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मानव अधिकारों का हनन: म्यांमार का बहिष्कार चाहता है अमेरिका, जबकि चीन बढ़ा रहा है समर्थन
Thu, 30 Dec 2021 10:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, यंगून
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, यंगून
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 30 Dec 2021 10:02 PM IST
सार
पिछले दिनों बीबीसी ने म्यांमार में अज्ञात लोगों की कब्र मिलने की खबर दी थी। इस हफ्ते बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सेव द चिल्ड्रेन ने बताया कि म्यांमार की हिंसा में उसके दो कार्यकर्ता मारे गए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Twitter
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विस्तार
एक तरफ म्यांमार में मानव अधिकारों का हनन लगातार जारी रहने की खबर है, दूसरी तरफ ये देश अमेरिका और चीन की होड़ का केंद्र बनता जा रहा है। पिछले दिनों बीबीसी ने म्यांमार में अज्ञात लोगों की कब्र मिलने की खबर दी थी। इस हफ्ते बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सेव द चिल्ड्रेन ने बताया कि म्यांमार की हिंसा में उसके दो कार्यकर्ता मारे गए हैं।
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इन खबरों के बाद अमेरिका ने म्यांमार को हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की अपील फिर से दोहराई। जबकि इसके ठीक पहले ये खबर आई थी कि चीन ने म्यांमार के सैनिक शासकों को एक पनडुब्बी मुहैया कराई है।
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सेव द चिल्ड्रेन की तरफ से उसके दो कार्यकर्ताओं की मौत की पुष्टि होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकने ने कहा- ‘निर्दोष लोगों और मानवीय सहायताकर्मियों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। सेना जिस तरह व्यापक रूप से म्यांमार की जनता पर अत्याचार कर रही है, उससे उसके सदस्यों को तुरंत जवाबदेह ठहराए जाने की जरूरत स्पष्ट हुई है।’ ब्लिंकेन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को म्यांमार में अत्याचार रोकने के लिए और अधिक कदम उठाने चाहिए। म्यांमार की सेना को हथियारों और दोहरे इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए। दोहरे इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी से मतलब वैसी तकनीक से है, जिसका सैनिक और असैनिक दोनों मकसदों से उपयोग हो सकता है।
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सैनिक शासन के खिलाफ लड़ रहे गुटों ने दावा किया है कि उन्हें 30 शव जली हुई अवस्था में मिले। उनमें महिलाओं और बच्चों के शव भी थे। ये शव कायाह हाईवे पर मिले, जहां लोकतंत्र समर्थक गुट लड़ाई लड़ रहे हैं। मानव अधिकार संगठनों के मुताबिक म्यांमार में इस साल फरवरी में सैनिक तख्ता पलट के बाद से सेना की कार्रवाई में 1,300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर म्यांमार के सैनिक शासकों को रूस और चीन का साथ मिलता रहा है। इन दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सैनिक शासन के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को वीटो कर दिया है।
चीन ने सैनिक शासन के प्रति अतिरिक्त समर्थन दिखाते हुए पिछले हफ्ते उसे एक पनडुब्बी सौंपी। ये पनडुब्बी में यंगून में हुए एक विशेष समारोह के दौरान सैनिक तानाशाह जनरल मिन आंग हलायंग को सौंपी गई। इस समारोह का आयोजन म्यांमार की नौ सेना के 74वें स्थापना दिवस के मौके पर हुआ था।
चीन के इस रुख के प्रति म्यांमार के लोकतंत्र समर्थक गुटों में उसके प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उधर सैनिक शासन के सूत्रों का कहना है कि इस पनडुब्बी की खरीद का सौदा पिछले साल ही हुआ था। यानी ये सौदा तत्कालीन असैनिक सरकार ने किया था। चीन ने उस सौदे के तहत इस पनडुब्बी की अब डिलीवरी की है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि सैनिक तख्ता पलट के बाद जब म्यांमार में सूरत बुनियादी रूप से बदल गई, तब चीन पनडुब्बी की डिलीवरी रोक सकता था। लेकिन उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भावना का उल्लंघन करते हुए सैनिक शासकों की मदद करने का फैसला किया है।