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'भारत की कठपुतली बना अमेरिका' 

Thu, 09 Jun 2016 03:18 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 09 Jun 2016 03:18 PM IST
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'America becomes puppet of India'
नरेंद्र मोदी बराक ओबामा

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों की चर्चा भारतीय मीडिया में तो है ही, पाकिस्तानी मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा है। नरेंद्र मोदी अपनी ताजा विदेश यात्रा में अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, अमेरिका के बाद मेक्सिको गए जहां से स्वदेश रवाना भी हो गए हैं।

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पाकिस्तानी मीडिया में इस यात्रा को लेकर गहरी दिलचस्पी है। मीडिया के एक हिस्से में जहां इसे पाकिस्तान को घेरने की भारतीय कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है, टीवी चैनलों पर आने वाले कई विश्लेषक नवाज शरीफ सरकार से कह रहे हैं कि वो भारतीय कोशिशों के जवाब में कदम उठाए। साथ ही पाकिस्तान में इस पर भी कयास लग रहे हैं कि क्या भारत अमेरिका, फ्रांस जैसे देशों की मदद और चीन, पाकिस्तान के विरोध के बावजूद न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में शामिल हो पाएगा और अगर ऐसा होता है तो इसका पूरे क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा।
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पाकिस्तान के 'जंग' अखबार के पहले पन्ने पर एनएसजी सदस्यता पर भारत को अमेरिका के समर्थन की खबर है। साथ ही ओबामा और मोदी की तस्वीर भी पहले पन्ने पर छपी है। अखबार 'डेली टाइम्स' में खबर है कि पाकिस्तान ने भी एनएसजी का सदस्य बनने के लिए लॉबी करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने अपने संपादकीय में लिखा है कि एक तरफ अमेर‌िका ने साफ किया है कि वो एनएसजी में केवल भारत को सदस्यता दिलाने का इच्छुक है और वैश्विक परमाणु व्यवस्था में इस “असमान व्यवहार” का पाकिस्तान पर पड़ने वाले असर को नकारा जा रहा है।
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‘डॉन’ के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच समझौते से भारत को परमाणु ईंधन को सैन्य इस्तेमाल के लिए इकट्ठा करने में पाकिस्तान पर बढ़त हासिल हो सकती है। अखबार कहता है कि एनएसजी में भारत के शामिल होने में अभी वक्त बाकी है, साथ ही ओबामा और मोदी के बीच बातचीत के बाद कोई बड़ी घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन “पाकिस्तानी नीति निर्माताओं की ये कोशिश जरूर करनी चाहिए कि पाकिस्तान के साथ असमान व्यवहार के बाद ऐसा न हो कि ये देश कोई अविवेकी नीति चुने।” अखबार के मुताबिक पाकिस्तान की दीर्घकालिक जरूरतों के लिए “ज्यादा से ज्यादा परमाणु हथियार- बड़े और छोटे, जवाब नहीं हैं, बल्कि जरूरत है क्षेत्रीय सहयोग की।” 

चीन के समक्ष एक नई शक्ति खड़ी करना चाहता है अमेरिका

'America becomes puppet of India'
राष्ट्रपति ओबामा

अखबार 'द न्यूज़' ने संपादकीय में लिखा है एक व्यक्ति जिसे गुजरात में मुसलमानों की हत्या में उनकी भूमिका के लिए अमेरिका में प्रवेश से मना कर दिया था, आज अमेरिका के राष्ट्रपति, अमेरिकी कांग्रेस के ज्यादातर लोग उनके साथ हैं।

अखबार लिखता है, “इसका कारण ये है कि अमेरिका चीन के समक्ष एक नई शक्ति खड़ा करना चाहता है। भारत के साथ संबंधों के लिए अमेरिकी पाखंड भी जिम्मेदार है। ये आश्चर्य की बात है कि कैसे एक धार्मिक फासीवाद का स्वागत किया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि वो व्यापार को लेकर उदार है। जिस व्यक्ति को सामान्य ढंग से लिए जाना चाहिए था, उसका स्वागत किया जा रहा है।” 

अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' लिखता है, अमेरिका के लिए भारत परमाणु कार्यक्रम के नागरिक इस्तेमाल और सैन्य हथियारों के मामले में बड़ा बाजार है जिस कारण से अमेरिका भारत का समर्थन कर रहा है कि वो एनएसजी का सदस्य बनें।

ट्विटर पर पाकिस्तानी पत्रकार मोइद पीरजादा लिखते हैं, “चीन के डर के कारण अमेरिका भारतीय रणनीतिक की कठपुतली बन गया है। वाशिंगटन, जाग जाओ।”

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