कोरोना से ऐतिहासिक इमारतों में पसरा सन्नाटा, आजादी के बाद दूसरी बार बंद हुआ ताजमहल
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कोरोना वायरस से देश की चमचमाती और पर्यटकों से भरी ऐतिहासिक इमारतों में अब एकांत पसरा है। महामारी ने कई भवनों और स्मारकों की उन्मादी ऊर्जा को एक भयंकर शांति में तब्दील कर दिया है।
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कोरोना वायरस से देश की चमचमाती और पर्यटकों से भरी ऐतिहासिक इमारतों में अब एकांत पसरा है। महामारी ने कई भवनों और स्मारकों की उन्मादी ऊर्जा को एक भयंकर शांति में तब्दील कर दिया है।
17 मार्च के दिन घरेलू और विदेशी पर्यटक भौंचक्के रह गए जब दुनिया के पहले अजूबे ताजमहल में जाने नहीं दिया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कोरोना महामारी के मद्देनजर देश के स्मारकों औक ऐतिहासिक इमारतों को बंद करने का फैसला लिया था। आजाद भारत में ऐसा दूसरी बार हुआ था जब ताजमहल को पर्यटकों के लिए बंद किया गया हो, इससे पहले 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय ताजमहल बंद किया गया था।
कोरोना वायरस की वजह से देश के पर्यटन और पर्यटन इंडस्ट्री पर गहरा असर पड़ा है। पर्यटन के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र हैं। घरेलू पर्यटन उद्योग में उत्तर प्रदेश का 15.4 फीसद योगदान होता है तो वहीं 2018 में कुल अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का एक चौथाई हिस्सा महाराष्ट्र में आया था।
भागती मुंबई में चहलकदमी बंद
मुंबई के एक पर्यटक कंपनी के मालिक सुहास चतकारा का कहना है कि कोरोना वायरस के चलते उन्होंने अब तक 40-50 लाख रुपये की कुल बुकिंग रद्द कर दी हैं। ये अप्रैल और मई के महीने की है, गर्मियों की छुट्टियों में लोग अकसर घूमने की योजना बनाते थे। इस बीच स्कूल और कॉलेज भी बंद रहते हैं इसलिए बुकिंग को बहुत नुकसान हुआ है।
एक से दो साल में सामान्य होंगे हालात
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के प्रणब सरकार का कहना है कि कोरोना के कहर की वजह से मार्च तक कोई नई बुकिंग नहीं हुई है। पर्यटन उद्योग को सामान्य करने में कम से कम एक से दो साल आसानी से लग जाएंगे।