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आंध्र प्रदेश: रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई समेत अवैध परियोजनाओं पर तेलंगाना मंत्रिमंडल ने आपत्ति जताई
Mon, 21 Jun 2021 05:38 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 21 Jun 2021 05:38 AM IST
सार
- आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने अवैध परियोजनाओं को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार की निंदा की
- तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश के अवैध परियोजनाओं के खिलाफ एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
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एनजीटी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
तेलंगाना मंत्रिमंडल ने रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई समेत आंध्र प्रदेश के अवैध परियोजनाओं पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्रिमंडल ने कृष्णा नदी के पानी का उचित हिस्सा दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं को शुरू करने का फैसला किया है।
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कृष्णा जल बंटवारे पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और प्रधानमंत्री को एक मसौदा भी सौंपेगा मंत्रिमंडल
साथ ही मंत्रिमंडल आंध्र प्रदेश की अवैध परियोजनाओं को रोकने और कृष्णा नदी के पानी के उचित बंटवारे पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपने पर विचार कर रहा है।
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शनिवार देर रात तेलंगना मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने अवैध परियोजनाओं को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार की निंदा की है। मंत्रिमंडल का कहना है कि पड़ोसी राज्य ने परियोजनाओं से संबंधित एनजीटी और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों की अनदेखी की है।
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लिहाजा तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश के अवैध परियोजनाओं के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह बताते हुए कि तेलंगाना ने केंद्र से कृष्णा नदी के पानी को साझा करने के संबंध में एक न्यायाधिकरण केगठन पर शीघ्र निर्णय लेने के आश्वासन के बाद सर्वोच्च अदालत में से अपने मामले वापस ले लिए हैं। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि मंत्रिमंडल ने नदियों के पानी पर आमने-सामने बातचीत को लेकर केंद्र के उदासीन रवैये पर भी नाराजगी जताई है।
मंत्रिमंडल ने विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण का फैसला लिया है, जिसमें आलमपुर में कृष्णा नदी पर एक बैराज बनाकर 60-70 टीएमसी बाढ़ के पानी को पाइपलाइन के जरिये स्थानांतरित करना, पुलिचिंताला परियोजना में एक नहर का निर्माण और कृष्णा नदी में राज्य के देय हिस्से को सुरक्षित करने के लिए सनकेसुला जलाशय में एक अन्य जलाशय का निर्माण करना भी शामिल है।
विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रिमंडल की बैठक में एक राय व्यक्त की गई थी कि आंध्र प्रदेश की अवैध परियोजनाओं को रोकने और कृष्णा नदी के पानी में राज्य के हिस्सा को सुरक्षित करने वास्ते केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपने जैसे प्रयास को अमलीजामा पहनाने की दरकार है।