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अनुच्छेद 370: इस वजह से राज्यसभा में पहले पेश किया गया बिल, सात मिनट में कैबिनेट की मिली थी मंजूरी
Sat, 10 Aug 2019 02:51 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 10 Aug 2019 02:51 PM IST
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह
- फोटो : ANI
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कैबिनेट समिति जिसमें अनुच्छेद 370 को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का फैसला लिया गया वह केवल सात मिनट चली। उपस्थित मंत्रियों ने गृह मंत्री अमित शाह का जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया गया। यह जानकारी इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने दी। इस हफ्ते की शुरुआत में संसद ने नरेंद्र मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
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भाजपा ने अपने घोषणापत्र में 370 को खत्म करने का वादा किया था। यह अनुच्छेद राज्य को विशेष दर्जा देता था। इस अनुच्छेद के हटने के बाद से केंद्र का इसपर पूर्ण नियंत्रण हो गया है। सरकार ने जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। जिसमें पहला हिस्सा जम्मू-कश्मीर तो दूसरा लद्दाख है। सूत्र ने बताया, 'जिस क्षण अमित शाह ने धारा 370 का जिक्र किया, मंत्रियों ने मेज थपथपाना शुरू कर दिया। कैबिनेट की बैठक में यह एक भावनात्मक क्षण था।'
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सूत्र ने आगे कहा, 'मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल अधिकांश लोग श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का पालन करते हैं। मुखर्जी ने भारत के साथ कश्मीर के एकीकरण के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था।' सरकार के इस कदम के बारे में मोदी, शाह के अलावा बहुत कम लोगों को पता था। बिल के कुछ दिन पहले और राज्यसभा के सामने राष्ट्रपति के आदेश को पेश करने से पहले कुछ और लोगों को इसके बारे में पता चला।
उच्च सदन में सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है इसके बावजूद बिल को पहले राज्यसभा में रणनीति के तहत पेश किया गया था। जिसने विपक्ष को चौंकाने का काम किया था। सूत्र ने कहा, 'विपक्ष को इसका कोई भी अंदाजा नहीं था। यही हमारा मकसद था।' संसद में मौजूद सरकार के फ्लोर मैनेजर (फ्लोर प्रबंधक) ने विपक्षी पार्टियों को पहले से किसी महत्वपूर्ण चीज के राज्यसभा में आने को लेकर सूचित किया था लेकिन उन्हें असली बात तब बताई जब कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल गई।