बोफोर्स मामले पर आनंद शर्मा बोले- विपक्ष को बदनाम करने के लिए भाजपा ने उठाया मुद्दा
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13 साल बाद एक बार फिर से बोफोर्स मामले की जांच करने की मांग को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत पहुंच गई है। नए सबूतों के आधार पर जांच एजेंसी ने नए सिरे से जांच करने की मांग की है। इस मामले पर सुनवाई करने के लिए तीस हजारी कोर्ट ने 17 फरवरी की तारीख तय की है। 1 फरवरी को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आशु गर्ग के सामने सीबीआई ने दावा किया था कि उसके पास कुछ ऐसे दस्तावेज हैं जो इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण है।
इस केस ने विपक्ष में खलबली मचा दी है। इस मामले पर कांग्रेस के नेता और पूर्व वाणिज्य, उद्योग और कपड़ा मंत्री आनंद शर्मा का कहना है- यह कोई मुद्दा नहीं है। वो एक मरे हुए घोड़े को दौड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा इस राजनीतिक अभियान को विपक्ष को बदनाम करने के लिए चला रही है। जांच पूरी हो चुकी है। न्यायालय पहले ही अपना फैसला दे चुका है। अपनी असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए यह मोदी सरकार की रणनीति है।
इससे पहले सीबीआई ने बोफोर्स मामले में 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के केस बंद करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीबीआई ने ऐसा अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की उस सलाह के बाद किया है, जिसमें उन्होंने 13 साल पहले बंद मामले को फिर से शुरू करना सीबीआई की साख के लिए घातक बताया था। सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी प्रमुख माइकल हर्शमैन के नए खुलासों के बाद नए सिरे से जांच की अनुमति मांगी है।
It is non issue.They are flogging a dead horse. BJP has been carrying this political campaign to defame opposition. Investigation has been done, Judiciary has already given verdict. It is a tactic by Modi Govt to deflect attention from their failure: Anand Sharma,Congress #Bofors pic.twitter.com/vSQJ54oJQG
— ANI (@ANI) February 4, 2018