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Amit Shah: 'अब आपदा में राहत नहीं, बचाव को प्राथमिकता', गृह मंत्री शाह बोले- सरकार की नीति से बची हजारों जानें

Wed, 20 Aug 2025 01:41 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 20 Aug 2025 01:41 AM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन को राहत नहीं, बल्कि बचाव केंद्रित बनाया है। उन्होंने बताया कि सरकार की रणनीति चार स्तंभों – क्षमता निर्माण, गति, कुशलता और सटीकता पर आधारित है, जिससे चक्रवातों से होने वाली जनहानि में 98% की कमी आई है। 

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Amit Shah Said Modi govt has rescue centric approach to handle disasters News In Hindi
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को आपदा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन में राहत केंद्रित नीति की जगह बचाव केंद्रित नीति अपनाई है, जिससे जनहानि और नुकसान में भारी कमी आई है। ये बात शाह गृह मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में बोल रहे थे, जिसका विषय था आपदा प्रबंधन और क्षमता निर्माण। इस दौरान शाह ने य भी कहा कि बीते 10 वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नीतिगत और संस्थागत फैसले लिए गए हैं।

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शाह बोले- सरकार की नीति चार स्तंभों पर है आधारित
गृह मंत्री ने बताया कि मोदी सरकार की आपदा प्रतिक्रिया नीति चार स्तंभों पर आधारित है। इसमें क्षमता निर्माण, गति, कुशलता और सटीकता पर मुख्य तौर पर फोकस किया गया है। इसका असर हाल की कई आपदाओं में देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि जहां 1999 में ओडिशा के सुपर साइक्लोन में 10,000 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2023 में गुजरात में बिपरजॉय और 2024 में ओडिशा में डाना साइक्लोन के दौरान कोई जनहानि नहीं हुई।
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साथ ही अमित शाह ने ये भी बताया कि 2014 से पहले आपदा प्रबंधन राहत केंद्रित था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे बचाव केंद्रित बनाया। इसके चलते चक्रवातों से होने वाले नुकसान में 98% की कमी और लू से होने वाली मौतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
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वित्तीय और संरचनात्मक मजबूती पर जोर
शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखा है, जिसमें वित्तीय, संस्थागत और ढांचागत सुधार किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिला और ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों में आपदा से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है।


शाह ने फंड में बढ़ोतरी पर भी दिया जोर
गृह मंत्री ने बताया कि 2004 से 2014 के बीच एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को ₹66,000 करोड़ दिए गए थे। जबकि 2014 से 2024 के बीच यह राशि लगभग तीन गुना बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ कर दी गई। 2021-22 से 2025-26 के बीच ₹1,28,122 करोड़ एसडीआरएफ और ₹54,770 करोड़ एनडीआरएफ को आवंटित किए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष (एनडीएमएफ) के लिए ₹13,693 करोड़ और राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (एसडीएसएफ) के लिए ₹32,031 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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दस सूत्रीय एजेंडे पर आधारित कानून
शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के 10 सूत्रीय एजेंडे के आधार पर 2024 में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक लाया गया, जिसे पारदर्शिता, जिम्मेदारी, कुशलता और समन्वय के साथ लागू किया गया। उन्होंने हाल ही में देश के कुछ हिस्सों में हुई बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि सरकार ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए रणनीति बना रही है।

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