थानों में कश्मीरी युवकों की हो रही है काउंसलिंग, अमन बहाली के साथ करियर पर है फोकस
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करियर के बारे में बताया जा रहा है
अमन बहाली की इस कोशिश में बहुत से युवा ऐसे भी हैं, जिन्हें काउंसलिंग के नाम पर कई दिनों तक थाने में रखा जाता है। हालांकि इनमें ज्यादातर वे युवा हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहे हैं या फिर जिनकी खुफिया रिपोर्ट सही नहीं है। काउंसलिंग के बाद ऐसे युवाओं को सरपंच या पंच की गवाही पर छोड़ दिया जाता है। काउंसलिंग में कश्मीरी युवकों को उनके करियर से जुड़ी हर बात गहराई से बताई जा रही है। आगे कब कौन सी नौकरियां निकलेंगी, वे कैसे आवेदन कर सकते हैं, आदि जानकारियां दी जाती है।
सीमा पार से युवाओं को गुमराह करने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि और राज्यपाल के सलाहकार यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद उन्हें सबसे ज्यादा निगाह युवाओं पर रखनी होगी। पिछले एक साल के दौरान घाटी में पत्थरबाजी या विरोध प्रदर्शनों की घटनाओं में खासी कमी आई है। हालांकि इस बीच न केवल कश्मीर के कुछ संगठन, बल्कि सीमा पार से भी कश्मीरी युवाओं को उकसाने का प्रयास किया जाता रहा है। कश्मीर में मौजूद खुफिया एजेंसियों ने कई ऐसे मैसेज इंटरसेप्ट किए हैं, जिनमें युवाओं को भड़काने की बात कही जा रही थी। यही वजह है कि घाटी में अभी तक मोबाइल फोन सेवाएं बहाल नहीं की गई हैं।
युवाओं की दिक्कतों पर दे रहे हैं ध्यान
इंटरनेट सेवाओं से भी पूरी तरह बैन नहीं हटाया गया है। युवा किसी के बहकावे में आकर कोई देश-विरोधी काम न करें, इसके लिए मौलवियों और सरपंचों को उन्हें समझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यपाल के चारों सलाहकार जम्मू-कश्मीर में नियमित तौर पर लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, यहां पर युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अगर किसी युवा को पढ़ाई लिखाई, खेल या नौकरी के आवेदन से संबंधित कोई भी समस्या है, तो उसे कम से कम समय में निपटाने का प्रयास किया जाता है। वे किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनकी समस्याएं क्या हैं, इन सभी जानकारियों को एक रिपोर्ट की शक्ल देकर उसे राज्यपाल के पास भेज दिया जाता है।
कामयाब न होंगे ना-पाक इरादे
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार के. विजय कुमार, के.के शर्मा, के स्कंदन और फारूख खान नियमित तौर पर युवाओं की समस्याएं सुन रहे हैं। फारूख खान बताते हैं कि किसी भी सूरत में युवाओं को गुमराह नहीं होने दिया जाएगा। हम जानते हैं कि सीमा पार से लगातार ऐसे प्रयास हो रहे हैं कि युवाओं को किसी भी तोड़फोड़ की गतिविधि के लिए उकसाया जाए, लेकिन वे अपने ना-पाक इरादों में कामयाब नहीं होंगे।
केवल संदिग्ध युवकों की ही काउंसलिंग
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी का माहौल बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए। ये वही लोग हैं जो घाटी के युवाओं को गुमराह कर उनका आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। ये स्लीपर सेल पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और कश्मीरी अलगाववादियों के बीच कड़ी का काम करते रहे हैं। कई राजनीतिक दल भी अप्रत्यक्ष तौर पर इस कड़ी का हिस्सा बताए गए हैं। राज्यपाल के एक सलाहकार का मानना है कि थाने में काउंसलिंग कोई गलत बात नहीं है।
यहां केवल उन्हीं युवाओं को बुलाया जाता है जो संदिग्ध हैं। उनके गुमराह होने की पुख्ता इंटेलीजेंस रिपोर्ट होती है। यहां उन्हें करियर से जुड़ी तमाम जानकारियां दी जाती हैं। साथ ही उदाहरण देकर यह भी बताया जाता है कि युवाओं को गुमराह करने वाले कौन लोग हैं और अंत में उनका हाल क्या होता है। घाटी में नए एंटी टेरर लॉ के बारे में जो गलत जानकारी फैलाई जा रही है, उसे लेकर भी युवाओं की भ्रांतियां दूर की जाती हैं।
शपथ पत्र भी लिया जाता है...
दो-तीन दिन की काउंसलिंग के बाद अगर कोई युवा, सरकार के साथ आगे कदम रखने के लिए तैयार होता है, तो उनसे एक शपथ पत्र ले लिया जाता है। इसमें उनकी निजी जानकारी के अलावा यह लिखा रहता है कि वे भविष्य में कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जो देशद्रोह की श्रेणी में आता हो। इसके बाद युवाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक नौकरी के अवसरों की जानकारी दी जाती है। उन्हें बताया जाता है कि सरकार किस तरह से हर गांव के पांच-पांच युवाओं को नौकरी देगी और अगले 2-3 महीने में 50 हजार युवाओं को नौकरी मिल जाएगी।
सुनाए जा रहे हैं सेना की बहादुरी के किस्से
युवाओं को जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट के बारे में बताया जाता है, जिसमें वे अपना करियर बना सकते हैं। साथ ही, सेना, अर्धसैनिक बलों या जम्मू कश्मीर पुलिस में बहादुरी दिखाने वाले स्थानीय युवाओं का उदाहरण उनके सामने रखा जाता है। पिछले दिनों यहां के 575 युवा जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट का हिस्सा बने हैं। भर्ती में करीब 11,000 से भी ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।
स्थानीय युवाओं के सेना के प्रति जोश और जुनून को देखते हुए अगले महीने में भर्ती अभियान शुरु होगा। इसमें करीब 2070 युवाओं को सेना में भर्ती किया जाएगा। थाने में युवाओं से शपथ लेने से पहले उनके सुझाव भी लिए जाते हैं।