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एससी-एसटी एक्ट में 180 दिन बाद भी हो सकेगी अपील: हाईकोर्ट

Thu, 11 Oct 2018 03:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 11 Oct 2018 03:35 AM IST
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Appeal to be done after 180 days in SC-ST Act: Allahabad High Court

एससी-एसटी एक्ट में विशेष कोर्ट के किसी आदेश के खिलाफ 180 दिन बाद भी सुनवाई हो सकती है। हाईकोर्ट की तीन जजों की पूर्णपीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले पर निर्णय सुनाते हुए एक्ट की धारा 14 ए(3)(2) को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह धारा संविधान में दिए मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 14 और 21 के विपरीत होने के कारण रद्द होने योग्य है। पूर्ण पीठ ने कहा कि यदि हाईकोर्ट को लगता है कि 180 दिनों के विलंब बाद भी अपील पर सुनवाई का उचित कारण है तो वह विलंब माफ कर सुनवाई कर सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि संशोधित धारा 14 ए(3)(2) 26 जनवरी 2016 को लागू होगी है, इसलिए यह इस तिथि के बाद ही प्रभावी मानी जाएगी। इससे पूर्व हुए आदेशों में पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।

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अधिवक्ता विष्णुबिहारी तिवारी ने आपराधिक जनहित याचिका दाखिल कर संशोधित धारा 14 ए(3)(2) की वैधता को चुनौती दी थी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की। पूर्ण पीठ का कहना था कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधित धारा 14 ए(3)(2) जोड़ने के बाद हाईकोर्ट का अनुच्छेद 226, 227, पुनरीक्षण और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत सुनवाई का अधिकार समाप्त हो जाता है, क्योंकि इस धारा के तहत हुए आदेशों के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में ही दाखिल होनी है।
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पूर्ण पीठ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कानून तो बना दिया मगर उनको लागू करने के लिए अदालतें गठित नहीं की है। सरकार को निर्देश दिया है कि आठ सप्ताह के भीतर प्रदेश के सभी जिलों में एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालतें गठित की जाएं। वर्तमान में एससी-एसटी एक्ट के मुकदमों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों को सौंपा गया है। अधिकारियों की कमी के कारण उन पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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यह था मामला

एससी-एसटी एक्ट की संशोधित धारा 14 ए(3)(2) में यह प्रावधान किया गया था कि इस एक्ट के तहत होने वाले किसी आदेश के खिलाफ प्रभावित व्यक्ति 90 दिन के भीतर हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सकता है। यदि 90 दिन में अपील दाखिल नहीं होती है तो हाईकोर्ट को और 90 दिनों तक के विलंब को माफ करने का अधिकार है। इस प्रकार की अपील अधिकतम 180 दिनों के भीतर दाखिल हो सकती है। 180 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद हाईकोर्ट को अपनी अंतर्निहित शक्तियों अनुच्छेद 226, 227, 482 सीआरपीसी के तहत सुनवाई का अधिकार नहीं था।


याचिका में दलील दी गई कि ऐसा होने से प्रभावित व्यक्ति के लिए न्याय पाने के सभी रास्ते बंद हो जाएंगे जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। इससे अनुच्छेद 14 में समानता और अनुच्छेद 21 में दिए प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का हनन होता है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब 180 दिन बाद भी सुनवाई हो सकेगी।

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