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Aravalli Hills: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात नहीं दे पाएंगे खनन आदेश; अब अगस्त में 'सुप्रीम' सुनवाई

Thu, 09 May 2024 08:50 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 09 May 2024 08:50 PM IST
सार

अरावली की पहाड़ियों में खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक चार राज्यों- दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को अरावली क्षेत्र में किसी नए खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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Aravalli Hills Supreme Court Delhi Haryana Gujarat Rajasthan No Final Mining Permit till further Orders
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

अरावली के पहाड़ी क्षेत्र में खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालत के अगले आदेश के बिना चार राज्यों में किसी भी राज्य को भी खनन की अंतिम अनुमति देने का अधिकार नहीं होगा। गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अरावली की रक्षा जरूरी है। अदालत ने साफ किया कि पहले से ही वैध परिमिट और लाइसेंस के आधार पर जारी खनन गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा रही है। जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति अभय ओका की पीठ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश वैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाने के रूप में नहीं देखा जाएगा।
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आवेदनों पर विचार और नवीनीकरण की प्रक्रिया पर अदालत की टिप्पणी
दो जजों की खंडपीठ ने कहा, अदालत यह आदेश उन चार राज्यों के संबंध में जारी कर रही है जिनसे अरावली की पहाड़ियां गुजरती हैं। इससे स्पष्ट है कि आदेश केवल अरावली पहाड़ियों और इसकी श्रृंखलाओं में खनन तक ही सीमित है। अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक सभी राज्य खनन पट्टों के आवेदनों पर विचार और नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगे। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की रिपोर्ट में अरावली पहाड़ियों में खनन पर रोक को लेकर जो बातें कही गई हैं, इस आधार पर कोई अंतिम अनुमति नहीं दी जाएगी।
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राज्यों की सामूहिक जवाबदेही
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने शीर्ष अदालत में एक रिपोर्ट पेश की। राजस्थान में की गई विभिन्न अवैध खनन गतिविधियों का जिक्र करते हुए इस रिपोर्ट में अवैध खनन का जिलेवार विवरण भी दिया गया है। रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा, अरावली पहाड़ियों में खनन गतिविधियों का मुद्दा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात को संयुक्त रूप से संबोधित करने की जरूरत है। पीठ ने अरावली पहाड़ियों के लिए एक समिति के गठन का आदेश दिया। खंडपीठ ने कहा कि समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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अगस्त में होगी अगली सुनवाई
पीठ ने कहा कि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध पर्यावरण की दृष्टि से भी अनुकूल नहीं है। इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में आगे की सुनवाई अगस्त महीने में होगी।
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