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Nano DAP Plant: गुजरात में 'दुनिया के पहले' प्लांट का शाह ने किया उद्घाटन, प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
Tue, 24 Oct 2023 07:49 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 24 Oct 2023 07:49 PM IST
सार
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। शाह ने कहा, नैनो यूरिया किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को फसल के कम उत्पादन की आशंका से भी नहीं जूझना पड़ेगा।
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गांधीनगर के कलोल में प्लांट का निरीक्षण करते सहकारिता मंत्री शाह, उद्घाटन के बाद किसानों को संबोधन
- फोटो : Amit Shah Twitter
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विस्तार
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के कलोल में नैनो डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट तरल) विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। इसका निर्माण भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) के कलोल परिसर में किया गया है। उन्होंने इस मौके पर किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। शाह ने कहा, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों को उत्पादन से समझौता किए बिना प्राकृतिक खेती अपनाने में मदद करेगा।
गांधीनगर दौरे पर पहुंचे अमित शाह के संबोधन के बाद मंगलवार को इफको ने बताया कि कलोल में नैनो डीएपी बनाने के लिए लगा प्लांट दुनिया का पहला ऐसा संयंत्र है। इफको के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला संयंत्र है जो पारंपरिक डीएपी के एक बैग के बराबर 500 मिलीलीटर इफको नैनो डीएपी (तरल) बोतलों का उत्पादन करेगा। इसमें कहा गया है कि संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन दो लाख बोतलें बनाने की होगी।
प्लांट के उद्घाटन के बाद किसानों से मुखातिब केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री शाह ने कहा, "आज से 10 साल बाद जब कृषि के क्षेत्र में सबसे बड़े प्रयोगों की सूची तैयार की जाएगी, तो मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि इफको के नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसमें जगह मिलेगी।" केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय की मांग है कि यूरिया का उपयोग कम किया जाए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ाया जाए।
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शाह के अलावा केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया भी समारोह में मौजूद रहे। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए प्लांट का निरीक्षण कर शाह ने वहां के अधिकारियों से बारीकियों की जानकारी भी ली। अपने संबोधन में शाह ने किसानों से कहा, "अगर आप तीन साल (ऐसी खेती के लिए मिट्टी तैयार करने के लिए आवश्यक अवधि) तक उत्पादन कम किए बिना प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करें।"
उन्होंने कहा, नैनो यूरिया जमीन में नहीं समाता है, और इसलिए यह केंचुओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है, जो प्राकृतिक कृषि प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शाह ने कहा कि किसान कुछ वर्षों तक नैनो यूरिया के साथ प्रयोग जारी रख सकते हैं, जब तक जमीन प्राकृतिक खेती के लिए प्रमाणित न हो जाए। उन्होंने किसानों से दानेदार यूरिया और डीएपी के बजाय इन उर्वरकों के अधिक कुशल तरल रूपों पर स्विच करने का आग्रह किया। गृह मंत्री ने कहा कि दानेदार यूरिया का उपयोग न केवल फसलों को बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पहले की तमाम सरकारों ने वर्षों तक किसानों और खेती दोनों की अनदेखी की। शाह ने पीएम मोदी के कार्यकाल में किसानों के हित में कई फैसले लेने का दावा करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया कि जब COVID-19 महामारी के बाद उर्वरक की लागत में वृद्धि हुई, तो इसका बोझ किसानों पर नहीं डाला जाए। इसका परिणाम यह हुआ कि उर्वरक पर जो सब्सिडी 2013-14 में 73,000 करोड़ रुपये थी, अब ये राशि बढ़कर 2.55 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। इसका भुगतान सरकार ने किया।"
प्लांट के उद्घाटन से पहले शाह ने अपने लोकसभा क्षेत्र गांधीनगर के मनसा में एक खेल परिसर का भूमि पूजन भी किया। गुजरात खेल विभाग और सर्वोदय हायर एजुकेशन सोसायटी की संयुक्त पहल के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि अत्याधुनिक खेल परिसर में एक इनडोर बहुउद्देश्यीय हॉल, 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान और दो टेनिस कोर्ट होंगे। शाह ने मानसा में अपनी मां की स्मृति में संचालित 'कुसुम बा अन्न क्षेत्र' में स्थानीय लोगों के साथ दोपहर के भोजन का लुत्फ भी उठाया।
कलोल में नैनो डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट तरल) विनिर्माण संयंत्र के बारे में इफको ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार, इफको नैनो डीएपी (तरल) की शुरुआत हुई। ये परियोजना भारत के कृषि उद्योग को मौलिक रूप से बदल देगी। इससे किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी। उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा। बयान के अनुसार, फरवरी 2021 में मोदी ने नैनो यूरिया के उत्पादन को मंजूरी दी। 2023 तक देश में लगभग 17 करोड़ नैनो यूरिया बोतलों के उत्पादन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित हो गया। अगस्त 2021 में नैनो यूरिया बनाने की शुरुआत हुई। मार्च 2023 तक लगभग 6.3 करोड़ बोतलों का उत्पादन हुआ।
