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India-US Tension: अमेरिका कैसे करता रहा पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई? भारतीय सेना ने साझा की 1971 की खबर
Tue, 05 Aug 2025 02:30 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 05 Aug 2025 02:30 PM IST
सार
अमेरिकी की टैरिफ बढ़ाने की धमकी पर भारत ने करारा जवाब दिया है। अब इस मामले में सेना ने अमेरिका की पोल खोलते हुए एक खबर साझा की है। भारतीय सेना की तरफ से साझा की गई 1971 की खबर और सरकार का तीखा जवाब दोनों ये बताते हैं कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को लेकर ज्यादा मुखर और आत्मनिर्भर हो गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ की लगातार आलोचना झेल रहे भारत ने सोमवार को कड़ा जवाब दिया। इसी बीच, भारतीय सेना की ईस्टर्न कमान ने एक पुरानी खबर को साझा कर अमेरिका की दोहरी नीति की ओर इशारा किया। यह खबर 5 अगस्त 1971 की है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका 1954 से पाकिस्तान को हथियार दे रहा था, और अब तक करीब 2 अरब डॉलर के हथियार भेज चुका था।
सेना की तरफ से साझा खबर में क्या?
भारतीय सेना ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा- 'इस दिन उस वर्ष' युद्ध की तैयारी - 05 अगस्त 1971। खबर के अनुसार, उस समय के रक्षा उत्पादन मंत्री वी. सी. शुक्ला ने राज्यसभा में बताया था कि 1954 से लेकर 1971 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को करीब 2 अरब डॉलर के हथियार दिए। यह खबर उस समय की है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बन रही थी, जो दिसंबर 1971 में बांग्लादेश की आजादी के रूप में खत्म हुई।
यह भी पढ़ें - NDA Meet: 'विपक्ष सोच रहा होगा कि क्या ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग कर कोई गलती की?' प्रधानमंत्री मोदी का तंज
अमेरिका और यूरोप पर भारत का तीखा पलटवार
इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में, भारत सरकार ने अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना को अनुचित और पक्षपाती बताया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन है। अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं- चाहे वह उर्वरक हो, खनिज, रसायन, स्टील, मशीनरी या ऊर्जा से जुड़ी वस्तुएं।' यह जवाब ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से संबंध रखने को लेकर भारतीय वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने की धमकी दी है।
यह भी पढ़ें - IAF: वायुसेना-नौसेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों का दिया बड़ा ऑर्डर, इनसे ही ऑपरेशन सिंदूर में तोड़ी पाकिस्तान की कमर
भारत ने गिनाए अमेरिका-रूस व्यापार के उदाहरण
विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड खरीदता है, जो उसके परमाणु उद्योग के लिए जरूरी है। पैलेडियम, जो ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) उद्योग में उपयोग होता है, भी अमेरिका रूस से खरीदता है। इसके साथ ही अमेरिका उर्वरक और अन्य रसायन भी रूस से मंगाता है। भारत ने साफ कहा है कि वह किसी के दबाव में नहीं आएगा और अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।
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#IndianArmy#EasternCommand#VijayVarsh #LiberationOfBangladesh #MediaHighlights
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"This Day That Year" Build Up of War - 05 Aug 1971 #KnowFacts.
"𝑼.𝑺 𝑨𝑹𝑴𝑺 𝑾𝑶𝑹𝑻𝑯 $2 𝑩𝑰𝑳𝑳𝑰𝑶𝑵 𝑺𝑯𝑰𝑷𝑷𝑬𝑫 𝑻𝑶 𝑷𝑨𝑲𝑰𝑺𝑻𝑨𝑵 𝑺𝑰𝑵𝑪𝑬 '54"@adgpi@SpokespersonMoD… pic.twitter.com/wO9jiLlLQfविज्ञापन विज्ञापन— EasternCommand_IA (@easterncomd) August 5, 2025
सेना की तरफ से साझा खबर में क्या?
भारतीय सेना ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा- 'इस दिन उस वर्ष' युद्ध की तैयारी - 05 अगस्त 1971। खबर के अनुसार, उस समय के रक्षा उत्पादन मंत्री वी. सी. शुक्ला ने राज्यसभा में बताया था कि 1954 से लेकर 1971 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को करीब 2 अरब डॉलर के हथियार दिए। यह खबर उस समय की है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बन रही थी, जो दिसंबर 1971 में बांग्लादेश की आजादी के रूप में खत्म हुई।
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अमेरिका और यूरोप पर भारत का तीखा पलटवार
इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में, भारत सरकार ने अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना को अनुचित और पक्षपाती बताया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन है। अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं- चाहे वह उर्वरक हो, खनिज, रसायन, स्टील, मशीनरी या ऊर्जा से जुड़ी वस्तुएं।' यह जवाब ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से संबंध रखने को लेकर भारतीय वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने की धमकी दी है।
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भारत ने गिनाए अमेरिका-रूस व्यापार के उदाहरण
विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड खरीदता है, जो उसके परमाणु उद्योग के लिए जरूरी है। पैलेडियम, जो ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) उद्योग में उपयोग होता है, भी अमेरिका रूस से खरीदता है। इसके साथ ही अमेरिका उर्वरक और अन्य रसायन भी रूस से मंगाता है। भारत ने साफ कहा है कि वह किसी के दबाव में नहीं आएगा और अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।