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अमर उजाला का ताज बरकरार, फिर बना उत्तरप्रदेश का नंबर वन अखबार
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल
Updated Thu, 13 Apr 2017 08:48 PM IST
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पाठकों के प्रेम और विश्वास ने एक बार फिर अमर उजाला को उत्तरप्रदेश का सिरमौर अखबार बना दिया है। राजनीतिक महत्व और जनसंख्या के हिसाब से देश के इस सबसे बड़े राज्य ने एक बार फिर अमर उजाला के सिर पर सबसे ज्यादा प्रसार संख्या वाले अखबार का ताज रख दिया है।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के ताजातरीन आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से दिसंबर, 2016 के दौरान आपके प्रिय अखबार की प्रसार संख्या केवल उत्तरप्रदेश में ही 22 लाख 57 हजार तक जा पहुंची है। इसमें 2 लाख 88 हजार वेरियंट प्रतियां भी शामिल हैं। अमर उजाला का निकटतम प्रतिद्वंदी दैनिक जागरण 21 लाख 95 हजार प्रतियों के साथ उससे काफी पीछे है।
टुंडे कबाब के शहर लखनऊ ने भी एक बार फिर अमर उजाला को ही अपना नवाब घोषित किया है। लखनऊ सिटी में अमर उजाला ने 1 लाख 96 हजार प्रतियों के साथ नंबर वन का सिंहासन बरकरार रखते हुए विपक्षी अखबार दैनिक जागरण (164117 प्रतियां) के मुकाबले अच्छी बढ़त बना ली है।
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स्थानीय मुद्दों पर जबरदस्त पकड़, साफ सुथरा डिजाइन, पाठक की जरूरतों की समझ और सबसे बढ़कर अपनी खबरों की विश्वसनीयता की बदौलत अमर उजाला लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़े इसी तथ्य पर मुहर लगा रहे हैं कि राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में अमर उजाला सबसे भरोसेमंद ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आया है।
अखबार की इस उपलब्धि पर अमर उजाला समूह के निदेशक प्रबल घोषाल ने कहा कि, 'आज के दौर में विज्ञापनदाताओं की नजर उस नौजवां आबादी पर टिकी है जो बड़े शहरों में न रहने के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने के लिए बेताब है। अमर उजाला एक प्रोडक्ट के तौर पर उसी जवां आबादी से जुड़ने में कामयाब रहा है। अमर उजाला की कथावस्तु और उसकी मार्केटिंग रणनीति इसी युवा तबके से लगातार एक रिश्ता कायम करती रही है।
हाल के वर्षों में हिंदी के पाठकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। खास तौर पर छोटे शहरों में बढ़ रहे इन पाठकों में विज्ञापनदाताओं को बड़े अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। अमर उजाला का विराट प्रसार क्षेत्र लखनऊ, कानपुर या आगरा जैसे बड़े शहरों के साथ साथ छोटे शहरों को भी बखूबी अपने दायरे में रखता है। इन्हीं शहरों की बदौलत अमर उजाला अपनी प्रसार संख्या इतनी बढ़ा पाया है।
हमारी सर्कुलेशन रणनीति का मुख्य तत्व ये है कि शहरों के हाई वेल्यू पाठकों को लगातार बढ़ाते हुए उन इलाकों तक भी अपनी पहुंच बनाई जाए जहां लोग अब ब्रांडेड और सेमी-ब्रांडेड उत्पादों का इस्तेमाल करने लगे हैं।'
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ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के ताजातरीन आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से दिसंबर, 2016 के दौरान आपके प्रिय अखबार की प्रसार संख्या केवल उत्तरप्रदेश में ही 22 लाख 57 हजार तक जा पहुंची है। इसमें 2 लाख 88 हजार वेरियंट प्रतियां भी शामिल हैं। अमर उजाला का निकटतम प्रतिद्वंदी दैनिक जागरण 21 लाख 95 हजार प्रतियों के साथ उससे काफी पीछे है।
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टुंडे कबाब के शहर लखनऊ ने भी एक बार फिर अमर उजाला को ही अपना नवाब घोषित किया है। लखनऊ सिटी में अमर उजाला ने 1 लाख 96 हजार प्रतियों के साथ नंबर वन का सिंहासन बरकरार रखते हुए विपक्षी अखबार दैनिक जागरण (164117 प्रतियां) के मुकाबले अच्छी बढ़त बना ली है।
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स्थानीय मुद्दों पर जबरदस्त पकड़, साफ सुथरा डिजाइन, पाठक की जरूरतों की समझ और सबसे बढ़कर अपनी खबरों की विश्वसनीयता की बदौलत अमर उजाला लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़े इसी तथ्य पर मुहर लगा रहे हैं कि राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में अमर उजाला सबसे भरोसेमंद ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आया है।
अखबार की इस उपलब्धि पर अमर उजाला समूह के निदेशक प्रबल घोषाल ने कहा कि, 'आज के दौर में विज्ञापनदाताओं की नजर उस नौजवां आबादी पर टिकी है जो बड़े शहरों में न रहने के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने के लिए बेताब है। अमर उजाला एक प्रोडक्ट के तौर पर उसी जवां आबादी से जुड़ने में कामयाब रहा है। अमर उजाला की कथावस्तु और उसकी मार्केटिंग रणनीति इसी युवा तबके से लगातार एक रिश्ता कायम करती रही है।
हाल के वर्षों में हिंदी के पाठकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। खास तौर पर छोटे शहरों में बढ़ रहे इन पाठकों में विज्ञापनदाताओं को बड़े अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। अमर उजाला का विराट प्रसार क्षेत्र लखनऊ, कानपुर या आगरा जैसे बड़े शहरों के साथ साथ छोटे शहरों को भी बखूबी अपने दायरे में रखता है। इन्हीं शहरों की बदौलत अमर उजाला अपनी प्रसार संख्या इतनी बढ़ा पाया है।
हमारी सर्कुलेशन रणनीति का मुख्य तत्व ये है कि शहरों के हाई वेल्यू पाठकों को लगातार बढ़ाते हुए उन इलाकों तक भी अपनी पहुंच बनाई जाए जहां लोग अब ब्रांडेड और सेमी-ब्रांडेड उत्पादों का इस्तेमाल करने लगे हैं।'