फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Amid lockdown two persons take initiative to save 100-year-old Baobab tree in Vadodara

लॉकडाउन के बीच, दो प्रकृति दूतों ने 100 साल पुराने बाओबाब पेड़ को बचाने की मुहिम की

Fri, 15 May 2020 08:13 AM IST
अनवर अंसारी एएनआई, वडोदरा
एएनआई, वडोदरा Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 15 May 2020 08:13 AM IST
सार

  • लॉकडाउन के बीच बाओबाब पेड़ को बचाने में जुटे दो लोग
  • 100 साल पुराना है पेड़
  • पेड़ को संक्रमण से बचाने के लिए लेप लगाया गया है

विज्ञापन
Amid lockdown two persons take initiative to save 100-year-old Baobab tree in Vadodara
पेड़ को बचाने में लगे जितेंद्र गवली - फोटो : ANI

विस्तार

वडोदरा में दो लोगों ने मिलकर एक 100 साल पुराने बाओबाब (गोरक्षी) पेड़ को बचाने की पहल की है। देश में कोरोना वायरस के प्रसार को काबू करने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लागू किया हुआ है। इसके बावजूद भी इन लोगों ने प्रकृति के देव दूत बनकर पेड़ को बचाने का प्रण लिया है। 

विज्ञापन


क्मयुनिटी साइंस सेंटर के निदेशक डॉ जितेंद्र गवली ने कहा कि बाओबाब पेड़ मुख्य रूप से अफ्रीका में पाए जाते हैं। अफ्रीका में इस पेड़ की नौ प्रजातियां, जिनमें से एक प्रजाति मध्यप्रदेश और गुजरात में पाई जाती है। 
विज्ञापन



उन्होंने कहा कि हाल ही में, संक्रमण की वजह से इस पेड़ का एक हिस्सा टूट कर गिर गया था। 100 साल पुराने इस पेड़ में संक्रमण को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए, संक्रमित हिस्से पर एक लेप लगाया गया था। इस लेप को बगीचे की मिट्टी, नीम के तेल और पानी के मिश्रण से तैयार किया गया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पेड़ को बचाने की मुहिम में जुटे हितार्थ पांड्या ने कहा कि बढ़ते तापमान की वजह से पेड़ पर लेप लगाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि हम जानते है कि कोरोना वायरस के कारण घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। हालांकि, तापमान में बढ़ोतरी की वजह से बाओबाब पेड़ को बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 

बता दें कि बाओबाब को हिंदी में गोरक्षी कहा जाता है। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 30 मीटर और चौड़ाई लगभग 11 मीटर होती है। इस पेड़ की बनावट बहुत ही अजीब होती है, क्योंकि इसे देखने से ऐसा लगता है जैसे इनकी जड़े ऊपर और तना नीचे है।


बाओबाब में केवल साल के छह महीने की पत्ते लगे रहते हैं। इसे लोग कई नाम से बुलाते हैं, जिनमें बोआब, बोआबोआ, बोतल पेड़ और उल्टा पेड़ मशहूर है। हालांकि, इसे अरबी में 'बु-हिबाब' कहते हैं जिसका अर्थ होता हहै 'कई बीजों वाला पेड़'। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed