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अंतर्ध्वनि: खुशियां शुभ्र चमकदार ओस की बूंदों की तरह अनंत हैं
Mon, 20 May 2019 11:56 AM IST
गौरव द्विवेदी
हेलेन केलर
हेलेन केलर
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Mon, 20 May 2019 11:56 AM IST
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हेलेन केलर, सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका और विचारक (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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मैं नेत्रहीन हूं और मैंने कभी इंद्रधनुष नहीं देखा; किंतु मुझे उसकी सुंदरता के बारे में बताया गया है। मैं जानती हूं कि उसकी सुंदरता सदैव ही अधूरी और टूटी-फूटी होती है। वह आसमान पर कभी भी पूर्णाकार में प्रकट नहीं होता।
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यही बात उन सभी चीजों के बारे में सही है, जिन्हें हम पृथ्वी वाले जानते हैं। जिस तरह इंद्रधनुष का वृत्त खंडित होता है, उसी तरह जीवन भी अधूरा है और हममें से हरेक के लिए टूटा-फूटा है। हम ब्राउनिंग के इन शब्दों, ‘पृथ्वी पर टूटे हुए बिंब, स्वर्ग में एक पूर्ण चंद्र’ का अर्थ तब तक नहीं समझ सकेंगे, जब तक हम अपने खंड जीवन से अनंत की ओर कदम नहीं बढ़ा लेते।
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सुख का एक द्वार बंद होने पर, दूसरा खुल जाता है; लेकिन कई बार हम बंद दरवाज़े की तरफ इतनी देर तक ताकते रहते हैं कि जो द्वार हमारे लिए खोल दिया गया है, उसे देख नहीं पाते। आनंद स्वार्थ-सिद्धि से नहीं मिलता, बल्कि किसी समुचित उद्देश्य के प्रति वफादार होने से मिलता है। सुरक्षा, निश्चिंतता या बेफिक्री एक कल्पना है, अंधविश्वास है। जीवन अगर साहस से भरी यात्रा न हुआ, तो कुछ न हुआ।
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जो लोग खुशी की तलाश में घूमते हैं, वे अगर एक क्षण रुकें और सोचें तो वे यह समझ जाएंगे कि सचमुच खुशियों की संख्या पांव के नीचे के दूर्वादलों की तरह अनगिनत है; या कहिए कि सुबह के फूलों पर पड़ी हुई शुभ्र चमकदार ओस की बूंदों की तरह अनंत है। इतिहास ने जिन स्त्री-पुरुषों को मानवता की सेवा का अवसर देकर समादृत किया है, उनमें से अधिकांश को विपरीत परिस्थितियों का अनुभव हुआ है। आंतरिक सत्यों में हमारी अंधता के कारण कोई अंतर नहीं पड़ता। अधिकतम सौंदर्य-दृष्टि तक केवल कल्पना के द्वारा ही पहुंचा जा सकता है। -सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका और विचारक