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दूरदर्शन चैनलों की गिरती साख से सरकार चिंतित, जेटली ने की प्रसार भारती के कामकाज की समीक्षा

Wed, 27 Apr 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 27 Apr 2016 11:22 PM IST
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arun Jaitley review to functioning of Prasar Bharati

दूरदर्शन चैनलों के गिरती साख को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरूण जेटली बेहद चिंतित हैं। सूत्र बताते हैं कि दूरदर्शन की दशा सुधारने के लिए सरकार जल्द ही कुछ ठोस कदम उठा सकती है।

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दूरदर्शन की दशा सुधारने को लेकर जेटली ने मंगलवार को मंत्रालय के सचिव सुनील अरोरा के साथ लंबी मंत्रणा की है। हालांकि अरोरा अब 30 अप्रैल को सेवानिवृत हो रहे हैं। मगर जेटली ने उनसे विभाग के स्थिति का जायजा लेने के साथ प्रसार भारती के कामकाज की समीक्षा की है। ताकि आने वाले नए सचिव एके मित्तल के साथ वे दूरदर्शन को संवार सकें।
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बताया जा रहा है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व को अपने जरिए बनाए गए प्रसार भारती के अध्यक्ष का कामकाज संतोषजनक नहीं लग रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों में प्रसार भारती अध्यक्ष के नाकामियों की चर्चाएं जोरों पर हैं।
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अध्यक्ष के रूप में वे अपने कामकाज का प्रभाव प्रसार भारती पर डाल पाने पर अब तक नाकाम रहे हैं। जबकि परंपरा से हटकर सरकार ने उनको मानदेय के तौर पर मोटी रकम की व्यवस्था कराई है।

बावजूद उसके सूर्यप्रकाश ने सरकार से लुटियन दिल्ली में बंगले की मांग कर डाली है। उनके बंगले की मांग भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी रास नहीं है। उन्होंने शाह से भी इस बात का आग्रह किया था।  

दूरदर्शन के चैनलों का आलम यह है कि एक तरफ पीएम मोदी अपनी सारी गतिविधियां दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए प्रसारित करने के अलावा देश के किसानों से किसान चैनल देखने की अपील करते हैं। तो दूसरी ओर सरकार को संसद में सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना पड़ा है कि दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट आने की वजह से दूरदर्शन को राजस्व का बड़ा झटका लगा है।


सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि नए निजाम में प्रसार भारती का नया अध्यक्ष आने के बाद भी स्थिति सुधरने के बजाय पहले से बिगड़ी है। जेटली तक प्रसार भारती में चल रही आर्थिक अनियमितताओं का पुलिंदा भी पहुंचा है। शायद यही वजह है कि जेटली एकाएक सूचना प्रसारण मंत्रालय के मामलों में सक्रिय हो गए हैं। ताकि कमियों पर समय रहते लगाम कसी जा सके। 

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