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AP: पूर्वोत्तर के बौद्ध स्थलों को जोड़ने की पहल, उपमुख्यमंत्री चौना कर रहे वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

Thu, 07 May 2026 02:55 PM IST
Riya Dubey पीटीआई, इटानगर
पीटीआई, इटानगर Published by: Riya Dubey Updated Thu, 07 May 2026 02:55 PM IST
सार

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख बौद्ध स्थलों को जोड़कर एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। तवांग में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने इस पहल को ‘तवांग इनिशिएटिव’ नाम देने की बात कही।

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An initiative to connect Buddhist sites in the Northeast, Deputy CM Chowna is preparing to get global recognit
अरुणाचल के उप मुख्यमंत्री चौना मीन व अन्य।

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने पूर्वोत्तर राज्यों के प्रमुख बौद्ध स्थलों को जोड़कर एक एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित करने की वकालत की। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध पर्यटन सर्किट को बढ़ावा देना है। उन्होंने इस पहल को वैश्विक पहचान देने के लिए इसे 'तवांग इनिशिएटिव' नाम देने का सुझाव दिया।
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पर्यवटन के विकास के लिए क्या जरूरी?

तवांग में आयोजित 'डेवलपमेंट ऑफ द बुद्धिस्ट सर्किट इन नॉर्थईस्ट इंडिया' कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के लिए पेशेवर और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इस प्रस्तावित सर्किट में अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम और मणिपुर के साथ-साथ पड़ोसी देशों के प्रमुख बौद्ध स्थलों को शामिल किया जाना चाहिए।
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तवांग क्यों है महत्वपूर्ण?

इस कार्यशाला में नेपाल, भूटान, श्रीलंका और भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तवांग आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां 400 वर्ष पुराना मठ स्थित है, यह छठे दलाई लामा की जन्मस्थली है और वर्तमान दलाई लामा से जुड़े ऐतिहासिक मार्ग का भी हिस्सा रहा है।
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उन्होंने दिरंग जोंग, थेम्बांग, पवित्र पेमाको क्षेत्र और खूबसूरत मेचुका घाटी जैसे विरासत स्थलों का भी उल्लेख किया, जिन्हें व्यापक बौद्ध और सांस्कृतिक पर्यटन नेटवर्क का आधार बनाया जा सकता है।

चौना मीन ने अरुणाचल प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य में 26 प्रमुख जनजातियां हैं, जिनकी अपनी अलग भाषा, पहनावा और परंपराएं हैं। साथ ही राज्य की समृद्ध जैव विविधता इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करती है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अपनी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए प्राचीन पांडुलिपियों, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और धार्मिक ग्रंथों का डिजिटलीकरण कर रही है, ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।


उपमुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष के अंत में अरुणाचल प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने वैश्विक हितधारकों से राज्य को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में साझेदारी करने का आह्वान किया।


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