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समयसीमा के भीतर आवेदन देने वाले ही कर सकेंगे एनआरसी में दावा
ब्यूरो/ अमर उजाला, गुवाहाटी
Updated Tue, 07 Aug 2018 03:33 AM IST
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असम में अब वही लोग दावे और आपत्तियां कर सकते हैं जिन्होंने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए तय समयसीमा यानी 31 अगस्त 2015 के भीतर आवेदन जमा किए थे लेकिन उनके नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में शामिल नहीं हुए। एनआरसी असम समन्वयक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इस बता की जानकारी दी।
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अधिकारी के मुताबिक, जिन्होंने 31 अगस्त 2015 तक आवेदन पत्र जमा नहीं किए थे, वे 10 अगस्त से 28 सितंबर के बीच आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोगों के मामले में एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फैसला लिया जाएगा।
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अधिकारी ने बताया कि असम की पूर्व मुख्यमंत्री अनवरा तैमूर और पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिजनों ने समयसीमा के भीतर आवेदन नहीं किया था। नतीजतन उनके नाम एनआरसी मसौदे में शामिल नहीं हैं।
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अधिकारी ने बताया कि मसौद में जिनके नाम शामिल नहीं हैं वे सेवा केंद्रों के जरिए ही अपने दावे एवं आपत्तियां जमा कर सकते हैं, आनलाइन नहीं। लोग पहले जमा किए दस्तावेज या नए दस्तावेजों के साथ दावे कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित फार्म 10 अगस्त से सेवा केंद्रों पर मिलेंगे या फिर एनआरसी की वेबसाइट से इन्हें डाउनलोड किया जा सकता है। दावे, आपत्तियों एवं भूल सुधार के लिए अलग अलग फार्म होंगे।
15 अगस्त 2015 तक जन्म लेने वालों के ही नाम होंगे शामिल
अधिकारी ने बताया कि अंतिम एनआरसी में 15 अगस्त, 2015 तक पैदा होने वाले लोगों के नाम ही शामिल किए जाएंगे। दावों के जरिए उक्त तारीख के बाद पैदा होने वाले बच्चों के नाम इसमें शामिल नहीं किए जा सकते हैं। इसी तरह आवेदन जमा करने के बाद यदि किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो योग्य पाए जाने पर ही उसका नाम एनआरसी में शामिल होगा।