फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Are you the chief priest of the country?: Supreme Court asks this question to the petitioner in Sabarimala cas

क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं?: सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता से पूछा सवाल, जानें मामला

Tue, 05 May 2026 12:59 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Riya Dubey Updated Tue, 05 May 2026 12:59 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन को कड़ी फटकार लगाते हुए उसकी 2006 की याचिका को कानून का दुरुपयोग बताया। अदालत ने पूछा कि संगठन को ऐसी याचिका दायर करने का अधिकार कैसे मिला और कहा कि उसे वकीलों के हित में काम करना चाहिए।

विज्ञापन
Are you the chief priest of the country?: Supreme Court asks this question to the petitioner in Sabarimala cas
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश से जुड़े अहम मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने सबरीमाला विवाद में याचिका दायर करने वाले इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने 2006 में दायर जनहित याचिका को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए तीखा सवाल किया आपने यह याचिका क्यों दायर की? क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं?
विज्ञापन


यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, एमएम सुंदरश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।
विज्ञापन

अदालत की सख्त टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन की मंशा और अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कोई भी जूरिस्टिक बॉडी यानी कानूनी संस्था व्यक्तिगत आस्था का दावा नहीं कर सकती। उन्होंने टिप्पणी की, विश्वास व्यक्ति का होता है, संस्था का नहीं। आपके पास कोई कांशियंस (अंतरात्मा) नहीं है। जस्टिस अरविंद कुमार ने भी संगठन से पूछा कि क्या याचिका दाखिल करने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था और क्या संगठन के अध्यक्ष ने इसे मंजूरी दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीजेआई सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने के बजाय संगठन को बार और युवा वकीलों के हित में काम करना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली युवा वकीलों को सहयोग देने और उनके लिए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने अदालत को बताया कि 2006 में प्रकाशित चार समाचार रिपोर्टों के आधार पर यह PIL दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य भगवान अयप्पा के भक्तों की आस्था को चुनौती देना नहीं, बल्कि उसे बनाए रखना है।

वकील ने यह भी कहा कि मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी) ने पहले यह मत व्यक्त किया था कि कम उम्र की महिलाओं का प्रवेश देवता की इच्छा के विरुद्ध है। साथ ही, उन्होंने नौ-न्यायाधीशों की पीठ के संदर्भ में कुछ न्यायाधीशों की टिप्पणियों पर आपत्ति भी जताई।

मामला क्या है?

केरल के सबरीमाला विवाद में लंबे समय से 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक रही है। यह परंपरा भगवान अयप्पा को नैष्ठिक ब्रह्मचारी मानने से जुड़ी रही है। इस प्रथा को चुनौती देते हुए 2006 में इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

2018 का ऐतिहासिक फैसला

इस मामले में सबरीमाला मंदिर प्रवेश संबंधी फैसला 2018 के तहत पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सितंबर 2018 में 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह प्रथा महिलाओं के मौलिक अधिकारों विशेष रूप से समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है।


हालांकि, इस फैसले के बाद देशभर में व्यापक बहस और विरोध-प्रदर्शन हुए। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें धार्मिक परंपराओं और संविधान के अधिकारों के बीच संतुलन पर सवाल उठाए गए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed