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Chennai: सच है.. जाको राखे साइयां मार सके ना कोय, मुर्गे की बलि चढ़ाना चाहता था शख्स, पर खुद ही मारा गया
Sat, 29 Oct 2022 02:54 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 29 Oct 2022 02:54 AM IST
सार
मुर्गे को खरोंच तक नहीं आई वह बच गया और शख्स की मौत हो गई। मृतक राजेंद्रन का परिवार से कोई संपर्क नहीं है इसलिए पुलिस उसके मूल स्थान की पहचान नहीं कर पाई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एक कहावत है जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। ये हाल में घटी एक घटना पर पूरी तरह से सटीक बैठती है। दरअसल, मामला चेन्नई का है यहां एक नए बने घर से बुरी शक्तियों और आत्माओं को दूर रखने के लिए अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। इस अनुष्ठान के तहत मुर्गे की बलि चढ़ाई जानी थी। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि मुर्गे को एक खरोंच तक नहीं आई और उसकी बलि देने जा रहे शख्स की ही मौत हो गई। आइए जानते हैं पूरा मामला...
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मृतक की पहचान राजेंद्रन के रूप में हुई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना पल्लवरम के पॉझीचलूर में हुई और मृतक की पहचान राजेंद्रन के रूप में हुई है। वह 70 साल का था। राजेंद्रन पिछले कई सालों से बलि चढ़ाने का काम किया करता था। इसलिए टी लोकेश नाम के एक शख्स ने उसको अपने निर्माणाधीन घर में मुर्गे की बलि चढ़ाने के लिए कहा था।
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लोकेश का घर तीसरी मंजिल पर होने कारण मुर्गे को बलि के लिए ऊपर ले जाया गया। इस निर्माणाधीन बिल्डिंग में लिफ्ट के लिए खाली जगह थी, जिसे खुला छोड़ दिया गया था। गुरुवार सुबह करीब 4:30 बजे राजेंद्रन सीढ़ियों से अकेले इमारत की सबसे ऊपर की मंजिल पर पहुंचा। कुछ मिनिट बाद राजेंद्रन ने खुले लिफ्ट के वैंट में कदम रखा और सीधे जमीन पर आ गिरा।
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मुर्गे को नहीं आई खरोंच
इस दौरान मुर्गा भी इमारत से जमीन पर आ गिरा। लेकिन मुर्गे को खरोंच तक नहीं आई और राजेंद्रन की मौत हो गई। वहीं मृतक राजेंद्रन के परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, इसलिए पुलिस उसके मूल स्थान की पहचान नहीं कर पाई है।
घरवालों का पता लगाने की कोशिश की जा रही
पुलिस ने उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उसके घरवालों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। बता दें कि दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में निर्माणाधीन इमारत में अनुष्ठान आयोजित कर बुरी शक्ति और आत्माओं को दूर रखने के लिए बलि चढ़ाने की प्रथा रही है।