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BJP: महाराष्ट्र भाजपा की इस बैठक में पहुंचेंगे अमित शाह, विधानसभा चुनाव को लेकर तय होगी रणनीति
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Amit Shah
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए ने महाराष्ट्र में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन किया था, जबकि शरद पवार और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन ने काफी तोड़फोड़ के बाद भी बेहतर प्रदर्शन करने में सफलता पाई थी। वहीं, एमएलसी चुनावों में देवेंद्र फडणवीस की जादूगरी एक बार फिर चली और एनडीए खेमे ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि इंडिया गठबंधन को अपने विधायकों की बगावत के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। यही कारण है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों खेमों में कड़ी टक्कर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इसी बीच अजित पवार गुट के नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने शरद पवार से मुलाकात कर महाराष्ट्र की सियासत को गर्म कर दिया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि वे कभी भी पाला बदल कर सकते हैं। हालांकि पवार से मुलाकात के बाद भुजबल ने बताया है कि उनकी शरद पवार से मुलाकात एक सामान्य शिष्टाचार भेंट थी। हालांकि उन्होंने राज्य में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि वे (शरद पवार) महाराष्ट्र के बड़े नेता हैं और उन्हें आगे बढ़कर इस मुद्दे का हल निकालना चाहिए। हालांकि, महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार मानते हैं कि मामला इतना सीधा नहीं है और राज्य में कभी भी बड़ा उलटफेर हो सकता है।
राज्य के इन्हीं सियासी समीकरणों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र पहुंच रहे हैं। वे 21 जुलाई को महाराष्ट्र भाजपा की विस्तारित कार्यकारिणी में शामिल होंगे। इस दौरान राज्य से वाले पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता, प्रदेश और केंद्र सरकार के मंत्री और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में राज्य के वर्तमान समीकरणों को देखते हुए नई रणनीति बनाने पर विचार किया जा सकता है।
बढ़त को बरकरार रखने की चुनौती
भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती महाराष्ट्र में हासिल हुई बढ़त को बरकरार रखने की है। भाजपा यह संदेश नहीं देना चाहती है कि महाराष्ट्र में वह केवल शिवसेना (पुरानी स्थिति में) के सहयोग या सियासी उलटफेर के बाद ही सरकार बना सकती है। वह एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के साथ चुनाव में जीत हासिल कर यह संदेश देना चाहती है कि महाराष्ट्र में महायुती की सरकार बनना जनता की इच्छाओं के अनुसार हुआ था।
समन्वय की कठिनाई
लेकिन लोकसभा चुनावों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए पार्टी नेताओं ने माना था कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी के कारण महायुति गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने महायुती के सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बहुत कठिन कार्य माना जा रहा है। आने वाले समय में सीटों पर तालमेल न बैठाने की स्थिति में आपसी गतिरोध बढ़ सकता है। गठबंधन को इसका भी नुकसान हो सकता है।
हासिल करेंगे जीत- भाजपा
महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने अमर उजाला से बातचीत में दावा किया कि महायुती के सहयोगी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद तीनों प्रमुख दलों के नेताओं के बीच कई स्तर की बातचीत हुई थी। इसी तरह की एक बैठक संमुखानंद हॉल में हुई थी, जिसमें देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने हिस्सा लिया था। बैठक में आपसी समन्वय को बेहतर बनाने के लिए समन्वय समितियों के गठन पर बात हुई थी। ये समितियां काम कर रही हैं और सभी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भी संबंध बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है।
भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा ने कहा कि सभी सहयोगी दलों के नेताओं की बैठक में सीटों पर अंतिम तालमेल बिठा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता की भलाई के लिए राज्य में महायुति की सरकार बनाना आवश्यक है और इसलिए सीटों पर कोई मतभेद नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि महायुति के सभी दल आपसी तालमेल से चुनाव लड़ेंगे और बड़ी जीत हासिल करेंगे।