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संसद में उठा मुद्दा: क्या केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए बन रहे हैं नए सीएसएस रूल्स, सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाया 'सीएपीएफ' का मामला

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 20 Dec 2021 10:36 PM IST
सार

भाजपा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने पूछा, क्या सरकार इन बलों के लिए केन्द्रीय सिविल सेवाएं (आचरण) नियमावली की बजाए अलग से नियम बनाने की प्रक्रिया में है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, सीएपीएफ को लेकर ऐसे अभ्यावेदन मिलते रहते हैं, लेकिन अभी इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

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Are new CSS rules being made for central paramilitary forces Subramanian Swamy raised the issue of CAPF Latest News Update
सुब्रह्मण्यम स्वामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्रीय अर्धसैनिक बल/सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) से जुड़ा एक अहम मुद्दा संसद में उठाया है। ये वही मसला है, जिसे लेकर केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी और जवान लंबे समय से विभिन्न माध्यमों के जरिए अपनी मांग सरकार तक पहुंचाते रहे हैं। विभिन्न बलों के अनेक अधिकारी अदालतों में लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें उनकी परमोशन, वेतन भत्ते, कैडर समीक्षा, सेवा के नियम और पुरानी पेंशन व्यवस्था आदि शामिल हैं। 
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भाजपा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने पूछा, क्या सरकार इन बलों के लिए केन्द्रीय सिविल सेवाएं (आचरण) नियमावली की बजाए अलग से नियम बनाने की प्रक्रिया में है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, सीएपीएफ को लेकर ऐसे अभ्यावेदन मिलते रहते हैं, लेकिन अभी इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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सुब्रमण्यम स्वामी ने गत सप्ताह राज्य सभा में पूछा था कि क्या भूतपूर्व अर्धसैनिक बल कल्याण संघ, नई दिल्ली, (सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स के सेवानिवृत्त कार्मिकों के लिए) ने गृह मंत्री को एक याचिका/मांग ज्ञापन प्रस्तुत किया है। दूसरा, क्या सरकार अर्धसैनिक बलों/सीएपीएफ 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों' की जोखिम भरी सेवा स्थितियों/परिवार से अलग रहने की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए सीसीएस 'केंद्रीय सिविल सेवा' आचरण नियम के बजाए पृथक नियम बनाने की प्रक्रिया में हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल 'सीएपीएफ' कार्मिकों के लिए अन्य बातों के साथ साथ अलग सेवा और पेंशन नियमावली की मांग करने वाले अभ्यावेदन समय समय पर प्राप्त होते रहते हैं। मौजूदा समय में राज्यसभा सांसद स्वामी का ये सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि पिछले दिनों कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री तक को सीएपीएफ की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है। 


एसोसिएशन का कहना है कि उन्हें अपने हितों के लिए अदालती लड़ाई लड़नी पड़ रही है। केंद्र सरकार में विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। आतंक, नक्सल, चुनावी ड्यूटी, आपदा, वीआईपी सिक्योरिटी और अन्य मोर्चों पर इन बलों के जवान तैनात हैं। इसके बावजूद उन्हें सिविल फोर्स बता दिया जाता है। जवानों को पुरानी पेंशन से वंचित रखा जा रहा है। सिपाही से लेकर कैडर अफसरों तक की परमोशन में लंबा वक्त लग रहा है। नतीजा, बहुत से जवान और अधिकारी समय से पहले ही सेवा छोड़ रहे हैं।
 
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