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लंदन में बेनामी प्रॉपर्टी मामला: आर्म्स डीलर भंडारी ने माना वाड्रा ने भेजे थे ई-मेल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Jun 2016 03:31 PM IST
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- फोटो : file photo
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आर्म्स डीलर संजय भंडारी ने माना है कि रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी मनोज अरोड़ा ने उन्हें ई-मेल भेजे थे। भंडारी के ठिकानों पर इनकम टैक्स ने 27 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल तक छापेमारी की थी। विभाग के अधिकारियों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है कि सर्च ऑपरेशन खत्म होने से पहले उन्होंने भंडारी से ई-मेल के बारे में पूछा था। इनमें 4 अप्रैल 2010 को भेजा गया रॉबर्ट वाड्रा का ई-मेल भी शामिल है। यह इकलौता ई-मेल है, जो कि वाड्रा की पर्सनल ई-मेल आईडी से भेजा गया था। इसमें लंदन स्थित अपार्टमेंट में रेनोवेशन कराने का जिक्र है।
ई-मेल में एक अटैचमेंट ऐसा भी मिला है, जिसमें भंडारी का रिश्तेदार सुमित चड्ढा रेनोवेशन के खर्चे के बारे में बात कर रहा है। वह पहले बताता है कि रेनोवेशन पर 28,000 पौंड (करीब 28 लाख) का खर्च आएगा, लेकिन बाद में कुछ और कार्य जुड़वा दिए गए, जिसके बाद कुल खर्च बढ़कर 35,000 पौंड (करीब 35 लाख) हो गया।
छापेमारी के बाद पांच दिन बाद 5 मई 2016 को ई-मेल से प्राप्त जानकारी के आधार पर इनकम टैक्स विभाग ने सात देशों से भंडारी की प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी मांगी थी। इनमें ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, यूके और दुबई में प्रॉपर्टी शामिल हैं। इस बारे में अभी तक जवाब आना बाकी है।
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इनकम टैक्स अधिकारियों ने उन खबरों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया है कि इस मामले में प्रांरभिक जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। विभाग का कहना है कि पूरी तस्वीर तभी साफ होगी, जब हमारी ओर से भेजे गए सवालों के जवाब आ जाएंगे।
गौरतलब है कि वाड्रा की लंदन में कथित बेनामी संपत्ति के बारे में सबसे पहले एनडीटीवी ने खुलासा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस मामले से जुड़ी प्रारंभिक रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के पास है, जिसकी समीक्षा की जा रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी ने लंदन स्थित घर के बारे में कई ई-मेल भेजे थे। इनमें पेमेंट और घर के रेनोवेशन जैसी बातों का जिक्र है। दस्तावेजों के मुताबिक, जिस घर को लेकर विवाद हो रहा है, वह अक्टूबर 2009 में 19 करोड़ रुपए में खरीदा गया था और जून 2010 में बेच दिया गया था।
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ई-मेल में एक अटैचमेंट ऐसा भी मिला है, जिसमें भंडारी का रिश्तेदार सुमित चड्ढा रेनोवेशन के खर्चे के बारे में बात कर रहा है। वह पहले बताता है कि रेनोवेशन पर 28,000 पौंड (करीब 28 लाख) का खर्च आएगा, लेकिन बाद में कुछ और कार्य जुड़वा दिए गए, जिसके बाद कुल खर्च बढ़कर 35,000 पौंड (करीब 35 लाख) हो गया।
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छापेमारी के बाद पांच दिन बाद 5 मई 2016 को ई-मेल से प्राप्त जानकारी के आधार पर इनकम टैक्स विभाग ने सात देशों से भंडारी की प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी मांगी थी। इनमें ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, यूके और दुबई में प्रॉपर्टी शामिल हैं। इस बारे में अभी तक जवाब आना बाकी है।
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इनकम टैक्स अधिकारियों ने उन खबरों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया है कि इस मामले में प्रांरभिक जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। विभाग का कहना है कि पूरी तस्वीर तभी साफ होगी, जब हमारी ओर से भेजे गए सवालों के जवाब आ जाएंगे।
गौरतलब है कि वाड्रा की लंदन में कथित बेनामी संपत्ति के बारे में सबसे पहले एनडीटीवी ने खुलासा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस मामले से जुड़ी प्रारंभिक रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के पास है, जिसकी समीक्षा की जा रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी ने लंदन स्थित घर के बारे में कई ई-मेल भेजे थे। इनमें पेमेंट और घर के रेनोवेशन जैसी बातों का जिक्र है। दस्तावेजों के मुताबिक, जिस घर को लेकर विवाद हो रहा है, वह अक्टूबर 2009 में 19 करोड़ रुपए में खरीदा गया था और जून 2010 में बेच दिया गया था।