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मोदी सरकार के रुख से एएमयू में मायूसी और आक्रोश
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Tue, 05 Apr 2016 03:00 AM IST
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एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर मोदी सरकार का रुख स्पष्ट होने के बाद कैंपस में मायूसी के साथ ही आक्रोश भी बढ़ रहा है। मोदी सरकार के उस फैसले को लेकर छात्रों में रोष है, जिसमें उसने यूपीए सरकार की उस याचिका को वापस लेने की बात कही है, जो हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। इस याचिका में एएएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहल की गई थी।
किसने क्या कहा
''इस प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रियों से बातचीत हो चुकी है। उन्हें इस संबंध में मांग पत्र सौंपा जा चुका है। मुझे उम्मीद है कि निकट भविष्य में केंद्र सरकार अपने रवैये को नरम करेगी और एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाये रखने में पूरी मदद करेगी।''
-परवेज सिददीकी, अध्यक्ष सर सैयद माइनारिटी फाउंडेशन
''जब शुरू से ही केंद्र सरकार इस मामले में पहल कर रही है तो फिर अब पीछे हटने का क्या मतलब है..? यूपीए सरकार ने अगर एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने के लिए पहल की थी तो मोदी सरकार को भी इसे आगे ले जाना चाहिए। सरकार बदलने के साथ रवैये बदलना सही नहीं है।''
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-शंहशाह खान, संयोजक एएमयू स्टूडेंट एक्शन कमेटी
''एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने के लिए जारी संघर्ष किसी एक बयान या किसी सरकार के एक कदम से खत्म नहीं होगा। मोदी सरकार का रवैया स्पष्ट होने के बाद अब नए सिरे से इस प्रकरण में पहल होगी। अल्पसंख्यक स्वरूप लेकर रहेंगे।''
-फहीम अख्तर, कोआर्डिनेटर एएमयू स्टूडेंट एक्शन कमेटी
''इंतजामिया अपने वकीलों के संपर्क में है। केंद्र सरकार के रुख से स्पष्ट है कि वह इस प्रकरण में आगे पैरवी नहीं करेगी। ऐसे में अब ये लड़ाई केवल एएमयू ही अपने दम पर लड़ेगी और यकीनन जीतेगी क्योंकि एएमयू की स्थापना सर सैयद की सरपरस्ती में प्रबुद्ध मुसलमानों ने अपने फंड से की है।''
राहत अबरार, जनसंपर्क सलाहकार
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किसने क्या कहा
''इस प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रियों से बातचीत हो चुकी है। उन्हें इस संबंध में मांग पत्र सौंपा जा चुका है। मुझे उम्मीद है कि निकट भविष्य में केंद्र सरकार अपने रवैये को नरम करेगी और एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाये रखने में पूरी मदद करेगी।''
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-परवेज सिददीकी, अध्यक्ष सर सैयद माइनारिटी फाउंडेशन
''जब शुरू से ही केंद्र सरकार इस मामले में पहल कर रही है तो फिर अब पीछे हटने का क्या मतलब है..? यूपीए सरकार ने अगर एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने के लिए पहल की थी तो मोदी सरकार को भी इसे आगे ले जाना चाहिए। सरकार बदलने के साथ रवैये बदलना सही नहीं है।''
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-शंहशाह खान, संयोजक एएमयू स्टूडेंट एक्शन कमेटी
''एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने के लिए जारी संघर्ष किसी एक बयान या किसी सरकार के एक कदम से खत्म नहीं होगा। मोदी सरकार का रवैया स्पष्ट होने के बाद अब नए सिरे से इस प्रकरण में पहल होगी। अल्पसंख्यक स्वरूप लेकर रहेंगे।''
-फहीम अख्तर, कोआर्डिनेटर एएमयू स्टूडेंट एक्शन कमेटी
''इंतजामिया अपने वकीलों के संपर्क में है। केंद्र सरकार के रुख से स्पष्ट है कि वह इस प्रकरण में आगे पैरवी नहीं करेगी। ऐसे में अब ये लड़ाई केवल एएमयू ही अपने दम पर लड़ेगी और यकीनन जीतेगी क्योंकि एएमयू की स्थापना सर सैयद की सरपरस्ती में प्रबुद्ध मुसलमानों ने अपने फंड से की है।''
राहत अबरार, जनसंपर्क सलाहकार