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सत्ताधारी नेताओं की न्यायपालिका विरोधी टिप्पणी लोकतंत्र के लिए खतरा : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

Fri, 09 Oct 2020 02:22 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 09 Oct 2020 02:22 AM IST
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Andhra Pradesh High Court: Anti judiciary remarks by ruling leaders threat to democracy
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस के कुछ नेताओं की तरफ से सोशल मीडिया में न्यायपालिका के खिलाफ की गई टिप्पणी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य पुलिस की अपराध जांच शाखा (सीआईडी) को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह जांच में फेल रही तो यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।

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हाईकोर्ट ने सीआईडी के सही जांच नहीं करने पर सीबीआई को जांच सौंपने की दी चेतावनी
जस्टिस राकेश कुमार और जस्टिस उमा देवी की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की। पीठ ने मौखिक तौर पर गौर किया कि विधानसभा अध्यक्ष टी. सीतारामख उप मुख्यमंत्री नारायण स्वामी, सांसदों वी. विजयसाई रेड्डी व नंदीगाम सुरेश और सत्ताधारी पार्टी के अन्य नेताओं की सोशल मीडिया पर टिप्पणियां न्यायपालिका पर हमला थीं।
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पीठ में शामिल दोनों जजों ने सवाल किया कि जब उच्च पदों पर तैनात व्यक्तियों ने जजों और अदालतों के खिलाफ टिप्पणी की, तो मामले क्यों दर्ज नहीं किए गए? उन्होंने कहा, चीजों को देखते हुए, हमें यह अनुमान लग रहा है कि न्यायपालिका के खिलाफ एक युद्ध घोषित कर दिया गया है। पीठ ने सीआईडी के वकील से पूछा कि विधानसभा अध्यक्ष ने टिप्पणी सदन में की थी या बाहर? वकील ने पीठ को बताया कि स्पीकर ने टिप्पणी तिरुमाला पहाड़ियों में की थी।
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इस पर पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां बहुराष्ट्रीय होने के चलते यह जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार करना चाहिए। साथ ही राज्य सरकार से इस पर ऐतराज होने के बारे में पूछा। राज्य सरकार की तरफ से पेश महाधिवक्ता श्रीराम सुब्रमण्यम ने कहा कि यदि अदालत आदेश में राज्य सरकार या सीआईडी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करती है तो सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने पर कोई ऐतराज नहीं होगा। इसके बाद खंडपीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।


बता दें कि इस मामले में हाईकोर्ट खंडपीठ ने खुद ही संज्ञान लेते हुए सुनवाई चालू की थी। इसके बाद सीआईडी ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की तरफ दी गई शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी थी। लेकिन अभी तक किसी भी नेता को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

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