केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक ऐसे वक्त हुई, जब कुछ दिन पहले ही सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के जंगलों में 31 नक्सलियों को मार गिराया था। नक्सलवाद के खतरे से प्रभावित राज्यों में छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं। बैठक में नक्सल विरोधी अभियानों और प्रभावित क्षेत्रों में की गई विकास पहलों पर चर्चा की गई।
Amit Shah: नक्सल प्रभावित राज्यों को लेकर अहम बैठक, अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों संग बनाई खास रणनीति
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा बल अब नक्सलियों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई के बजाय आक्रामक अभियान चला रहे हैं। नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार के कारण पिछले लोकसभा चुनाव में 70 प्रतिशत तक मतदान हुआ। इससे पहले इस क्षेत्र में एक भी मत नहीं पड़ा था।
नक्सली हिंसा में 72 फीसदी की कमी आई
अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की रणनीति के कारण नक्सली हिंसा में 72 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा 2010 की तुलना में 2023 में नक्सली हमले में मरने वालों की संख्या भी 86 फीसदी तक कम हुई है। ऐसे में नक्सली अब अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं।
2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह से जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध
इससे पहले गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार मार्च, 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार नक्सलवाद से प्रभावित राज्य सरकारों को इस खतरे से लड़ने में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
ऐसे चल रहा अभियान
- 2024 में अब तक 230 से अधिक नक्सलवादियों का सफाया किया जा चुका है।
- 723 नक्सलवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
- 812 को गिरफ्तार किया गया है।
- नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या अब सिर्फ 38 रह गई है।
- राज्यों के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए सड़क और मोबाइल संपर्क को बढ़ावा दिया जा रहा
- नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब तक कुल 14,400 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गई हैं
- ऐसे इलाकों में लगभग 6,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
अमित शाह ने कही यह बात
शाह से मिले रेवंत रेड्डी, बाढ़ प्रभावित तेलंगाना के लिए मांगे 11,713 करोड़ रुपये
रेड्डी ने शाह को बताया कि केंद्रीय टीम ने राज्य का दौरा किया और 30 सितंबर को सौंपी रिपोर्ट में 11,713 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। वर्तमान में उपलब्ध धनराशि नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है और उन्होंने इन निधियों को तत्काल जारी करने का आग्रह किया। रेड्डी ने यह भी कहा कि केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए तेलंगाना के लिए एसडीआरएफ की पहली और दूसरी किस्त के तहत 416.80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि मरम्मत कार्य के लिए दिए जाने वाले पैसे को एसडीआरएफ आवंटन से न जोड़ा जाए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस वित्तीय वर्ष के लिए एसडीआरएफ फंड का पूरा उपयोग किया जाएगा।
बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा बल अब नक्सलियों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई के बजाय आक्रामक अभियान चला रहे हैं। नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार के कारण पिछले लोकसभा चुनाव में 70 प्रतिशत तक मतदान हुआ। इससे पहले इस क्षेत्र में एक भी मत नहीं पड़ा था।
उन्होंने नक्सलियों को विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताया। शाह ने कहा कि वे मानवाधिकार के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं, जो आठ करोड़ से अधिक लोगों को विकास और बुनियादी कल्याण के अवसरों से वंचित कर रहे हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हाल ही में हुई भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे की मरम्मत और बहाली के लिए राज्य को तुरंत 11,713 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया। रेड्डी ने शाह से मिलकर बताया कि 31 अगस्त से 8 सितंबर तक हुई भारी बारिश ने तेलंगाना को बुरी तरह प्रभावित किया है। 37 लोगों की जान चली गई और एक लाख से अधिक पशुधन व अन्य जानवर मारे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा 4.15 लाख एकड़ में फैली फसलें, सड़कें, पुलिया, तालाब और नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। उन्होंने गृह मंत्री को बताया कि राज्य ने पहले ही बहाली और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है।