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8th CPC: 8वें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों में बदलाव के लिए पीएम मोदी से गुहार, अनफंडेड स्कीम/OPS पर की ये मांग

Mon, 17 Nov 2025 06:46 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 17 Nov 2025 06:46 PM IST
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Appeal to PM Modi for changes in the 'Terms of Reference' of the 8th Pay Commission
8वां वेतन आयोग - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय कर्मचारी संगठन, 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' ने आठवें वेतन आयोग की 'संदर्भ की शर्तों' (टीओआर) में बदलाव की मांग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई है। सोमवार को पीएम मोदी, कैबिनेट सचिव, डीओपीटी सचिव और वित्त सचिव को भेजे गए पत्र में  यह मांग की गई है। कॉन्फेडरेशन के महासचिव एसबी यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि 'पेंशनभोगियों' और उनके परिवारों के लिए पेंशन संशोधन को आयोग में शामिल किया जाए। विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत पेंशन एवं पेंशन लाभों में संशोधन और संदर्भ शर्तों (टीओआर) से गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की 'अवित्तपोषित लागत' शब्दावली को टीओआर से हटाना, यह बात भी कर्मचारियों की मांग का हिस्सा है। अनफंडेड स्कीम/पुरानी पेंशन पर भी 'कॉन्फेडरेशन' ने महत्वपूर्ण संशोधनों की मांग की है। 

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उचित संशोधन किए जाने की आवश्यकता 
'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के महासचिव एसबी यादव बताते हैं, केंद्र सरकार के कर्मचारी एवं श्रमिक परिसंघ, जो डाक, आयकर, लेखा परीक्षा, सर्वेक्षण, केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, जनगणना, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, इसरो आदि 130 विभागों के लगभग 8 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने टीओआर में संशोधन की मांग की है। भारत सरकार, वित्त मंत्रालय ने तीन नवंबर की अधिसूचना के माध्यम से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसके संदर्भ की शर्तों को प्रकाशित कर दिया है। 'संदर्भ की शर्तों' पर पुनर्विचार और सेवारत कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के व्यापक हित में उचित संशोधन किए जाने की आवश्यकता है। 
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अवित्तपोषित लागत, ये शब्दावली हटाई जाए 
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के प्रभावी होने की तिथि, संदर्भ की शर्तों (टीओआर) में ऐसी किसी भी तिथि का कोई उल्लेख नहीं है। यह एक स्थापित तथ्य है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन लाभों का संशोधन 10 वर्षों में एक बार होगा। चौथा वेतन आयोग 01.01.1986, पांचवां वेतन आयोग 01.01.1996, छठा वेतन आयोग 01.01.2006 और सातवां वेतन आयोग 01.01.2016 से लागू हुआ है। इसके मद्देनजर, यह स्वतः और न्यायोचित है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को भी 01.01.2026 से लागू किया जाना चाहिए। इसे 8वें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों में शामिल किया जाए। विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत पेंशन व पेंशन लाभों में संशोधन और संदर्भ शर्तों (टीओआर) से "गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अवित्तपोषित लागत" शब्दावली को हटाया जाए। 
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69 लाख पेंशनरों के पेंशन में संशोधन 
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के संदर्भ की शर्तों (टीओआर) में पुरानी पेंशन योजना, एकीकृत पेंशन योजना और राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत कवर किए गए पारिवारिक पेंशनरों सहित मौजूदा 69 लाख पेंशनरों के पेंशन में संशोधन, पेंशन में समानता या पेंशन के कम्यूटेशन की बहाली की अवधि सहित उनके अन्य पेंशन लाभ आदि के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है। 'कॉन्फेडरेशन' ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि इन बातों को संदर्भ की शर्तों में शामिल किया जाए। उन सिद्धांतों की जांच हो, जो पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की संरचना को नियंत्रित करते हैं। इसमें पेंशन में संशोधन, पेंशन में समानता, जैसी बातें भी शामिल हैं। किसी भी तारीख को सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के मामले में यानी जो 1/1/2026 से पहले या 1/1/2026 के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। 

'गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं' की 'अनफंडेड लागत' 
कर्मचारियों की चिंता टीओआर के पैरा (ई) (ii) में “गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अनफंडेड लागत” वाक्यांश के उपयोग से उत्पन्न होती है, जो न तो पेंशनभोगियों का उल्लेख करता है और न ही आयोग के दायरे में उनके अधिकारों और हितों को मान्यता देता है। 'कॉन्फेडरेशन' के मुताबिक,  यह शब्दावली अनुपयुक्त है, क्योंकि यह संवैधानिक और न्यायिक रूप से संरक्षित पेंशन अधिकारों को राजकोषीय देनदारियों के बराबर मानती है और सभी पिछले वेतन आयोगों में सरकार द्वारा अपनाए गए मानवीय, कल्याण-उन्मुख दृष्टिकोण से हटाती है। मौजूदा पेंशनभोगी, टीओआर को नकारात्मक मानते हैं और आशंका जताते हैं कि सरकार 8वें सीपीसी को परोक्ष रूप से “सभी अनफंडेड व्यय” को हटाने के लिए अनिवार्य तौर पर काम कर रही है। यह मानते हुए कि उनके वेतन के एक हिस्से के रूप में योगदान, अकेले इस तरह के “वित्त पोषण” का निर्माण कर सकता है। यह उन सरकारी कर्मियों की मेहनत की अनदेखी है, जिन्होंने अपने लंबे सेवा करियर के दौरान समाज और राष्ट्र के लिए बहुमूल्य “योगदान” दिया है।

