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शाह के पूर्वांचल दौरे से यूपी में 'मिशन-2019' की शुरुआत, मोदी की 14 को आजमगढ़ में रैली

Wed, 04 Jul 2018 02:22 AM IST
शशिधर पाठक/हरेन्द्र, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 02:22 AM IST
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Amit Shah to launch 'Mission-2019' in UP from Purvanchal visit, Narendra Modi rally in Azamgarh
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 जुलाई को दो दिन के उत्तर प्रदेश (उ.प्र.) के दौरे पर होंगे। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उ.प्र. में कील-कांटा दुरुस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। शाह के पास भाजपा का वारणसी मंडल है। यहां के राजनीतिक अभियान को वह खुद देखते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री की रैली के मद्देनजर अमित 4 जुलाई को शाह वाराणसी जा रहे हैं। वहां से वह मिर्जापुर जाएंगे। शाह की यात्रा का मकसद 2019 के चुनाव के बाबत पार्टी की जमीनी तैयारियों का फीडबैक लेने के साथ-साथ प्रधानमंत्री के आजमगढ़ में जनसभा को सफल बनाना भी है।
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वाराणसी से प्रधानमंत्री की जनसभा को काफी अहम माना जा रहा है। आजमगढ़ वैसे भी अल्पसंख्यक बाहुल क्षेत्र है। वाराणसी मंडल में आता है। पूर्वांचल में राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है। हाल में तीन क्षेत्र के संगठन मंत्री भी बदले गए हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष की योजना जमीनी स्तर पर तैयारियों का जायजा लेना, अभी तक हुए राजनीतिक प्रयासों का आकलन करना तथा संभावित तैयारियों की जमीन तैयार करना है।
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इसे केन्द्र में रखकर शाह ने पहले वाराणसी जाने फिर मिर्जापुर और इसके बाद आगरा से दिल्ली आने का कार्यक्रम है। शाह मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी का दर्शन करेंगे। विंध्याचल में स्थित मां विंध्यवासिनी की पूर्वी उ.प्र. और सेंट्रल यूपी में काफी मान्यता है। इसी समय वहां केन्द्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला समेत कुछ अन्य के भी होने की संभावना है। इस क्षेत्र में अन्य पिछड़ी जातियों की संख्या भी ठीक-ठाक है। वैसे भी शाह की कोशिश अन्य पिछड़ा वर्ग को भाजपा के साथ मजबूती से जोड़े रखने की है। इस बहाने शाह क्षेत्र की जनता में भी संदेश देंगे।
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भाजपा के पास उ.प्र. में 163 विस्तारक हैं। ये विस्तारक भाजपा के पूर्णकालिक सदस्य होते हैं और काफी अहम भूमिका निभाते हैं। समझा जा रहा है कि इस दौरान शाह विस्तारकों से क्षेत्रीय स्तर पर विधायकों, सांसदों के कामकाज को लेकर भी फीड बैक लेगें।

पन्ना प्रमुख, बूथ प्रबंधक

शाह का हमेशा से मानना रहा है कि जमीनी बदलाव कार्यकर्ता की सतर्कता से आता है। कार्यकर्ताओं से ही पार्टी के शीर्ष नेताओं को आत्मविश्वास मिलता है। इसलिए वह हमेशा से चुनाव में प्रचार से लेकर मतदान और जनता के बीच में कामकाज का संदेश लेकर जाने तक बूथ प्रबंधक और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता के हिमायती रहे हैं। माना जा रहा है कि वाराणसी, मिर्जापुर और आगरा की यात्रा के दौरान वह इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी समीक्षा करेंगे। आगे की तैयारियों की टिप्स देंगे। पार्टी के लोगों से 2019 को केन्द्र में रखकर प्रयासों में तेजी लाने की अपील करेंगे। शाह राजनीति में हर विकल्प को अपनाने से नहीं चूकते और उनकी यह तैयारी 2019 में मिलने वाली संभावित चुनौती के आधार होगी। 

कठिन है 2019 की चुनौती

Amit Shah to launch 'Mission-2019' in UP from Purvanchal visit, Narendra Modi rally in Azamgarh
अमित शाह
वाराणसी और ब्रज क्षेत्र

वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। भाजपा की नाक का सवाल भी। इसलिए वाराणसी को लगातार अहमियत मिल रही है। वैसे भी यहां का राजनीतिक अभियान भाजपा अध्यक्ष शाह की देख-रेख में होता है। रेल राज्यमंत्री और केन्द्रीय दूर संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा क्षेत्रीय विकास के लिए प्रयासरत रहते हैं। महेन्द्र नाथ पांडे को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाने के बाद पार्टी ने काफी कुछ साधा है।

इसी को ध्यान में रखकर शाह अवध, काशी और गोरखपुर प्रांत के नेताओं, कार्यकताओं के साथ बैठक करेंगे। गोरखपुर प्रांत का राजनीतिक अभियान उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देख रेख में आगे बढ़ रहा है। इस तरह यह राजनीतिक होमवर्क का दौरा है। इसमें आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर लालपुरा में 2000-2500 आईटी वॉलेंटियर्स के साथ संवाद की भी योजना है। ताकि सोशल मीडिया का बेहतर प्रयोग किया जा सके। इसी तरह की स्थिति ब्रज क्षेत्र की समीक्षा के दौरान भी रहेगी।

कठिन है 2019 की चुनौती

केन्द्र सरकार के चार साल पूरा होने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने स्वीकार किया था कि 2019 को लेकर कुछ चुनौतियां हैं। कुछ कमियां रह गई हैं। उन्होंने कहा था कि अभी चुनाव होने में एक साल का समय है और तब तक भाजपा इन कमियों को दूर कर लेगी। पार्टी के एक केन्द्रीय राज्यमंत्री का भी मानना है कि 2014 की तुलना में हालात में कुछ चुनौतीपूर्ण बदलाव आया है। हालांकि सूत्र का कहना है कि नवंबर-दिसंबर के बाद हालात में तेजी से सकारात्मक बदलाव आने लगेगा।

एजेंसियों के सर्वेक्षण में 2014 के मुकाबले भाजपा और प्रधानमंत्री का ग्राफ कुछ प्रभावित होने के संकेत हैं। ऐसे में पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि समय रहते सही प्रयास करके 2019 से पहले सबकुछ ठीक किया जा सकता है। 2014 में भाजपा को 80 में से 73 और विधानसभा चुनाव 2017 में 325 सीटें मिली थी। भाजपा की योजना राज्य में इस राजनीतिक दबदबे को बनाए रखने की है।

आजमगढ़ में प्रधानमंत्री

पूर्वांचल में आजमगढ़ यादव, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय की अच्छी खासी संख्या के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री की जुलाई के दूसरे सप्ताह में जनसभा प्रस्तावित है। इसे सफल बनाने के लिए भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए दो दर्जन सांसद, दर्जनों विधायक, पार्टी के कार्यकर्ता और संघ सक्रिय है। यहां तक कि केन्द्रीय मंत्री और राज्य सरकार के मंत्री भी इसे सफल बनाने में सक्रिय हैं।

2014 में आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़कर जीते थे। इसलिए इसकी अपनी अहमियत है। ऐसे में प्रधानमंत्री का वहां जाना, जनसभा को संबोधित करना पूर्वी उ.प्र. के करीब आधा दर्जन जनपदों में भाजपा के राजनीतिक अभियान के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। वैसे भी प्रधानमंत्री इस क्षेत्र का दौरा मगहर में संत कबीर दास जी की समाधि पर चादर चढ़ाने के बाद हो रहा है।
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