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दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों को तत्काल हटाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार

Sun, 10 Jan 2021 04:23 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 10 Jan 2021 04:23 AM IST
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Appeal to Supreme Court to immediately remove the farmers protesting on the borders of Delhi
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को तुरंत हटाने की मांग की है। शीर्ष अदालत में 11 जनवरी को होने वाली सुनवाई से पहले मुख्य याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा ने हलफनामा दायर कर कहा कि सिंघु, गाजीपुर, चिल्ला और टिकरी बॉर्डर पर बैठे किसानों के कारण लाखों लोगों को आने जाने में काफी परेशानी हो रही है। लिहाजा सीमाओं को तुरंत खुलवाने का आदेश पारित किया जाए। किसानों को अवरोध की इजाजत देकर सुप्रीम कोर्ट शाहीन बाग मामले में दिए अपने फैसले के विपरीत काम कर रहा है।

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हलफनामे में मीडिया रिपोर्ट और निजी जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। अवरोध की वजह से अर्थव्यवस्था को रोजाना 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कच्चे माल की कीमतों में 30 फीसदी तक इजाफा हो गया है।
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शीर्ष अदालत ने 18 दिसंबर को किसानों को इस शर्त पर प्रदर्शन की इजाजत दी थी कि पब्लिक आर्डर बना रहे व किसी तरह की हिंसा न हो। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को आवाजाही में होने वाली परेशानी, अर्थव्यवस्था पर असर व चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी आदि मसलों को नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंसा व तोड़फोड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन किसानों ने पंजाब में करीब 1,500 मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया।
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शाहीन बाग मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन करने के अधिकार के नाम पर सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को बाधित या कब्जा करने की कानूनन अनुमति नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक स्थलों को बाधित या कब्जे में रखने को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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