{"_id":"5f4136f65ef4456819286071","slug":"army-says-anti-fibrotic-drugs-effective-in-covid-19-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेना का दावा, कोरोना मरीजों के इलाज में एंटी-फाइब्रोटिक दवा कारगर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सेना का दावा, कोरोना मरीजों के इलाज में एंटी-फाइब्रोटिक दवा कारगर
Sat, 22 Aug 2020 08:47 PM IST
मुकेश कुमार झा
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sat, 22 Aug 2020 08:47 PM IST
विज्ञापन
कोरोना वायरस
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना ने दावा किया कि देश में पहली बार पुणे के चार मरीजों पर कोविड-19 की वजह से फेफड़ों में उत्पन्न फाइब्रोसिस और सांस लेने में परेशानी का इलाज करने के लिए एंटी- फाइब्रोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया गया और यह प्रभावी रहा।
विज्ञापन
सेना द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया, 'पुणे स्थित आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोथोरासिस साइंसेज (एआईसीटीएस) के शोधकर्ताओं ने पाया कि यह पद्धति कोविड-19 मरीजों के इलाज में बहुत ही प्रभावी है और वे इसका सहन भी कर सकते हैं। कोरोना मरीजों के उपवर्ग में 'लंग फाइब्रोरिस' (इस बीमारी में फेफड़ों के ऊत्तकों को जोड़ने के लिए अध्यधिक रेशे बन जाते हैं जिससे सांस लेने में परेशानी होती है) के इलाज के लिए नई रणनीति है।'
विज्ञापन
सेना ने कहा कि ये शुरुआती नतीजे हैं और इस क्षेत्र में और शोध किया जा रहा है ताकि उन मरीजों की पहचान की जा सके जिन्हें इस पद्धति से लाभ हो सकता है। सेना ने बताया कि वैज्ञानिकों को चार मरीजों का ऐसी दवाओं से इलाज करने में सफलता मिली है जो गंभीर लंग फाइब्रोसिस की वजह से ऑक्सीजन लेने में मुश्किल का सामना कर रहे थे। चारों मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञप्ति में कहा गया कि यह देखा गया कि कोविड-19 के ऐसे मरीजों की पर्याप्त संख्या है जिनका गंभीर निमोनिया का इलाज चल रहा है और उन्हें लंग फाइब्रोसिस की बीमारी हो गई है। इसका मतलब है कि उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे ऑक्सीजन धारण करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। सेना ने कहा, 'लंग फाइब्रोसिस से थकान, सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ जीवनपर्यंत ऑक्सीजन लेने की जरूरत पड़ सकती है।'