Army Recruitment: सेना भर्ती के लिए भटक रहे 2 लाख अभ्यर्थियों को मिला कांग्रेस का साथ, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
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विस्तार
करीब दो लाख युवा, जिन्होंने सेना में भर्ती होकर 'नाम-नमक-निशान' के जज्बे को साकार करने का सार्थक प्रयास किया था, अब उनके नियुक्ति पत्र की लड़ाई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हो गई हैं। सोमवार को जहां खरगे ने इन युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा, तो साथ राहुल गांधी ने उस पत्र को अपने 'एक्स' पर शेयर किया। तभी प्रियंका गांधी ने भी उन अभ्यर्थियों के समर्थन में एक पोस्ट साझा की। मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि सेना भर्ती के सभी पड़ाव पार कर चुके इन युवाओं को इस तरह से पीड़ित नहीं होने दिया जा सकता। मैं आपसे यह सुनिश्चित करने की अपील करता हूं कि न्याय और न्याय हो।
खरगे ने लिखा कि यह पत्र लगभग दो लाख युवा पुरुषों और महिलाओं के साथ घोर अन्याय को उजागर करता है। इनका भविष्य, नियमित भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने और केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ योजना लागू करने के कारण अनिश्चित हो गया है। इन युवाओं के साथ हुई मुलाकात का हवाला देते हुए खरगे ने लिखा, इन्होंने मुझे बताया है कि 2019 और 2022 के बीच, लगभग दो लाख युवा पुरुषों और महिलाओं को सूचित किया गया था कि उन्हें तीन सशस्त्र सेवाओं भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में स्वीकार कर लिया गया है। इन युवाओं ने कठिन मानसिक, शारीरिक और लिखित परीक्षा पास करने जैसी सभी बाधाओं को पार कर लिया था। 31 मई 2022 तक उन्हें विश्वास था कि वे अपने सपने को साकार करने में कामयाब हो गए हैं। उन्हें केवल अपने ज्वाइनिंग लेटर का इंतजार था। उस दिन, भारत सरकार द्वारा इस भर्ती प्रक्रिया को समाप्त करने और इसके स्थान पर अग्निपथ योजना लागू करने के निर्णय से उनके सपने चकनाचूर हो गए।
My letter to the Hon’ble President of India (@rashtrapatibhvn) highlighting the gross injustice to almost two lakh young men and women whose future has become uncertain due to ending of regular recruitment process and imposing Agnipath Scheme for the Armed Forces by the Union… pic.twitter.com/nZceaXpKs0— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 26, 2024
अग्निपथ योजना को लेकर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने लिखा था कि अग्निपथ से सेना 'आश्चर्यचकित' हो गई थी। खासतौर पर, नौसेना और वायु सेना के लिए, यह नीले रंग से बोल्ट की तरह आया था। इसके अलावा, यह योजना सैनिकों के समानांतर कैडर बनाकर हमारे जवानों के बीच भेदभावपूर्ण स्थिति पैदा करती है। सेना में एक जैसी ड्यूटी के लिए समान काम करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बहुत अलग परिलब्धियों, लाभों और संभावनाओं के साथ। चार साल की सेवा के बाद अधिकांश अग्निवीरों को अनिश्चित जॉब मार्केट में छोड़ दिया जाएगा। इसके बारे में कुछ लोगों का तर्क है कि इससे सामाजिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
इस सपने को पूरा करने में इन युवाओं को न केवल, कई साल लग गए, बल्कि 50 लाख आवेदकों में से प्रत्येक को 250 रुपये जमा करने पड़े हैं। इन युवाओं से बतौर आवेदन पत्र के साथ ली गई फीस यानी 125 करोड़ रुपये की भारी राशि, इन्हें वापस नहीं की गई। जिसके चलते हताशा और निराशा की वजह कई लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठने को मजबूर कर दिया। खरगे ने लिखा, इन युवाओं को इस तरह से पीड़ित नहीं होने दिया जा सकता। मैं आपसे यह सुनिश्चित करने की अपील करता हूं कि इनके साथ न्याय हो।
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, देशभक्ति और बहादुरी से सराबोर सैन्य अभ्यर्थियों के लिए न्याय की लड़ाई में हम उनके साथ हैं। कड़ी तपस्या के बाद सशस्त्र बलों में चयनित होकर भी नियुक्त न किए गए दो लाख युवाओं और अग्निवीर योजना के संदर्भ में राष्ट्रपति महोदया को लिखा कांग्रेस अध्यक्ष खरगे का पत्र।
इसके तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा, मन में देशभक्ति और सेवा की भावना लिए देश भर के लाखों युवा दिन-रात मेहनत करते हैं। ठंडी-गर्मी हो या बरसात, सुबह तड़के उठकर दौड़ने का अभ्यास करते हैं। वे सोचते हैं कि सेना में जाएंगे, देश की सेवा भी करेंगे और रोजगार भी मिलेगा। भाजपा सरकार ने अग्निवीर योजना लाकर देश के लाखों होनहार युवाओं के सपनों को कुचल दिया है। लाखों पद खाली, करोड़ों युवा बेरोजगार- यही मोदी की गारंटी है।