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एलएसी के दौरे से लौटे सेना प्रमुख नरवणे, आज दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक

Thu, 25 Jun 2020 12:03 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 25 Jun 2020 12:03 PM IST
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Army Chief General Naravane expected to brief political leadership about situation on ground and dragon act
लद्दाख में जवानों से बातचीत करते सेनाध्यक्ष नरवणे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे पूर्वी लद्दाख की दो दिवसीय यात्रा से वापस दिल्ली लौट आए हैं। माना जा रहा है कि वे आज राजनीतिक नेतृत्व को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ड्रैगन की करतूतों और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ जमीन पर स्थिति के बारे में बताएंगे।

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पिछले दो दिनों से सेनाध्यक्ष नरवणे पूर्वी लद्दाख में पीएलए के साथ पॉइंट पर हुए गतिरोध के बारे में आकलन कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ एलएसी पर सभी 65 बिंदुओं पर गश्त करने के लिए सैनिकों को निर्देश दिए हैं। पिछले एक हफ्ते में आईटीबीपी बटालियन के साथ तिब्बत थिएटर के लिए प्रशिक्षित विशेष बलों की अधिक बटालियनों को यह सुनिश्चित करने के लिए शामिल किया गया है कि पीएलए द्वारा किसी भी प्रयास को नाकाम कर दिया जाए।
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ऐसा माना जाता है कि जनरल नरवणे राजनीतिक नेतृत्व को पीएलए की तैनाती और एलएसी पर उसके पॉश्चर के बारे में भी जानकारी देंगे। यदि मामला बिगड़ता है तो एलएसी पर पीएलए पॉश्चर के बारे में उनका आकलन राजनीतिक नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। सेनाध्यक्ष थल सेना प्रमुख, वायु सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत के साथ वायु और समुद्र में भारतीय पॉश्चर अपनाने को लेकर भी विचार-विमर्श करेंगे।

यह भी पढ़ें-भारत-चीन तनाव: वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने लेह में भरी उड़ान, हवाई गतिविधियां तेज


इसके अलावा जमीन पर किसी भी बल की आवश्यकताओं को जनरल रावत और रक्षा मंत्रालय द्वारा संभाला जाएगा। जहां चीन लगातार भारत पर हिंसा को लेकर आरोप लगा रहा है वहीं भारतीय रक्षा रणनीतिकारों ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया है।

जनरल नरवणे को गलवां घाटी में तथाकथित नए चीनी किलेबंदी के सवालों का भी जवाब देना होगा। लद्दाख में अब भी तनाव बरकरार है लेकिन 22 जून के बाद से एलएसी पर शांति है। यह जानकारी वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स ने दी। भारी संख्या में दोनों ही पक्षों की सेनाएं एलएसी पर तैनात हैं।

हालांकि विदेश मंत्रालय के साथ सीमा विवाद के मुद्दे को लेकर चीनी राजनयिक ने भारत को गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए दोषी ठहराया था। जबकि असल में सच्चाई ये है कि सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद चीन की सेनाएं वादे के मुताबिक पीछे नहीं हटी थीं। इसे लेकर भारतीय जवानों ने विरोध जताया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हिंसा हुई थी।

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