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Anantnag: जिस दिन जंगल में छिपे ये '69' पाकिस्तानी दहशतगर्द हाथ लग गए, समझो जम्मू-कश्मीर में आतंक खत्म
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आतंकियों पर शिकंजा।
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में करीब 69 विदेशी (पाकिस्तानी) आतंकी मौजूद हैं। ये गहरे जंगलों में छिपे हैं। यही आतंकी, सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। एक मुठभेड़ के अंतराल के बाद ये आतंकी, सिक्योरिटी फोर्स की हर मूवमेंट से जुड़ा इंटेलिजेंस एकत्रित करते हैं। इनके पास जो संचार सिस्टम होता है, उसे ट्रैक करना आसान नहीं होता। वे आपसी बातचीत के लिए विभिन्न तरह के 'एप' का इस्तेमाल करते हैं। इन दहशतगर्दों को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' की 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और 'जैश-ए-मोहम्मद' की सक्रिय प्रॉक्सी विंग 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) के माध्यम से मदद मिलती है। लोकल स्तर पर सक्रिय इन्हीं संगठनों को जम्मू-कश्मीर में आतंक की 'ऑक्सीजन' बंद बताया जाता है। जिस दिन ये '69' दहशतगर्द, भारतीय सुरक्षा बलों के हाथ लग जाएंगे, समझो जम्मू-कश्मीर में आतंक की ऑक्सीजन बंद हो जाएगी।पाकिस्तान से आए 30 आतंकी मारे गए हैं ...
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में बुधवार को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट शहीद हो गए हैं। साल 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना है, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए हैं। अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई है। गाडोले इलाके में छिपे आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच कई घंटे तक फायरिंग चलती रही। मंगलवार को राजौरी के दूर-दराज नारला क्षेत्र में भी आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरु हुई थी, जो दूसरे दिन जारी रही। इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए हैं। उसमें सेना का एक जवान शहीद हो गया। पुलिस के तीन अधिकारी भी घायल हुए हैं। इस साल अभी तक जम्मू-कश्मीर में लगभग 40 आतंकी सुरक्षा बलों की गोली का निशाना बने हैं। इनमें 30 आतंकी पाकिस्तान से आए थे और बाकी स्थानीय आतंकी थे। इनमें से कई आतंकियों को राजौरी और पुंछ इलाके में ढेर किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं ये आतंकी समूह ...
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के आतंकी संगठनों की मदद से कई दूसरे संगठन भी सक्रिय हैं। इनमें यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू कश्मीर (यूएलएफजेएंडके), मुजाहिद्दीन गजवत-उल-हिंद (एमजीएच), जम्मू कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ) और कश्मीर टाइगर्स आदि शामिल हैं। पाकिस्तान से घुसपैठ के जरिए भारतीय सीमा में घुसे आतंकियों के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को अधिक जानकारी नहीं मिल पाती है। वजह, वे जंगलों में छिपे रहते हैं। लोकल संगठनों की मदद से सुरक्षा बलों की आवाजाही के इनपुट जुटाते हैं। एक अंतराल के बाद ही किसी हमले को अंजाम देते हैं। इसके पीछे भी एक वजह है। घाटी में अब लोकल स्तर पर नए आतंकियों की भर्ती में तेजी से कमी आ रही है। 2018 में 187 आतंकी, 2019 में 121, 2020 में 181, 2021 में 142 और 2022 में 91 आतंकी भर्ती हुए थे। इस साल वह संख्या, गिनती के आतंकियों तक सीमित है। जम्मू कश्मीर पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने नई भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस दी है। इसके चलते पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन, छोटे हमलों पर फोकस नहीं कर रहे। जम्मू कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान के आतंकियों का इस्तेमाल वे किसी बड़े हमले के दौरान ही करते हैं।
20 जुलाई तक 35 आतंकी मारे गए थे
जम्मू कश्मीर में आतंकियों पर सुरक्षा बलों का शिकंजा कसता जा रहा है। लगातार हो रहे 'एनकाउंटर' में विदेशी (पाकिस्तानी) और लोकल आतंकी ढेर हो रहे हैं। पिछले साल 187 आतंकी, सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इस वर्ष 20 जुलाई तक 35 आतंकी सुरक्षा बलों की गोली का निशाना बने हैं। खास बात है कि इनमें 27 विदेशी और 8 लोकल आतंकी शामिल थे। इन सबके बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि बॉर्डर के किसी हिस्से में कहीं पर बड़ी 'सेंध' तो नहीं लगी है। जम्मू-कश्मीर में 69 'पाकिस्तानी' आतंकी मौजूद हैं। सेना एवं दूसरे सुरक्षा बलों का दावा है कि हाल-फिलहाल कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। बॉर्डर पर पुख्ता चौकसी है। ऐसे में वे आतंकी कहां से और कैसे घुसे हैं। घाटी में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों के अलावा 35 लोकल दहशतगर्द भी मौजूद हैं। जम्मू-कश्मीर में 2018 में 257 आतंकी मारे गए थे। 2019 में 157 आतंकी, 2020 में 221 आतंकी, 2021 में 180 आतंकी, 2022 में 187 आतंकी और इस साल 20 जुलाई तक आधिकारिक डेटा के अनुसार 35 आतंकी मारे गए थे।
तब उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता है
जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं सुरक्षा बल, लोकल आतंकियों का सरेंडर कराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हालांकि इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी है। आतंकियों द्वारा सरेंडर करने के मामले देखें तो पता चलता है कि 2018 में एक, 2019 में कोई नहीं, 2020 में 8, 2021 में 2 और 2022 में केवल दो आतंकियों ने सरेंडर किया है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि वहां पर जब कोई युवा गायब हो जाता है तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। जम्मू कश्मीर पुलिस, लापता हुए युवक का पता लगाने का प्रयास करती है। दो तीन सप्ताह बाद असल खेल शुरु होता है। एक तरफ गुमशुदा युवक के परिजन और पुलिस उसे खोज रही होती है और दूसरी ओर तभी उस युवक की तस्वीर सोशल मीडिया पर आ जाती है। तस्वीर में वह युवक किसी आतंकी संगठन के सदस्य के तौर पर हथियार लहराता हुआ नजर आता है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता है।
अब हाइब्रिड आतंकी बन रहे बड़ा खतरा
सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, घाटी में अभी हाल-फिलहाल में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। संभव है कि ये सभी विदेशी आतंकी कई वर्षों से घाटी में कहीं पर छिपे हों। सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच न हो सकी हो। मौजूदा समय में जितने भी आतंकी सक्रिय हैं, वे जंगलों में छिपे बैठे हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी, आर्मी एवं अन्य एजेंसियां आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। इन आतंकियों को घाटी में किसी न किसी तरह की मदद तो मिल ही रही है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। सीमा पार के आतंकी संगठन, पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड आतंकी तैयार कर रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ही टारगेट किलिंग की वारदात को अंजाम दिया जाता है। ये आतंकी, पब्लिक के बीच ही अंडर ग्राउंड वर्कर बनकर काम करते हैं। इन पर पुलिस या आम जनता को शक नहीं होता, क्योंकि ये उनके बीच में ही रहते हैं।