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महाराष्ट्र: महाविकास अघाड़ी में फूट की शुरुआत है देशमुख का इस्तीफा! संकट में है उद्धव सरकार

Tue, 06 Apr 2021 09:07 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 06 Apr 2021 09:07 AM IST
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Anil Deshmukh s exit: The start of Maharashtra Vikas Aghadi alliance s troubles maharashtra political crisis   uddhav thackeray
उद्धव ठाकरे - फोटो : ANI

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिलेटिन से भरी स्कॉपियो मिलने के मामले में हटाए गए मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के महाराष्ट्र के गृह मंत्री पर लगाए गए धन उगाही के आरोपों के बाद से राजनीतिक उठापटक जारी है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे की वजह से सत्ताधारी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) खासतौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी ) को सोमवार को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। अनिल देशमुख के इस्तीफे को महाविकास अघाड़ी में फूट के तौर पर देखा जा रहा है, ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार अपने पांच साल पूर कर पाएगी। यहां पढ़ें पूरा मामला...

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दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई से जांच कराए जाने का आदेश दिया था। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि देशमुख के गृहमंत्री रहते हुए मुंबई पुलिस अपने मुखिया के खिलाफ आरोपों की जांच कैसे कर पाएगी। 
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इसके बाद से एक ओर एनसीपी देशमुख को कैबिनेट से हटाना नहीं चाहती थी, तो वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ने देशमुख के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। सरकार में तीसरी पार्टी कांग्रेस अब तक नाराज है कि पूरे प्रकरण में उससे कोई सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया। देशमुख मामले में तालमेल की कमी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार पांच साल तक अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी या फिर देशमुख का इस्तीफा इस गठबंधन में फूट की शुरुआत है। 

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जांच की घोषणा के बाद से लग रहीं थीं इस्तीफे की अटकलें 

उद्धव सरकार ने देशमुख पर लगाए गए आरोपों की जांच रिटायर्ड जज से कराने की घोषणा की थी, तभी यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अब देशमुख से इस्तीफा मांगा जाएगा, यह निष्प्क्ष जांच के लिए जरूरी था। साथ ही लोगों के बीच यह संदेश भी जाएगा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गंभीर है। 

देशमुख पर कार्रवाई के पक्ष में नहीं थी एनसीपी
पार्टी नेताओं के मुताबिक, एनसीपी का शीर्ष नेतृत्व देशमुख के खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं चाहता था। हालांकि, इस बात को लेकर सहमति थी कि बाद में देशमुख को गृह मंत्रालय से किसी और विभाग में भेज दिया जाएगा, लेकिन इस बीच हाईकोर्ट के आदेश ने एनसीपी को मजबूर कर दिया कि वह देशमुख का इस्तीफा ले। ऐसे में इस्तीफा लेने में पार्टी की ओर से हुई देरी ने एनसीपी भद्द पीट दी। 

यहां से अलग हुईं राहें
बता दें कि 25 फरवरी को जबसे मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से भरी गाड़ी मिली, तबसे ही एमवीए सरकार और एनसीपी अलग-अलग नजर आ रही है। इसकी शुरुआत हुई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को लेकर अलग-अलग रुख से।महाराष्ट्र सरकार ने एंटीलिया केस की जांच कर रहे मुंबई क्राइम ब्रॉच के निलंबित पुलिस अधिकारी को हटाने में देरी किए जाने और वाजे की गिरफ्तारी पर अलग-अलग रुख देखने को मिला था।  

परमबीर सिंह के आरोपों अपनाएं अलग-अलग रुख

उद्धव सरकार के अंदर एक राय की कमी उस वक्त भी दिखी, जब मुंबई पुलिस कमिश्नर और देवेंद्र फडणवीस ने अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसके पीछे भी वजह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी चीफ शरद पवार के बीच एकमत न होना ही था। एमवीए नेताओं की मानें, तो ठाकरे चाहते थे कि एनसीपी देशमुख को कैबिनेट से हटाए। हालांकि, दूसरी तरफ एनसीपी नहीं चाहती थी कि वह देशमुख पर लगे आरोपों पर तुरंत कार्रवाई करे।

पवार से नहीं थी ये उम्मीद
एक मीडिया संस्थान से बातचीत मे राजनीतिक विशेषज्ञ हेमंत देसाई ने कहा कि सहयोगी पार्टियों के बीच आपसी तालमेल की कमी साफ दिखी। स्थिति को संभालने का रवैया ढुलमुल था। सरकार को बिना देरी मामले की जांच करवाने का आदेश देना चाहिए था और जब जांच की घोषणा की गई थी, तो देशमुख से उसी समय इस्तीफा लेना चाहिए था ताकि उन्हें गृह विभाग से दूर रखा जा सके। यह समझना मुश्किल है कि शरद पवार जैसे मंझे राजनेता ने यह क्यों नहीं किया। देसाई ने कहा कि सीबीआई की एंट्री के बाद चीजें एमवीए सरकार के कंट्रोल में नहीं रहीं क्योंकि अब केंद्रीय एजेंसी अपनी तरह से जांच करेगी।

एमवीए के पास बचा है विकल्प?
महाराष्ट्र सरकार पिछले करीब एक महीने से राजनीतिक भरपाई करने में जुटी है। हालांकि इसमें सफलता हाथ नहीं लगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब स्थिति पहले से ज्यादा जटिल हो गई है। एक वरिष्ठ एनसीपी नेता ने बताया कि फिलहाल सबसे पहली योजना सीबीआई जांच वाले हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की है। हालांकि, महा विकास अघाड़ी इसपर फैसला करेगी कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार फैसले को चुनौती देगी या फिर देशमुख खुद इसके खिलाफ अर्जी देंगे।

गठबंधन में शामिल कांग्रेस भी नाराज

महाविकास अघाड़ी में सहयोगी कांग्रेस भी राजनीतिक घमासान और खुद को तवज्जो नही मिलने से नाराज है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूरे घटनाक्रम पर कहा कि यह तीन पार्टियों वाली सरकार है। जो भी होता है, सभी सहयोगियों को उसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। वाजे-देशमुख विवाद को एनसीपी का मामला माना जा रहा है। एनसीपी ने सीएम से विचार-विमर्श किया क्योंकि उन्हें करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हमारी राय जानने की जहमत नहीं उठाई। अगर यह एक राजनीतिक लड़ाई है, तो तीनों पार्टियों को साथ मिलकर लड़ना होगा। देशमुख के इस्तीफे से एमवीए की समस्याएं खत्म होना मुश्किल है बल्कि ये और बढ़ेंगी।
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