पेंशन नियोक्ता की इच्छा पर भुगतान का इनाम नहीं ...  
यह ध्यान देने योग्य है कि सांसदों, विधायकों, सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, या अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों की पेंशन के संदर्भ में ऐसी कोई शब्दावली ("अनफंडेड स्कीम") का उपयोग कभी नहीं किया गया है। हालांकि उनकी पेंशन भी गैर-अंशदायी है और भारत के समेकित कोष से ली जाती है। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों के माध्यम से इसकी बार-बार पुष्टि की है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि: "पेंशन नियोक्ता की इच्छा पर भुगतान किया जाने वाला इनाम नहीं है। नियोक्ता धन की कमी का बहाना करके जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। विजय कुमार बनाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि पेंशन अनुच्छेद 300 ए के तहत एक संवैधानिक अधिकार है।सर्वोच्च न्यायालय ने डीएस नाकरा मामले में कहा कि, "पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है जो उन लोगों को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करता है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में नियोक्ता के लिए इस आश्वासन के साथ अथक परिश्रम किया कि बुढ़ापे में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा"।

पेंशन एक संपत्ति अधिकार है ...  
सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार, विशेष रूप से देवकीनंदन प्रसाद बनाम बिहार राज्य 197 में, इस बात की पुष्टि की है कि पेंशन एक संपत्ति अधिकार है और इसे विधि के प्राधिकार के बिना वापस नहीं लिया जा सकता। पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है जो कर्मचारियों को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करता है। यह आश्वासन देता है कि बुढ़ापे में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा, जिससे यह एक संवैधानिक दायित्व बन जाता है। एक आदर्श नियोक्ता के रूप में, भारत सरकार का अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा और कल्याण को बनाए रखना नैतिक और कानूनी दायित्व है। यह समझना ज़रूरी है कि जब पेंशन वैध हो और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसकी पुष्टि की गई हो, तो "पेंशनभोगी" शब्द को विषय-वस्तु की सूची से हटाना असंगत है। ऐसे में 'गैर-अंशदायी पेंशन योजना की अवित्तपोषित लागत' केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों पर लागू नहीं होती, क्योंकि केंद्र सरकार एक आदर्श नियोक्ता है। 8वें वेतन आयोग को अन्य सेवानिवृत्ति लाभों, पेंशन संबंधी लाभों जैसे कि 11 वर्षों के बाद पेंशन के कम्यूटेड मूल्य की बहाली, संसदीय स्थायी समिति द्वारा अनुशंसित सेवानिवृत्ति की तिथि से 5 वर्षों में एक बार पेंशन/पारिवारिक पेंशन की अतिरिक्त मात्रा प्रदान करना, पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल आदि की भी समीक्षा और सिफ़ारिश करनी चाहिए। आयोग, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सीजीईजीआईएस योजना की समीक्षा करेगा और उसमें बदलावों की सिफ़ारिश करेगा।

एक लाख कर्मी ही एनपीएस से यूपीएस में गए ...  
कॉन्फेडरेशन ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि उन कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली हो, जिनकी भर्ती 1/4/2004 के बाद हुई थी, जिनकी संख्या 26 लाख है और जो एनपीएस या यूपीएस के अंतर्गत आते हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारी एनपीएस और यूपीएस को बदलकर सीसीएस पेंशन नियम 1972 (अब 2021) के तहत पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की जोरदार मांग कर रहे हैं। मुश्किल से लगभग एक लाख कर्मचारी, एनपीएस से यूपीएस पेंशन योजना में शिफ्ट हुए हैं। कर्मचारियों ने एकीकृत पेंशन योजना पर असंतोष व्यक्त किया है। वे सभी कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना को ही पसंद करते हैं। हालांकि, 8वें सीपीसी के संदर्भ की शर्तों (टीओआर) में इसे शामिल नहीं किया गया है।


8वें केंद्रीय वेतन आयोग का विस्तार ... 
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लाभ भारत सरकार द्वारा केंद्रीय वित्तपोषित स्वायत्त और वैधानिक निकायों व ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) को भी प्रदान किए जाएंगे, जो डाक विभाग की रीढ़ हैं। यह मांग भी संदर्भ शर्तों में  शामिल की जाए। 8वें वेतन आयोग के गठन और उसके कार्यान्वयन में हो रही देरी के कारण तत्काल प्रभाव से 20% अंतरिम राहत प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। इसके चलते आयोग के कार्यान्वयन में देरी और मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति से होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की जा सकती है। लगभग 1.2 करोड़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा, जो सरकारी तंत्र को चलाते हैं और वे विकासात्मक गतिविधियों में अधिक उत्साह से भाग लेंगे। आयोग, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य योजना की समीक्षा करेगा। उसमें बदलाव की सिफारिश करेगा ताकि भारत सरकार के स्वायत्त और वैधानिक निकायों में कार्यरत सभी कर्मचारी इसके दायरे में आ सकें। जिला मुख्यालयों पर अधिक सीजीएचएस वेलनेस सेंटर खोलने और कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस और परेशानी मुक्त चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करना, यह बात भी आयोग की संदर्भ शर्तों में शामिल हो। आयोग, संसद की स्थायी समिति की सीजीएचएस संबंधी सिफारिशों के अनुसार, कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए सीजीएचएस योजना में बदलावों का सुझाव देगा।

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