लेकिन गांधी परिवार अब भी एक राजपरिवार की तरह व्यवहार कर रहा है और अपना उत्तराधिकार अपने ही परिवार के किसी दूसरे सदस्य को सौंप रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यह कतई स्वीकार्य नहीं है। 


खेड़ा ने कहा कि इसके पहले जब सोनिया गांधी ने रायबरेली की सीट छोड़ी थी, तब भी उन्होंने इसी तरह के संकेत दिए थे जैसे वे अपना सिंहासन अपने बेटे के लिए खाली कर रही हैं। अब राहुल गांधी ने भी उसी परंपरा को निभाया है और अपनी दूसरी सीट अपनी बहन के लिए छोड़ दिया है। भाजपा नेता ने कहा कि यह उन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अपमान है जो लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी को कांग्रेस में एक भी कार्यकर्ता ऐसा नहीं मिला जो वायनाड की सीट से चुनाव लड़ता। यदि राहुल गांधी किसी सामान्य कार्यकर्ता को चुनाव लड़वाते, तो ज्यादा बेहतर होता। 

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई राधिका खेड़ा ने कहा कि सोनिया गांधी राज्यसभा से सदस्य हैं। यदि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों लोकसभा में पहुंचते हैं, तो एक ही परिवार के सदस्य मां, बेटा-बेटी सभी संसद में होंगे। क्या कांग्रेस का कोई दूसरा कार्यकर्ता या नेता नहीं है, जो संसद जा सके। यह देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ-साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भी अपमान है। इससे यह भी पता चलता है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को अपनी ही कार्यकर्ताओं पर कोई भरोसा नहीं है।   



ये परिवारवाद नहीं- कांग्रेस 
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष नेता विश्वविजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि प्रियंका गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने को परिवारवाद नहीं कहा जा सकता। किसी भी पार्टी में कोई भी कार्यकर्ता 15-20 साल तक काम कर लेता है, तो वह लोकसभा-विधानसभा चुनाव का टिकट पाने वालों की श्रेणी में आ जाता है। प्रियंका गांधी ने 1996 के चुनाव में ही पार्टी के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया था। वे लगभग 25 साल से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रही हैं। उन्होंने लंबे समय तक जनता, महिलाओं के लिए संघर्ष किया है। कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनवाने में उनकी भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण रही है। ऐसे में अब पहली बार वे लोकसभा का चुनाव लड़ने जा रही हैं, तो इसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता। 

क्या यह परिवारवाद नहीं?
विश्वविजय सिंह ने कहा कि भाजपा में भी अनेक ऐसे नेता हैं, जिनके कई सदस्य राजनीति में हैं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह भी राजनीति में हैं। इसी लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बृजभूषणशरण सिंह के बेटे करणभूषण सिंह को लोकसभा का टिकट दे दिया, जबकि इसके पहले उनकी कोई राजनीतिक भूमिका नहीं रही थी। वसुंधरा राजे सिंधिया, रमापति त्रिपाठी और कल्याण सिंह के बेटे भी राजनीति में अपने माता-पिता की राजनीति को ही आगे बढ़ा रहे हैं। क्या इसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता? उन्होंने कहा कि गांधी परिवार के हर सदस्य ने लंबे समय तक जनता की सेवा करने के बाद कोई पद ग्रहण किया है। 

कांग्रेस ने यह निर्णय क्यों लिया?
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस के इस बचाव के बाद भी उस पर ये हमले रुकने वाले नहीं हैं। आगे भी लगातार सोनिया, राहुल और प्रियंका के संसद में रहने पर सत्ता पक्ष से हमला किया जाने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी प्रियंका गांधी को वायनाड से न उतारती, तो भी गांधी परिवार पर परिवारवादी राजनीति करने के आरोप लगते। ऐसे में यदि पार्टी प्रियंका गांधी को चुनाव में उतारती है और उसे इसका कुछ लाभ मिलता है, तो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 

उनके अनुसार, यदि वायनाड से गांधी परिवार के अलावा किसी दूसरे नेता को चुनाव लड़ाया जाएगा, तो इससे विपक्ष को यह कहने का अवसर मिल सकता है कि राहुल गांधी ने वायनाड की जनता को धोखा दिया। जबकि प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने से जनता की सहानुभूति बनी रहेगी। साथ ही गांधी परिवार के सदस्य के होने के कारण पूरे दक्षिण भारत में कांग्रेस को मजबूती बनी रहेगी। 
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