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Army: भारत की सैन्य विरासत को खोजेगी उद्भव परियोजना, सेना ने पुराने महाकाव्यों की शुरू की पड़ताल

Tue, 21 May 2024 01:19 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Tue, 21 May 2024 01:19 PM IST
सार

सेना प्रमुख जनरल मनोज ने उद्धव परियोजना के बारे में बताया जिससे भारत की समृद्ध विरासत के बारे में पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में देश के दृष्टिकोण को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पिछले साल यह परियोजना शुरू की गई।

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Army: Udbhav project will explore India's military heritage, Army starts investigation of old epics
थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज पांडे - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सेना प्रमुख जनरल मनोज ने उद्धव परियोजना के बारे में बताया जिससे भारत की समृद्ध विरासत के बारे में पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में देश के दृष्टिकोण को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पिछले साल यह परियोजना शुरू की गई।
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इसमें 'उद्भव' वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अर्थशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों की गहराई के बारे में है। इसके जरिए प्रतिष्ठित भारतीय और पश्चिमी विद्वानों के बीच पर्याप्त बौद्धिक अभिसरण का खुलासा किया है।
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सेना प्रमुख मनोज पांडे ने भारतीय सामरिक संस्कृति में ऐतिहासिक पैटर्न के सम्मेलन में टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि यह 'उद्भव' परियोजना बल को "भविष्य के लिए तैयार" करने के लिए है। साथ ही भारत के प्राचीन रणनीतिक कौशल को समकालीन सैन्य क्षेत्र में एकीकृत करके सेना को तैयार करना। उन्होंने कहा, "इस परियोजना में वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अर्थशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों की गहनता से पड़ताल की गई है। यह पड़ताल परस्पर जुड़ाव, धार्मिकता और नैतिक मूल्यों पर आधारित रही।
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रणनीति का लगाया पता
उन्होंने बताया कि महाभारत की महाकाव्य लड़ाइयों, मौर्य, गुप्त और मराठों के शासनकाल की रणनीति के बारे में पता लगाया। पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि प्रोजेक्ट उद्भव को एक रणनीतिक शब्दावली और वैचारिक ढांचे को तैयार करने के लिए डिज़ाइन हुआ। इसमें भारत की दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत अंतर्निहित है। सेना प्रमुख मनोज पांडे ने कहा कि परियोजना उद्भव ने प्रख्यात भारतीय और पश्चिमी विद्वानों के बीच पर्याप्त बौद्धिक अभिसरण के बारे में बताता है। साथ ही उनके विचार, दर्शन और दृष्टिकोण के बीच प्रतिध्वनि को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की जनजातीय परंपराओं, मराठा नौसैनिक विरासत और सैन्य हस्तियों, विशेषकर महिलाओं के व्यक्तिगत वीरतापूर्ण कारनामों के बारे में बताया। साथ ही उनको नए क्षेत्रों में अन्वेषण करने के लिए प्रेरित किया। मनोज पांडे ने बताया कि यह परियोजना शिक्षाविदों, विद्वानों, अभ्यासकर्ताओं और सैन्य विशेषज्ञों के बीच नागरिक-सैन्य सहयोग को बढ़ावा देकर पूरे देश के दृष्टिकोण को मजबूत करती है।

सामूहिक प्रयास से व्यापक हो सकते हैं दायरे
सेना प्रमुख ने कहा कि इस तरह के सामूहिक प्रयास से प्राचीन भारत की रक्षा और शासन के अध्ययन के दायरे को व्यापक किया जा सकता है। साथ ही भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को समृद्ध किया जा सकता हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि हम अपनी सैन्य विरासत में अधिक खोज कर सकते हैं। युद्ध में कठोर भारतीय सशस्त्र बलों के विशाल अनुभव, बलिदान और जीत हमारी रणनीतिक संस्कृति को मजबूत करेंगे।


सेना ने लगाई प्रदर्शनी
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के इतिहास और विरासत को हमारी राष्ट्रीय संस्कृति और पहचान के अभिन्न अंग के रूप में मनाया जा रहा है। सेना ने 'भारतीय सैन्य प्रणालियों का विकास, युद्ध और सामरिक विचार - पुरातनता से स्वतंत्रता तक' नामक प्रदर्शनी भी लगाई। जो कि भारत की सैन्य प्रणालियों और रणनीति के विकास को प्रदर्शित करता है। सेना प्रमुख ने प्रदर्शनी में कहा, "मुझे यकीन है कि इससे हमारे अतीत के साथ-साथ वैश्विक क्षेत्र में भारतीय सेना की स्थिति को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।"
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