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Namami Gange: नमामि गंगे परियोजना ने राज्यों में बदली जंगलों की तस्वीर, जानें कैसे वनीकरण से आया बदलाव
Mon, 04 Nov 2024 12:55 PM IST
संध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Mon, 04 Nov 2024 12:55 PM IST
सार
Namami Gange: केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। परियोजना के मुख्य स्तंभों में से एक वनीकरण ने कई राज्यों में जंगलों की तस्वीर बदली है।
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नमामि गंगे परियोजना के तहत वनीकरण
- फोटो : x/cleanganganmcg
विस्तार
हरिद्वार के चंडी घाट पर चार नवंबर से गंगा उत्सव 2024 शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत यह आयोजन लगातार आठवीं साल हो रहा है। इस बार यह उत्सव गंगा नदी के संरक्षण की दास्तां बयां करेगा। गंगा नदी की सफाई को लेकर खूब कवायदें की गई हैं जिसमें सबसे अहम नमामि गंगे कार्यक्रम है। केंद्र सरकार ने 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण करके उसको स्वच्छ बनाना था। नमामि गंगे परियोजना के मुख्य स्तंभोंं में वनीकरण भी शामिल है जिसके जरिए राज्यों में जंगल की तस्वीर बदली है।
हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है? परियोजना के मुख्य स्तंभ वनीकरण से क्या बदला है?
नमामि गंगे परियोजना क्या है?
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
परियोजना के मुख्य स्तंभ वनीकरण से क्या बदला है?
नमामि गंगे परियोजना के सात मुख्य स्तंभ हैं। इनमें सीवरेज उपचार अवसंरचनानदी-तट विकास, नदी सतह की सफाई, जैव विविधता, वनीकरण, जन जागरण, औद्योगिक अपशिष्ट निगरानी और गंगा ग्राम शामिल हैं। वन प्रबंधन के जरिए नदी के मुख्य जल क्षेत्रों और नदी तथा उसकी सहायक नदियों के किनारे वनों की उत्पादकता और विविधता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून ने गंगा नदी के तटवर्ती राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 1,34,106 हेक्टेयर क्षेत्र में वनरोपण के लिए 2293.73 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है।
प्रस्तावित वन प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के समग्र संरक्षण में योगदान देना है, जिसमें पूर्व-निर्धारित गंगा नदी परिदृश्य में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाकर नदी के प्रवाह में सुधार करना शामिल है।
30,071 हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुका वृक्षारोपण
अब तक नमामि गंगे के तहत 30,071 हेक्टेयर वृक्षारोपण किया गया है, जिसके लिए वर्ष 2016-17 से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के राज्य वन विभागों द्वारा 347.02 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है।
इसके अलावा राज्य कार्यक्रमों जैसे हरेला (उत्तराखंड), गंगा हरितम् अभियान (उत्तर प्रदेश), हर परिसर हर परिसर (बिहार) और वन महोत्सव (झारखंड और पश्चिम बंगाल) के सहयोग से वृक्षारोपण गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।
वृक्षारोपण का मध्यावधि मूल्यांकन
नानामि गंगे के अंतर्गत वानिकी वृक्षारोपण का मध्यावधि मूल्यांकन भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल द्वारा 2021-22 में किया गया ताकि 5 गंगा राज्यों में चलाई जा रही गतिविधि की प्रभावकारिता का पता लगाया जा सके। यह पौधों की जीवित रहने की दर और वृद्धि का पता चलता है। जो प्राकृतिक, सहायता प्राप्त और पुनर्निर्माण गंगा नदी परिदृश्य में अच्छी प्रथाओं और उपयुक्त वृक्षारोपण मॉडल को अपनाने का परिणाम था।
वार्षिक परिचालन योजना
वर्ष 2022-23 के लिए वृक्षारोपण और संरक्षण कार्यों के लिए वार्षिक परिचालन योजना (एपीओ) को अब तक 3 राज्यों (उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड) के लिए अनुमोदित किया गया है।
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हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है? परियोजना के मुख्य स्तंभ वनीकरण से क्या बदला है?
नमामि गंगे परियोजना क्या है?
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
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परियोजना के मुख्य स्तंभ वनीकरण से क्या बदला है?
नमामि गंगे परियोजना के सात मुख्य स्तंभ हैं। इनमें सीवरेज उपचार अवसंरचनानदी-तट विकास, नदी सतह की सफाई, जैव विविधता, वनीकरण, जन जागरण, औद्योगिक अपशिष्ट निगरानी और गंगा ग्राम शामिल हैं। वन प्रबंधन के जरिए नदी के मुख्य जल क्षेत्रों और नदी तथा उसकी सहायक नदियों के किनारे वनों की उत्पादकता और विविधता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून ने गंगा नदी के तटवर्ती राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 1,34,106 हेक्टेयर क्षेत्र में वनरोपण के लिए 2293.73 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है।
प्रस्तावित वन प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के समग्र संरक्षण में योगदान देना है, जिसमें पूर्व-निर्धारित गंगा नदी परिदृश्य में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाकर नदी के प्रवाह में सुधार करना शामिल है।
30,071 हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुका वृक्षारोपण
अब तक नमामि गंगे के तहत 30,071 हेक्टेयर वृक्षारोपण किया गया है, जिसके लिए वर्ष 2016-17 से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के राज्य वन विभागों द्वारा 347.02 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है।
| राज्य | 2016-17 से 2021-22 तक वृक्षारोपण (क्षेत्रफल हेक्टेयर में) | व्यय (करोड़ रुपये में) |
| उत्तराखंड | 10,356 | 128.54 |
| उत्तर प्रदेश | 8,820 | 71.09 |
| बिहार | 7,896 | 97.76 |
| झारखंड | 884 | 26.25 |
| पश्चिम बंगाल | 2,115 | 23.39 |
| कुल | 30,071 | 347.02 |
इसके अलावा राज्य कार्यक्रमों जैसे हरेला (उत्तराखंड), गंगा हरितम् अभियान (उत्तर प्रदेश), हर परिसर हर परिसर (बिहार) और वन महोत्सव (झारखंड और पश्चिम बंगाल) के सहयोग से वृक्षारोपण गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।
वृक्षारोपण का मध्यावधि मूल्यांकन
नानामि गंगे के अंतर्गत वानिकी वृक्षारोपण का मध्यावधि मूल्यांकन भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल द्वारा 2021-22 में किया गया ताकि 5 गंगा राज्यों में चलाई जा रही गतिविधि की प्रभावकारिता का पता लगाया जा सके। यह पौधों की जीवित रहने की दर और वृद्धि का पता चलता है। जो प्राकृतिक, सहायता प्राप्त और पुनर्निर्माण गंगा नदी परिदृश्य में अच्छी प्रथाओं और उपयुक्त वृक्षारोपण मॉडल को अपनाने का परिणाम था।
| राज्य | औसत उत्तरजीविता दर (%) |
| उत्तराखंड | 83.62% |
| उत्तर प्रदेश | 69.01% |
| बिहार | 61.46% |
| झारखंड | 69.32% |
| पश्चिम बंगाल | 73.63% |
वार्षिक परिचालन योजना
वर्ष 2022-23 के लिए वृक्षारोपण और संरक्षण कार्यों के लिए वार्षिक परिचालन योजना (एपीओ) को अब तक 3 राज्यों (उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड) के लिए अनुमोदित किया गया है।