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गांधीनगर दौरे पर पहुंचे अमित शाह के संबोधन के बाद मंगलवार को इफको ने बताया कि कलोल में नैनो डीएपी बनाने के लिए लगा प्लांट दुनिया का पहला ऐसा संयंत्र है। इफको के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला संयंत्र है जो पारंपरिक डीएपी के एक बैग के बराबर 500 मिलीलीटर इफको नैनो डीएपी (तरल) बोतलों का उत्पादन करेगा। इसमें कहा गया है कि संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन दो लाख बोतलें बनाने की होगी।
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प्लांट के उद्घाटन के बाद किसानों से मुखातिब केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री शाह ने कहा, "आज से 10 साल बाद जब कृषि के क्षेत्र में सबसे बड़े प्रयोगों की सूची तैयार की जाएगी, तो मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि इफको के नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसमें जगह मिलेगी।" केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय की मांग है कि यूरिया का उपयोग कम किया जाए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ाया जाए।
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शाह के अलावा केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया भी समारोह में मौजूद रहे। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए प्लांट का निरीक्षण कर शाह ने वहां के अधिकारियों से बारीकियों की जानकारी भी ली। अपने संबोधन में शाह ने किसानों से कहा, "अगर आप तीन साल (ऐसी खेती के लिए मिट्टी तैयार करने के लिए आवश्यक अवधि) तक उत्पादन कम किए बिना प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करें।"
#WATCH | Gujarat: Union Home Minister Amit Shah inspects the premises of the Liquid Nano Di-Ammonia Phosphate (DAP) plant established by IFFCO, in Kalol, Gandhinagar. pic.twitter.com/GVTkE8LpXr
— ANI (@ANI) October 24, 2023
उन्होंने कहा, नैनो यूरिया जमीन में नहीं समाता है, और इसलिए यह केंचुओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है, जो प्राकृतिक कृषि प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शाह ने कहा कि किसान कुछ वर्षों तक नैनो यूरिया के साथ प्रयोग जारी रख सकते हैं, जब तक जमीन प्राकृतिक खेती के लिए प्रमाणित न हो जाए। उन्होंने किसानों से दानेदार यूरिया और डीएपी के बजाय इन उर्वरकों के अधिक कुशल तरल रूपों पर स्विच करने का आग्रह किया। गृह मंत्री ने कहा कि दानेदार यूरिया का उपयोग न केवल फसलों को बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पहले की तमाम सरकारों ने वर्षों तक किसानों और खेती दोनों की अनदेखी की। शाह ने पीएम मोदी के कार्यकाल में किसानों के हित में कई फैसले लेने का दावा करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया कि जब COVID-19 महामारी के बाद उर्वरक की लागत में वृद्धि हुई, तो इसका बोझ किसानों पर नहीं डाला जाए। इसका परिणाम यह हुआ कि उर्वरक पर जो सब्सिडी 2013-14 में 73,000 करोड़ रुपये थी, अब ये राशि बढ़कर 2.55 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। इसका भुगतान सरकार ने किया।"
प्लांट के उद्घाटन से पहले शाह ने अपने लोकसभा क्षेत्र गांधीनगर के मनसा में एक खेल परिसर का भूमि पूजन भी किया। गुजरात खेल विभाग और सर्वोदय हायर एजुकेशन सोसायटी की संयुक्त पहल के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि अत्याधुनिक खेल परिसर में एक इनडोर बहुउद्देश्यीय हॉल, 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान और दो टेनिस कोर्ट होंगे। शाह ने मानसा में अपनी मां की स्मृति में संचालित 'कुसुम बा अन्न क्षेत्र' में स्थानीय लोगों के साथ दोपहर के भोजन का लुत्फ भी उठाया।
Correction: Union Home Minister Amit Shah had lunch at the 'Kusumba Anna Kshetra' today, which is run in memory of his mother, in Mansa village, Gujarat. pic.twitter.com/NyahbQx42L
— ANI (@ANI) October 24, 2023
कलोल में नैनो डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट तरल) विनिर्माण संयंत्र के बारे में इफको ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार, इफको नैनो डीएपी (तरल) की शुरुआत हुई। ये परियोजना भारत के कृषि उद्योग को मौलिक रूप से बदल देगी। इससे किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी। उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा। बयान के अनुसार, फरवरी 2021 में मोदी ने नैनो यूरिया के उत्पादन को मंजूरी दी। 2023 तक देश में लगभग 17 करोड़ नैनो यूरिया बोतलों के उत्पादन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित हो गया। अगस्त 2021 में नैनो यूरिया बनाने की शुरुआत हुई। मार्च 2023 तक लगभग 6.3 करोड़ बोतलों का उत्पादन हुआ।